ह्वाट्सअप संदेश पर दलित प्रोफेसर की पिटाई और निलंबन

ज़रा सोचिए... , , बृहस्पतिवार , 04-05-2017


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जनचौक ब्यूरो

पुणे। आधुनिक समाज के तमाम क्षेत्रों में तरक्की की बुलंदियां छूने के बावजूद हम अभी भी पिछड़ेपन, जातीय उत्पीड़न और छुआछूत की दीवारों को नहीं तोड़ सके हैं। अक्सरहां देश के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। आमतौर पर ये गांव या फिर पिछड़े इलाके में होती हैं। लेकिन जब घटना किसी बड़े शहर और उसमें भी बड़ी शिक्षण संस्था से जुड़ी हो तो मामला गंभीर हो जाता है। ऊपर से शहर अगर सूबे की सांस्कृतिक राजधानी कहलाता हो तो चिंतित होना लाजमी है।

घटना 15 मार्च की है। जब महाराष्ट्र के खोपोली में एक दलित प्रोफेसर की पहले भीड़ ने पिटाई की और फिर उन्हें कालेज से निलंबित कर दिया गया। ये सब कुछ उनके एक ह्वाट्सअप मेसेज को फारवर्ड करने के चलते हुआ। प्रोफेसर का दावा है कि ह्वाट्सअप मेसेज उन्हें हटाने का महज एक बहाना हो सकता है। मामले की जांच कर रही टीम भी कमोबेश उसी नतीजे पर पहुंच रही है।

जातीय उत्पीड़न!

दि वायर पोर्टल से बातचीत में प्रोफेसर सुनील वाघमारे ने बताया कि कालेज में बहुत सालों से मैं जातीय उत्पीड़न और भेदभाव का सामना कर रहा हूं और इसके बारे में मैंने मैनेजमेंट से भी बात की है। प्रधानाचार्य अक्सर हमें यह याद दिलाना नहीं भूलते थे कि मैं आरक्षण का एक लाभार्थी हूं

वाघमारे मांग समुदाय से आते हैं जो अनुसूचित जाति की श्रेणी में आता है। वो खोपोली म्यूनिसिपल कौंसिल (केएमसी) के कालेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कामर्स में कामर्स विभाग के अध्यक्ष थे।

व्हाट्सअप मेसेज बना मुसीबत

15 मार्च को वाघमारे ने एक मेसेज फारवर्ड किया जिसमें मराठी में लिखा था कि क्योंकि हम विश्वास कर रहे हैं.... इसलिए हमें विश्वास करते रहना चाहिए.... क्या आपके पिता दो बार पैदा हुए थे?????” उन्होंने इस संदेश को प्रोफेसरों के एक ह्वाट्सअप ग्रुप को भेजा जिसे चार साल पहले बनाया गया था और उसमें 34 सदस्य थे। इस ग्रुप में कालेज के प्रधानाचार्य भी शामिल थे। संदेश परोक्ष रूप से शिवाजी की साल में दो बार जन्मतिथि मनाने की तरफ इशारा कर रहा था। संदेश के बाद समूह में किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी।

सामाजिक न्याय के लिए गठित संयुक्त कार्रवाई समिति, जिसका रोहित वेमुला की खुदकुशी के बाद गठन किया गया था और इसमें रिपब्लिकन पैंथर्स, कमेटी फार प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रैटिक राइट्स आदि के कार्यकर्ता शामिल थे, की एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के मुताबिक उसके अगले दिन कालेज के प्राधानाचार्य नरेंद्र पवार ने वाघमारे से संदेश के लिए माफी मांगने को कहा। वाघमारे ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी का दिल दुखाना नहीं था और वो माफी मांगने के लिए तैयार थे। प्रधानाचार्य ने उन्हें बताया कि संदेश बाहर के दूसरे ग्रुपों में भी चला गया है।

प्रबंधक के कमरे में पिटाई

17 मार्च को वाघमारे को एक संदेश मिला जिसमें वाघमारे को प्रबंधक के कमरे में बुलाया गया था जहां पहले से ही 20 लोग मौजूद थे। वो अपने आपको शिवप्रेमी बता रहे थे और शिवाजी के भक्त थे। बताया जाता है कि कालेज के प्रबंधन समिति के सदस्य भी उसमें मौजूद थे। शिवप्रेमियों ने उनसे संदेश फारवर्ड करने का कारण पूछा। फिर किसी ने उन पर हमला बोल दिया। उसके बाद दूसरे भी उसमें शामिल हो गए। फिर रूम के बाहर से भी कुछ सदस्य आ गए और उन्होंने भी वाघमारे को पीटना शुरू कर दिया। हमले में वो जल्द ही बेहोश हो गए और फिर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस हमले में उनके पैर, दोनों कानों और सिर में चोटे आईं।

एफआईआर और निलंबन

इस बीच पुलिस बुला ली गयी और एक दूसरे प्रोफेसर से एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा गया। ये काम ह्वाट्सअप के एडमिन प्रोफेसर नागरगोजे से करवाया गया। एफआईआर दर्ज होने के एक घंटे के भीतर वाघमारे को दूसरों की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में दिख रहा है कि गंभीर रूप से घायल वाघमारे को पुलिस गाड़ी में ले जा रही है और पीछे शिवाजी के पक्ष में नारे लगाए जा रहे हैं।

गिरफ्तार होने के एक घंटे के भीतर प्रबंधन समिति ने वाघमारे को गलत आचरण, नैतिक अधमता और सोशल मीडिया का बेजा इस्तेमाल करने के लिए कालेज से 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया।

वाघमारे का आरोप है कि उन्हें कई सालों से इसी तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्हें नौकरी से निकालने के लिए ह्वाट्सअप के इस संदेश का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें इसी तरह के ढेर सारे कारण बताओ नोटिस जारी हो चुके हैं।






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