डीयू में गणित विभाग के 80 फीसदी छात्र फेल, नतीजों के खिलाफ एक महीने से आंदोलनरत हैं छात्र

मुद्दा , नई दिल्ली, सोमवार , 18-03-2019


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अमित कुमार

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के गणित विभाग के छात्र-छात्राएं बीते महीने 14 फरवरी से प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों में इस बात को लेकर रोष बहुत पहले से ही था कि शिक्षकों द्वारा कई महत्वपूर्ण विषयों को अच्छे से नहीं पढ़ाया जाता। लेकिन फरवरी महीने में इनके सब्र का बांध उस समय टूट गया जब उन्हें पता चला कि 80% से ज्यादा छात्र-छात्राएं विभिन्न विषयों में फेल कर दिए गए हैं। यहां यह बात समझने वाली है जब वो बोलते हैं कि उन्हें फेल कर दिया गया है। 

गणित विभाग के द्वितीय वर्ष के 40 छात्रों में 35 छात्र एक विषय में फेल हैं तो एक अन्य विषय में सभी के औसत 45% अंक भी नहीं हैं। इसी विभाग के प्रथम वर्ष के 300 छात्रों में 150 छात्र एक विषय में फेल हैं तो एक अन्य विषय में 130 फेल। इससे भी बुरी स्थिति NCWEB के छात्रों की है जहाँ एक विषय में 60 में 58 छात्र फेल हैं तो एक अन्य विषय में 57 फेल हैं। जो छात्र फेल किये गये हैं वो देश के दूसरी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं को पास करते हुए अपना लोहा मनवा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा हर छात्र से प्रति विषय 1000 रुपये वसूलने के मकसद से उन्हें फेल किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्रों का यही कहना है। अलग-अलग विषयों और सेमेस्टर के छात्रों के परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों द्वारा बनाए आंकड़े नीचे दिए गए हैं।

डीयू में विरोध प्रदर्शन।

मुश्किलों का सबब ऐसा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठिति संस्थान में शिक्षकों पर पढ़ाई के मामले में खानापूर्ति और दूसरी तरफ छात्राओं द्वारा कक्षा में सवाल पूछे जाने पर ‘केबिन में आ जाना बता दूंगा’ ऐसा जवाब सुनना पड़ता है। कक्षा के दौरान भी अभद्र, लैंगिक भेदभाव, और कथन सुनाए जाते हैं।

इन सबसे आक्रोशित छात्र पिछली 14 फरवरी से गणित विभाग में धरने पर बैठे हैं। और कई बार इस मुद्दे पर रैली और प्रदर्शन कर चुके हैं। लगातार धरना-प्रदर्शन के बाद 9 मार्च को गणित विभाग के रविन्द्र ने अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी।

बताया जाता है कि डीयू प्रशासन और परीक्षा विभाग लगातार अलग-अलग स्तर पर विद्यार्थियों को परेशान कर रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि गणित विभाग के छात्रों और छात्र संगठनों ने वीसी ऑफिस के सामने विरोध-प्रदर्शन किया। इस दबाव के बाद उन्हें बात करने के लिए ऑफिस से बुलाया गया। बावजूद इसके किसी भी तरह का संतोषजनक हल नहीं निकल सका। जिसके बाद 14 मार्च को एक जनसभा का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय के अध्यापकों के सामने गणित विभाग के अलावा भौतिकी, रसायन, इंग्लिश, इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से अपनी समस्या को रखा।  

14 मार्च को रात 10 बजे जब सारे विद्यार्थी अपनी बैठक कर रहे थे तभी 100 पुलिस की संख्या में आया पुलिस बल के जवानों ने पिछले 6 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे रविन्द्र को जबरदस्ती उठाने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उपस्थित विद्यार्थियों के साथ जमकर हाथापाई की और छात्राओं के साथ अभद्रता व्यवहार किया। BSCEM अध्यक्ष राजवीर का गला घोटने तकत का प्रयास किया गया। वहीं DSU के सदस्य प्रबल और SFI के सुमित, अनिल और नोएल पर पुलिस ने हाथापाई की और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इन सबको अमानवीय तरीके से घसीटते हुए मॉरिस नगर थाने ले जाया गया।

डीयू में विरोध प्रदर्शन।

रिपोर्ट के मुताबिक इस हिंसक घटना के बाद गणित विभाग के छात्रों ने सामूहिक रूप से नामांकन वापस लेने का निर्णय लिया है। छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार का कैंपस में जिस तरह से मज़ाक उड़ाया जा रहा है उसको लेकर छात्रों में बेहद रोष है। इस बीच 15 मार्च को छात्रों ने एक बार फिर प्रदर्शन किया। 

 

धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं की मांगें: -

1.  विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिका को बिना शुल्क लिए ही पारदर्शी तरीके से पुनर्मूल्यांकित करने के लिए 15 दिन के अंदर एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाए।

2.  हर विद्यार्थी को उसकी उत्तर पुस्तिका दिखाई जाए;  वह इंटरनल परीक्षा हो या कि  हाउस परीक्षा या फिर सेमेस्टर परीक्षा हो।

3.  वैकल्पिक विषय का चुनाव विद्यार्थियों को उनकी पसंद के आधार पर करने दिया जाए। अंकों के आधार पर नहीं। गौरतलब है कि यह डीयू के राजनीति विभाग में लागू है।

4.  जिन विद्यार्थियों के बैकलॉग आए हैं, उनकी पुनर्परीक्षा हर सेमेस्टर परीक्षा के दो महीने के अंदर संपन्न करवाई जाए।

5.  कई छात्राओं ने विभाग के शिक्षकों पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। छात्रों ने यह भी मांग की है कि विभाग में चयनित इंटर्नल कम्पलेंट्स कमेटी (आईसीसी) तत्काल बनाई जाए।

(दिल्ली से अमित कुमार की रिपोर्ट।)

 

 









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