11 पूर्व सांसदों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक साज़िश का मुकदमा

देश , नई दिल्ली, शुक्रवार , 08-12-2017


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जनचौक ब्यूरो

नयी दिल्ली। पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के चर्चित मामले में 11 पूर्व सांसदों पर भ्रष्टाचार और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप में मुकदमा चलेगा। दिल्ली की एक अदालत ने 12 साल पुराने इस मामले में आरोप तय करते हुए इस आशय के आदेश दिए। 

विशेष न्यायाधीश किरन बंसल ने यह आदेश देते हुए कहा कि इन सभी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। यह मुकदमा 12 जनवरी से शुरू होगा। 

2005 के इस मामले में भाजपा के 6, बसपा के 3, कांग्रेस और राजद के एक-एक पूर्व सांसद आरोपी हैं। इनमें 10 उस समय लोकसभा के सांसद थे जबकि एक छत्रपाल सिंह लोढ़ा राज्यसभा से थे। 

अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता आईपीसी के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप तय किए हैं।

यह पूर्व सांसद हैं- भाजपा के वाई.जी महाजन, छत्रपाल सिंह लोढ़ा, अन्ना साहेब एम के पाटिल, चंद्र प्रताप सिंह, प्रदीप गांधी और सुरेश चंदेल।

कांग्रेस के राम सेवक सिंह, राजद के मनोज कुमार और बसपा के नरेन्द्र कुमार कुशवाहा, लाल चंद्र कोल और राजा रामपाल। 

आपको बता दें कि वर्ष 2005 में दो पत्रकारों ने इन तत्कालीन सांसदों के खिलाफ एक स्टिंग ऑपरेशन किया गया था जो 12 दिसंबर 2005 को एक निजी समाचार चैनल पर प्रसारित हुआ था। यह स्टिंग जिसमें संसद में सवाल पूछने के बदले में नकद लेने की बात सामने आई, इसे पैसे लेकर सवाल पूछने के नाम से जाना जाता है।

यह स्टिंग सामने आने के बाद इन सभी सांसदों को संसद से निष्कासित कर दिया गया था। 

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में वर्ष 2009 में आरोप पत्र दाखिल किया था।

अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलों के समर्थन में सीडी और डीवीडी पेश की जिसमें आरोपियों और अन्य के बीच हुई बातचीत कैद है।

विशेष लोक अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने रामपाल के तत्कालीन निजी सहायक रविंद्र कुमार के खिलाफ भी आरोप तय किए हैं।

एक अन्य आरोपी विजय फोगाट के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि उसकी मौत हो चुकी है। फोगाट ने इस मामले में कथित तौर पर एक बिचौलिए की भूमिका निभाई थी।

इस मामले में पूर्व सांसदों के अलावा दो पत्रकारों का भी नाम आरोप पत्र में शामिल किया गया था जिनपर भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत कथित रूप से अपराध को बढ़ावा देने के आरोप थे। निचली अदालत ने उन्हें समन भेजा था लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ जांच को रद्द कर दिया था।

आरोप तय करते हुए विशेष न्यायाधीश किरण बंसल ने आरोपियों से पूछा कि आप सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार व आपराधिक षड़यंत्र के तहत मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। क्या वे अपना अपराध स्वीकार कर रहे हैं।

आरोपियों ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए अपना अपराध स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा वे मुकदमा लड़ना चाहते हैं। अदालत ने सभी को 12 जनवरी 2018 को पेश होने का निर्देश देते हुए अभियोजन पक्ष को अपने गवाहों को पेश करने को कहा है।

 










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