जमीन पर कब्जे की मांग को लेकर दलित नेता के आत्मदाह के बाद गुजरात में रोष, विरोध में आज पाटन बंद

ज़रा सोचिए... , पाटन/गांधीनगर, शुक्रवार , 16-02-2018


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कलीम सिद्दीकी

 

पाटन/गांधी नगर। चर्चित ऊना कांड की घटना के बाद से अब तक 24 दलितों ने आत्महत्या का प्रयास किया है जिनमें से 5 की मौत हो गई थी। बुधवार को पाटन जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर दोपहर 1.30 बजे भानु भाई जेठा भाई वनकर, राम भाई मधा भाई चमार तथा भेमा बेन कांति भाई वनकर ने आत्मदाह करने का प्रयास किया। दो लोगों को पुलिस तथा दलित समाज के अन्य लोगों ने आत्मदाह करने से रोक लिया लेकिन भानु भाई ने कलेक्टर ऑफिस के बाहर अपने ऊपर केरोसिन डालकर आग लगा ली। जिसके चलते वो बुरी तरीके से जल गए।

 

भानु भाई को पहले पाटन सिविल अस्पताल में ले जाया गया। फिर गंभीर हालत होने के कारण उन्हें मेहसाणा सिविल हॉस्पिटल ट्रांसफर कर दिया गया। उसके बाद गांधीनगर स्थित अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। रात के दस बजे 10 बजे जनचौक संवाददाता ने अपोलो जाकर भानु भाई की पत्नी, रिश्तेदारों तथा अन्य लोगों से मुलाकात की। उस समय भानु भाई आईसीयू में थे। जहां डॉक्टर श्रीकांत लागवानकर की टीम इलाज कर रही है। अपोलो में उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ता सामाजिक जागृति एवं एकता मिशन के अध्यक्ष केवल सिंह राठौर ने जनचौक को बताया कि "भानु भाई की 96 प्रतिशत बर्निंग है किडनी और फेफड़े पर भी असर हुआ है जिसके चलते हालत गंभीर बनी हुई है। भानु भाई को जमीन के टुकड़े से कोई लेना-देना नहीं था। वह केवल समाज के गरीब दलितों की जमीन के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। वो कागज पर आवंटित जमीन जिसे सरकार ने खुद ही कब्ज़ा कर लिया था उसके लिए संघर्ष कर रहे थे"। आपको बता दें कि भानु भाई तलाठी (पटवारी) की नौकरी से रिटायर हुए हैं। और पाटन जिले के उंझा कस्बे के रहने वाले हैं। उनके दो बेटे हैं एक शिक्षक है दूसरा एमटेक का छात्र।

वो फाइव स्टार यूथ फेडरेशन नाम की संस्था के मंत्री हैं। यह पूरा मामला समी तहसील के दूधका गांव का है। सरकार द्वारा आवंटित जमीन के टुकड़ों को गुजरात सरकार ने वापस ले लिया था। संघर्ष के बाद जमीन वापस तो जरूर मिली लेकिन मात्र कागजों पर। लंबे समय से जमीन का भौतिक कब्जा ना मिलने पर भानु भाई, हेमा बहन और राम भाई चमार ने 7 फरवरी, 18 को जिला कलेक्टर को लिखित में दिया था कि दूधका गांव के दलितों को उनकी जमीन का भौतिक कब्जा नहीं मिला तो वह 15 फरवरी को दोपहर 1 बजे कलेक्टर ऑफिस के सामने अपने दो अन्य साथियों के साथ आत्मदाह कर लेंगे। इससे पहले भानु भाई ने मुख्यमंत्री को भी आत्मदाह की सूचना दी थी।

17 जनवरी को मुख्यमंत्री के सचिव ने जिला कलेक्टर को चिट्ठी के द्वारा जानकारी दी थी। लेकिन इन सबके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। घटना की जानकारी के तुरंत बाद गुजरात के दलित नेता एवं विधायक जिग्नेश मेवानी अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए कहा कि "इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद मेरे पास शब्द नहीं हैं कि मैं कुछ कह सकूं। भानु भाई की हालत गंभीर है उनकी जान को भी खतरा है। यह गुजरात का दयनीय और विनाशकारी मॉडल है। जिसमें जमीन के टुकड़े के लिए आत्मदाह करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री रूपानी को मुंह खोलना चाहिए और क्रिमिनल नेग्लिजेंस के लिए माफी मांगनी चाहिए।"

राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के सुबोध कुमार ने बताया कि "भानु भाई ने सोशल मीडिया के माध्यम से आत्मदाह करने की धमकी को आम किया था उसके बावजूद तंत्र तमाशा देखता रहा।" परमार ने आगे कहा कि "प्रधानमंत्री गुजरात आते हैं तो दर्जनों आंदोलनकारियों को डिटेन किया जाता है। इस घटना की जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने इन्हें डिटेन क्यों नहीं किया।"

इस घटना के बाद अपोलो हॉस्पिटल में भाजपा विधायक और फिल्म कलाकार हितु कनोडिया गांधीनगर स्थित अपोलो हॉस्पिटल पहुंचे। जहां पर उन्हें परिवार, रिश्तेदारों के अलावा उपस्थित लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। उग्र विरोध होता देख कनोडिया को वापस लौटना पड़ा। उपस्थित लोगों ने बताया कि कनोडिया भाजपा की भाषा बोल रहे थे। उन्होंने ऐसे समय में समाज के साथ खड़े होना चाहिए था।

कांग्रेस पार्टी के एस-एसटी मोर्चे के चेयरमैन नौशाद सोलंकी ने जनचौक संवाददाता को बताया कि "इस मामले में कलेक्टर और पुलिस एफआईआर दर्ज करने के लिए भी तैयार नहीं हैं। सरकार का रुख बहुत ही निराशाजनक है।"

क्या है पूरा मामला 

वर्षों पुरानी दुधात गांव के सर्वे नंबर 1022 जिसका क्षेत्रफल 8 23 54 चौरस मीटर है। जिसे ₹22236 मैसूल विभाग में जमा कर 9 अक्तूबर, 13 को रि ग्रांट कराया गया था। फिर भी सरकार भौतिक कब्जा नहीं दे रही थी। इसी प्रकार से समी तालुका के कई अन्य गांव में भी सरकार ने ऐसा ही किया था। दलित समाज का आरोप है कि सरकारी रि ग्रांट करने के बावजूद भी दलितों को उनकी जमीन का भौतिक कब्जा नहीं मिल रहा है। जिसके चलते इन तीन लोगों ने 15 फरवरी 18 को इस घटना को अंजाम दिया।

 










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