भाकपा माले ने रैली कर बीजेपी सरकार के खिलाफ किया आर-पार की लड़ाई का ऐलान

राजनीति , नई दिल्ली, शुक्रवार , 28-09-2018


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जनचौक ब्यूरो

भाकपा माले ने गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में 'भाजपा भगाओ-लोकतंत्र बचाओ' रैली आयोजित की, जिसमें  बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार, अपराध सहित कई मुद्दों को लेकर माकपा, भाकपा, एसयूसीआई, राजद और शरद यादव की लोजद के नेताओं ने भी शिरकत की और केंद्र और राज्य सरकार की विफलता को लेकर कई कठिन सवाल उठाए। इस दौरान देश में चल रहे भय, हिंसा के माहौल और भाजपा सरकारों में हो रहे आर्थिक घोटालों को लेकर एक निर्णायक और बड़ा जनांदोलन खड़ा करने का ऐलान किया गया।

रैली में सभी ने एक स्वर में भाजपा की मोदी सरकार को तानाशाह सरकार करार देते हुए उसके खिलाफ आर–पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। इसको लेकर प्रस्ताव पास हुआ। इसके साथ ही भाजपा की केंद्र सरकार को हटाने के लिए वामपंथ और समाजवादी दलों की एकता बनाने की भी बात की।

रैली में जुटे नेता।

रैली को संबोधित करते हुए भाकपा माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि वामपंथ और समाजवादी एकता से आंदोलन का तूफान खड़ा होगा। इसी एकता के बल पर आने वाले 2019 के आम चुनाव में भाजपा को सत्ता में आने से रोकेंगे।

उन्होंने कहा कि हम सभी इस आधार पर संगठित होने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में गठबंधन बना था, लेकिन वह बीच में ही टूट गया। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया और उन्हें अवसरवादी करार दिया।

रैली में जुटी भीड़।

रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों को विदेश भगाने का भी आरोप लगा। दीपंकर ने कहा कि राफेल घोटाला इतना बड़ा है कि इसके सामने भारत में हुए सारे दूसरे घोटाले बहुत छोटे पड़ गये हैं। मोदी ने यह डील सरकारी कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से लेकर अनिल अंबानी की कंपनी को दे दी और इसे मोदी और भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला बताकर संसद में इसका जवाब नहीं दे रही।   

दूसरी ओर विजय माल्या, मेहुल चौकसी को भगाया जिन्होंने देश के आम जनता का कई सौ करोड़ रुपये का गबन किया है। सारे बैंक एनपीए के तले दबे हुए हैं। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।

इन सबसे ध्यान हटाने के लिए लिंचिंग, लव-जेहाद आदि के द्वारा समाज को तोड़ने का प्रयास हो रहा है। भाजपा धर्म व संप्रदाय के नाम पर लोगों को बांट रही है। समाज में ज़हर घोल रही है।  भाजपा ने अंग्रेज़ों के नियम फूट डालो और राज करो को अपना लिया है और समाज में जाति, समुदाय और संप्रदाय के नाम पर वैमनस्य फैलाकर लोगों को बरगलाने का काम रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने बनाए गए फर्ज़ी राष्ट्रवाद के नाम पर भी लोगों को गुमराह कर रही है। युवाओं को भाजपा की चालाकी समझनी होगी।”

भाकपा माले महासचिव ने मोदी के स्वच्छता अभियान को भी केवल एक जुमला बताया और कहा कि जो लोग भारत को स्वच्छ रखते हैं उन्हें भाजपा और संघ के लोगों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा, स्वच्छता कर्मचारी सीवर में दम घुटने से मर रहे हैं और सरकार अभी भी गहरी नींद में सो रही है। इस माध्यम से दलितों और गरीबों का उत्पीड़न किया जा रहा है। जिन दलितों और गरीबों के पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं है वे शौचालय कहां बनायेंगे। ऐसे में वे खुले में शौच के लिए जाने को विवश हैं, लेकिन उनसे मारपीट की जाती है, उन्हें अपमानित किया जाता है। उन्होंने सरकार से घर और शौचालय की व्यवस्था करने की मांग की।

रैली को संबोधित करते केंद्रीय कमेटी सदस्य सलीम।

दीपंकर भट्टाचार्य ने भाजपा पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा विरोधी मतदाताओं का नाम साजिश के तहत वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। इसको लेकर भाकपा (माले) पूरे बिहार के पंचायत स्तर पर  ‘भाजपा भगाओ, लोकतंत्र बचाओ’ अभियान चला रही है। इसमें हम जनता को बता रहे हैं की किस प्रकार मोदी सरकार अपने किसी भी वादे को पूरा करने में नाकाम रही है। भाजपा केवल अंबानी और अडानी की सेवा कर रही है।”

रैली को संबोधित करने वालों में भाकपा माले नेता राजाराम, शशि यादव के अलावा दूसरे दलों में मुख्य रूप से भाकपा के राज्य सचिव सत्यनारायण सिंह, माकपा के राज्य सचिव अवधेश कुमार, लोजद के नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, राजद के नेता और पूर्व मंत्री आलोक मेहता, शिवचन्द्र राम, जेएनयूएसयू के वर्तमान अध्यक्ष एन साईं बालाजी आदि प्रमुख रहे।

लगभग सभी वक्ताओं ने भाजपा और नीतीश पर हमला किया। एक वक्ता ने तो नीतीश को कठपुतली करार दिया और कहा कि  “बिहार में जब से भाजपा सरकार में आयी है तब से नीतीश कुमार केवल मुखौटा हैं, सरकार तो भाजपा ही चला रही है। इसलिए वो भाजपा की विभाजनकारी नीतियों का पर मौन हैं। आज के समय वो शक्तिविहीन है और भाजपा और आरएसएस की कठपुतली बनकर रह गये हैं।”

रैली में भाग लेने के लिए भाकपा माले के दूसरे प्रदेशों के बड़े नेता भी आये थे। साथ ही सहरसा, सुपौल, अररिया, कटिहार, किशनगंज आदि दूर-दराज के जिलों से रैली में भाग लेने के लिए जत्थे बुधवार से ही पहुंचने लगे थे। एक अनुमान के मुताबिक राज्य के सभी हिस्सों से तकरीबन 1 लाख से अधिक लोग इस रैली में शामिल हुए।

(कुछ इनपुट न्यूजक्लिक से लिया गया है।)








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