शराब से लेकर राजनीति हर मोर्चे पर घुटने टेकने के लिए मजबूर नीतीश

राजनीति , , बृहस्पतिवार , 12-07-2018


cmnitishkumar-bjppresidentamitshah-sarabbandi-jdu-bjp

जनचौक ब्यूरो

पटना। बिहार में चुनाव की तैयारी शुरू हो गयी है। चुनावी लाभ -हानि के मद्देनजर नीतीश कुमार सरकार नीतियों में फेरबदल करने जा रही है। जिस शराबबंदी का ऐलान करके नीतीश कुमार समाजसेवी मुख्यमंत्री कहलाने लगे थे, वही नीतीश कुमार अब शराबबंदी कानून में ढील देने की तैयारी पूरी कर ली है। बिहार राज्य मंत्रिपरिषद ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 में संशोधन विधेयक 2018 सहित तीन अन्य संशोधन विधेयकों को विधानमंडल के मानसून सत्र में पेश करने को मंजूरी दे दी है। जेडीयू का कहना है कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए मौजूदा प्रावधान काफी कड़ा है। संशोधन विधेयक में प्रावधान में बदलाव कर सजा को कम किया जाना है। बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। इसी सत्र में शराबबंदी पर संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। 

बिहार में पांच अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है और इसे कड़ाई से लागू किए जाने के लिए नीतीश कुमार सरकार ने बिहार मद्य निषेध और उत्पाद अधिनियम 2016 को सर्वसम्मिति से विधानमंडल से पारित करवाया था पर बाद में इसके कुछ प्रावधानों को कड़ा बताए जाने तथा इस कानून का दुरूपयोग किए जाने का आरोप लगता रहा है। लेकिन दूसरी तरफ इस कानून की तारीफ करने वाले भी कम नहीं हैं। बिहार में शराबबंदी की घोषणा होने पर महिलाओं ने इसका व्यापक समर्थन और स्वागत किया था। 

शराबबंदी कानून में ढील देने के सवाल पर जेडीयू का कहना है कि नीतीश कुमार सरकार ने राज्य में पूरी ईमानदारी से शराबबंदी कानून को लागू किया है। इसमें कुछ कड़े प्रावधान हैं, इसके लिए में एक राय बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गयी थी। उक्त कानून का दुरुपयोग न हो, इसके लिए मुख्य सचिव ने अधिकारियों की एक कमिटी बनायी है। समिति अध्ययन के आधार पर यह जानकारी देगी कि इसमें क्या सुधार किया जा सकता है।  

बिहार के वरिष्ठ अधिकारियों का संशोधन पर कहना है कि संशोधन विधेयक में शराब निर्माताओं, विक्रेताओं और आपूर्ति के लिए बने कानून में कोई ढील नहीं देने की संभावना है। पीने वालों की सजा कम की जा सकती है। वर्तमान कानून के अनुभाग 29 से 41 के तहत, शराब भंडारण, बिक्री और निर्माण गैर-जमानती अपराध हैं। हालांकि, इन अपराधों के लिए गिरफ्तार किए गए लोगों को जमानत मिल रही है।   

राजद नेता तेजस्वी यादव कहते हैं कि शराब पीने और शराब रखने के आरोप में पकड़े गए लोगों की सजा कम करने के लिए यह संशोघन नहीं बल्कि चुनावी लाभ लेने के लिए किया जा रहा है। यह पूरी कवायद चुनावी लाभ लेने के लिए किया जा रहा है। दरअसल, शराबबंदी कानून में संशोधन शुद्व रूप से चुनावी लाभ के लिए ही है।

नीतीश कुमार इस समय राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। अपने राजनीतिक आधार को बचाए रखने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं। कल तक वे जिस शराबबंदी कानून का गुणगान कर रहे थे तो अब उसे कड़ा बता रहे हैं। ठीक इसी तरह 2014 में वे भाजपा को सांप्रदायिक बताते हुए 19 साल पुराना गठबंधन तोड़ लिया था। राजद से गठबंधन करने और मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बार फिर भाजपा के साथ आने का कारण राजनीतिक लाभ ही है। इस प्रक्रिया में उनकी राजनीतिक साख और व्यक्तित्व पर बट्टा तो लगा ही उनका राजनीतिक आधार भी खिसकता जा रहा है। 

भाजपा के जिस वर्तमान नेतृत्व से नाराज होकर उन्होंने गठबंधन तोड़ा था अब उसी से मिलने को अभिशप्त हैं। नरेंद्र मोदी के साथ भोज निरस्त करने वाले नीतीश कुमार अब अमित शाह के साथ भोजन कर रहे हैं।  मजबूरी ऐसी कि 2019 लोकसभा चुनाव में सम्मानजनक सीट मिलने की स्थिति में समझौता करने को तैयार दिख रहे हैं। पहले वह बिहार भाजपा के बड़े भाई की भूमिका में थे।   

2019 में होने वाले चुनाव के मद्देनजर जेडीयू और भाजपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर आज नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मुलकात होगी। सू़त्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मुलाकात में बिहार में दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यदि जेडीयू को भाजपा की तरफ से सम्मानजनक सीट देने का वादा किया जाता है तो नीतीश कुमार बिहार विघानसभा का चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ करा सकते हैं। फिलहाल, सीटों के बंटवारे पर पेंच फंसने के कारण अभी अंतिम रूप से कुछ तय नहीं हुआ है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जेडीयू और भाजपा के बीच 2009 लोकसभा, 2014 लोकसभा और 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही अभी हाल ही हुए विधानसभा उप चुनावों के परिणाम को आधार बनाते हुए सीटों के बंटवारे पर बात हो सकती है। लोकसभा के अनुसार भाजपा को फायदा होगा तो विधानसभा और उप चुनाव के परिणाम को आधार बनाया गया तो जेडीयू को सम्मानजनक सीट मिल सकती है। 2014 में बिहार में भाजपा को 22 और जेडीयू को 2 लोकसभा सीट मिली थी। 

 




  

 




Tagbiharcmnitishkumar bjppreidentamitshah jdu bihar madyanishedh

Leave your comment