पीएमओ के मना करने के बावजूद नमक सत्याग्रह की वर्षगांठ पर आयोजित हुआ सेमिनार

कार्यक्रम , अहमदाबाद, शुक्रवार , 15-03-2019


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। 1930 में हुए नमक सत्याग्रह की वर्षगांठ के अवसर पर अनहद संस्था ने अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ में अहिंसा और सद्भाव के लिए एकजुट भारत विषय पर सेमिनार का आयोजन किया।  इस मौके पर लगभग सभी वक्ताओं ने माना कि गांधीजी के विचार आज भी जीवित हैं गांधीजी के अहिंसावादी विचार पूरे विश्व में भारत की पहचान हैं। आज गांधी के विचारों को मारने का प्रयत्न किया जा रहा है। 

अहमदाबाद के प्रसिद्ध अहिंसावाद गायक चारु और पायल के गीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अनहद की प्रमुख शबनम हाशमी ने सभी वक्ताओं का स्वागत किया। स्वागत भाषण में उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम को रोकने के लिए आयोजक देव देसाई को पीएमओ से फोन आया था। देश में जब धर्म और जाति के नाम पर हिंसा बढ़ती जा रही है ऐसे वातावरण में कोई संस्था गांधीजी की दांडी मार्च की 89 वीं वर्षगांठ पर अहिंसावाद की अहमियत पर चर्चा कर रहा हो और पीएमओ रोने का प्रयत्न कर रहा हो तो कह सकते हैं देश में गणतन्त्र खतरे में है।

जस्टिस कुरियन जोसेफ

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश कुरियन जोसेफ ने अपने संबोधन में कहा " गांधीजी के सपनों का भारत ही मेरे सपनों का भारत है जहां हिंसा की जगह न हो। संविधान एक पवित्र पुस्तक है जिसमें लिखा है हर धर्म, ज़ाति, लिंग के लोग शांति बनाकर रखें यह सभी की ज़िम्मेदारी है परंतु इस समय क्या हो रहा है।"

वरिष्ठ पत्रकार आरफा ख़ानम शेरवानी 

बेबाक पत्रकार आरफा ख़ानम शेरवानी ने अपने वक्तव्य में अहिंसा के साथ साथ महिलाओं के अधिकार पर भी जोर दिया। शेरवानी ने कहा " कोई ऐसा देश नहीं है जहां गांधीजी के विचारों को सम्मान नहीं दिया जाता हो। मैंने बर्लिन शहर की दीवारों पर गांधीजी की तस्वीर देखी है। उन्होंने हिटलर को देखा है। शायद इसीलिए वह गांधीजी के अहिंसावादी विचारों को अच्छे से समझ पा रहे हैं। मुठ्ठी भर नमक को जब गांधीजी ने उठाया तो ब्रिटिश साम्राज्य हिल गया। आज इस हाल में बैठे मुट्ठी भर लोगों से पीएमओ को भी डर लग रहा है। हिंसा जो अख़लाक़ से शरू हुई वह पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या तक पहुंच गई। हिंसा में मानने वालों को शान्ति और शांति के प्रतीकों से डर लगता है।" शेरवानी ने लव जेहाद और ट्रिपल तलाक बिल को महिला विरोधी बताया।

एयर मार्शल वीर नारायण (रिटायर्ड)

एयर मार्शल वीर नारायण (रिटायर्ड) ने अपने वक्तव्य में कहा "गांधीजी की 240 मील की दांडी मार्च की ऐतिहासिक यात्रा जो गांधी जी ने अपने कुछ साथियों के साथ शुरू की थी। पहुंचते-पहुंचते जनसैलाब में तब्दील हो गई। इस यात्रा से गांधीजी ने अहिंसा का संदेश पूरी दुनिया को दिया। आज हम ही लोग अहिंसा को भूल रहे हैं। अपनी तारीफ में फुल पेज प्रचार दिया जाता है और कहीं भी अहिंसा के लिए दो लाइन भी नहीं होती है और क़ातिल की तारीफ की जाती है इसका जवाब कौन देगा।"

वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह 

सीनियर पत्रकार भाषा सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा " गांधीजी के हत्यारे आज भी गांधीजी की हत्या कर रहे हैं और हमारे जैसे लोगों को देशविरोधी बताया जा रहा है। सच कहें तो गांधीजी ने ऐसे भारत की कल्पना नहीं की थी। सत्ता मीडिया को अपना पालतू कुत्ता बना रही है। पुलवामा, इमरान खान और दोस्ती पर बात करो तो देश विरोधी कहा जाता है गांधीजी के नमक सत्याग्रह से सीखने की आवश्यकता है। किसान, दलित और अकलियत के अधिकारों की बात करो तो 56 इंच का सीना दिखाया जाता है। अपने आप को माचो बताकर क्या कहना चाहते हैं। 56 इंच का स्लोगन ही महिला विरोधी है। इस देश में गांधी और अंबेडकर के विचारों पर कोई समझौता नहीं हो सकता।"

प्रोफेसर हेमंत शाह 

प्रोफ़ेसर हेमंत शाह ने संबोधित करते हुए कहा "जिस देश का बजट 27 लाख करोड़ का हो और 4 लाख करोड़ मिलिट्री और डिफेन्स में ख़र्च होता हो ऐसे देश के पीएमओ को गुजरात विद्यापीठ के इस हॉल में एकत्र कुछ लोगों से डर लग रहा है। " शाह ने आगे कहा " हां मैं अर्बन नक्सल हूं तो हूं। देशद्रोही भी हूं। देश में बराबरी के लिए प्रश्न भी करता रहूंगा। कुछ गिने चुने लोगों को 27 माले के महल की क्या आवश्यकता है।"

वैज्ञानिक गौहर रज़ा

कवि एवं वैज्ञानिक गौहर रज़ा ने कहा " देश का आधार विज्ञान और तकनीकी पर होना चाहिए न कि बाबाओं पर। देश आजाद होने के बाद हमारे पहले प्रधान मंत्री ने देश का आधार विज्ञान एवं तकनीकी पर रखा था यदि बाबाओं पर आधार बनाया होता तो आज भारत किसी लैटिन अमेरिकन या अफ्रीकन जैसा होता। वैज्ञानिक दृष्टिकोण में ही भारत का भविष्य है। अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधान मंत्री जिन बाबाओं के साथ नाचते थे वह आजकल बलात्कार के केस में जेल में बंद हैं। प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण विज्ञान पर हमला है। इसी लिए उनके मंत्री भी evolution की थ्योरी पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। तकनीकी और विज्ञान पर रिसर्च करने वाले संस्थान फंड की कमी के कारण तनख्वाह भी नहीं दे पा रहे। जिससे हमारा देश पिछड़ जाएगा।

डॉक्टर हर्ष वर्धन

इंक्लूसिव इंडिया के डॉक्टर हर्षवर्धन ने बताया "आज इस देश मे आयुर्वेद को एलोपैथिक से बेहतर बताने का प्रयत्न हो रहा है जबकि तुलना करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है।"

गगन शेट्ठी

जनविकास के गगन शेट्ठी ने कहा "संवैधानिक संस्थाओं को मारकर गणतन्त्र को मारने का प्रयत्न हो रहा है। जिस पर पूरे देश को सोचने की आवश्यकता है। "

कार्यक्रम का संचालन देव देसाई ने किया। रिटायर्ड जज एल आर पठान , नूर जहां दीवान,  एडवोकेट उवेश मलिक इत्यादि अतिथि के तौर पर उपस्थित थे।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)










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Abbas Mehdi :: - 03-15-2019
"I will never allow anyone to walk through my mind, with dirty feet" M.K. Gandhi ( I am sure he must be turning in his grave) , because that is exactly whats happening through out the country and i is reaching a pinnicale in the last few years. The speeches and program was precisely enumerating theseTRUE Gandhian values, nevertheless such efforts should and need to be pursued endlessly.Kudos to the organisers for putting together such wonderful effort in the RIGHT Please count my support always with you.

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