वामपंथ को बाहर कर महागठबंधन ने किया बीजेपी विरोधी मतों के ध्रुवीकरण की संभावना को कमजोर-माले

राजनीति , पटना, शनिवार , 23-03-2019


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जनचौक ब्यूरो

पटना। भाजपा आज देश के लोकतंत्र, संविधान, जनता के अधिकार और देश की गंगा-जमुनी संस्कृति के खिलाफ बड़ा खतरा बन कर सामने आई है। परिस्थिति की मांग है कि उपरोक्त खतरे के मद्देनजर आसन्न लोकसभा चुनावों में विपक्ष का एक-एक वोट संगठित हो और भाजपा को कड़ी शिकस्त दे। लेकिन कांग्रेस-राजद सहित अन्य दलों के जरिए कल जिस तरह वामपंथ को बाहर रखते हुए भाजपा विरोधी गठबंधन का स्वरूप सामने लाया गया है, वह भाजपा विरोधी वोटों के व्यापक ध्रुवीकरण और बिहार की जमीनी हकीकत के अनुकूल नहीं है। ऐसा लगता है कि 2015 के जनादेश के साथ हुए विश्वासघात और गठबंधन की विफलता से कोई सबक नहीं लिया गया है। सीपीआई (एमएल) ने ये बातें आज पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कही।

संवाददाताओं को संबोधित करते हुए पार्टी के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि भाकपा माले व वामपंथ बिहार में भाजपा के खिलाफ निरंतर लड़ने वाली मजबूत व उसूली ताकत के रूप में स्थापित हैं। वामपंथ बिहार की जनता के संघर्षों की आवाज भी है। गठबंधन में वामपंथ की मजबूत उपस्थिति से न सिर्फ गठबंधन की विश्वसनीयता को बल मिलता बल्कि उसे व्यापक मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान व लोकतांत्रिक ताकतों का समर्थन भी मिलता। उन्होंने कहा कि महागठबंधन ने जिस तरह सीटों का आपस में बंटवारा किया है और वामदलों व उनकी स्वाभाविक दावेदारी वाली सीटों को नजरअंदाज किया है,  वह न्यायसंगत नहीं है। 

गौरतलब है कि बिहार में विपक्षी दलों के बीच सीटों के गठजोड़ में केवल माले को एक सीट दी गयी है वह भी आरजेडी का कहना है कि वह अपने कोटे से देगी। बाकी सभी वामपंथी दलों को दरकिनार कर दिया गया है। सबड़े बड़ा झटका सीपीआई और युवा नेता कन्हैया कुमार को लगा है। बेगूसराय से उनकी सीट तय मानी जा रही थी। लेकिन आखिरी समय में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन ने उसे खारिज कर दिया। इसको लेकर वामपंथी कतारों में बेहद रोष है।

पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेंद्र झा ने कहा कि बिहार विधानसभा के भीतर पार्टियों की दलगत स्थिति और राज्य में पिछले दो वर्षों से चले जनांदोलनों की अभिव्यक्ति भी इस गठबंधन में नहीं दिखती। इन तमाम चीजों ने बिहार में भाजपा विरोधी मतों के ध्रुवीकरण की संभावना को कमजोर किया है। इसने बिहार के व्यापक वाम, लोकतांत्रिक और प्रगतिशील समूहों को निराश किया है। भाकपा माले उनकी चिंता और आग्रह के साथ खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी। 

पार्टी के वरिष्ठ नेता केडी यादव ने बताया कि पहले ही हमने कम सीटों पर लड़ने का फैसला किया था ताकि भाजपा विरोधी मतों में बिखराव न हो। आप को बता दें कि माले ने 6 सीटों पर लड़ने का फैसला किया था जिसमें से बाद में हमने वाल्मीकिनगर सीट भी छोड़ दी। शेष पांच सीटें आरा, सीवान, काराकाट, जहानाबाद और पाटलिपुत्र हैं! राजद की ओर से अपने कोटे से एक सीट का आफर माले को किया गया है। हम भी अपनी उपरोक्त पांच लड़ी जाने वाली सीटों में से एक सीट राजद के लिए छोड़ देंगे। इसके साथ ही माले सीपीआई को बेगूसराय में और सीपीएम को उजियारपुर में अपना समर्थन देगी और बिहार की शेष सीटों पर भाजपा-राजग को हराने के लिए अभियान चलाएगी।








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Umesh Chandola :: - 03-24-2019
कल बिहार में माले की प्रेस कान्फ्रेंस हुई। माले के अनुसार वामपंथी पार्टियों को कांग्रेस गठबंधन में नहीं शामिल करना भाजपा को ताकत देगा। नहीं भाई। नहीं। मेरी पक्की गारंटी है 450 सीट पक्की हैं । तीनों वामपंथी पार्टियां ही काफी है। आखिर 90% गरीब लोगों, मजदूरों ,किसानों का वोट आपको ही तो मिलने वाला है।