"सम्मान से नहीं छुपेगा योगी का दलित विरोधी चेहरा"

मुद्दा , , शनिवार , 14-04-2018


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जनचौक ब्यूरो

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र सम्मान देने की मुखालफत करने वाले पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी को पुलिस ने आज लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ हरिश्चचंद्र, गजोधर प्रसाद और एनएस चौरसिया को भी हिरासत में लिया गया। ये सभी लोग योगी को दलित सम्मान दिए जाने का विरोध कर रहे थे। रिहाई मंच ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे योगी सरकार का अलोकतांत्रिक कदम बताया। संगठन के नेता मोहम्मद शुएब ने कहा कि दारापुरी और उनके साथियों की गिरफ्तारी ने बता दिया है कि योगी कितने बड़े दलित मित्र हैं। 

उन्होंने बताया कि पुलिस ने दारापुरी को बख्शी तालाब, सीतापुर के रास्ते में उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वो अंबेडकर महासभा की ओर जा रहे थे। दारापुरी डा. लालजी निर्मल द्वारा योगी को दलित मित्र का सम्मान दिए जाने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डा. निर्मल ने उन लोगों के खिलाफ प्रशासन में लिखित शिकायत की थी। उन्होंने योगी को दलित मित्र का सम्मान देने को अवैधानिक बताया। इस सम्मान को लेकर महासभा के पदाधिकारियों द्वारा ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। 

उनका कहना था कि इस सरकार में दलितों पर जब इतना अत्याचार किया जा रहा है तो ऐसे में योगी जी को हम किसी भी हालत में दलित मित्र नहीं मानते हैं। उनके समेत सारे दलित नेता उनका विरोध करते हैं। 2 अप्रैल के भारत बंद को लेकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर, सहारनपुर में जो ज्यादितियां की गई हैं, जिस तरह हजारों लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारियां की गई हैं, आलम ये है कि कई जिलों के दलित घर छोड़कर भगे हुए हैं, नौजवानों का उत्पीड़न किया जा रहा है। ऐसे में योगी कैसे दलितों के मित्र हो सकते हैं। 

 




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