भूख से मरी सावित्री ने किया व्यवस्था को नंगा, तीन मौतों के बाद भी रघुबर ने नहीं हटायी बेशर्मी की चादर

त्रासदी , रांची/गिरीडीह, बुधवार , 06-06-2018


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विशद कुमार

रांची/गिरीडीह। पिछले साल अक्टूबर में सिमडेगा की 11 वर्षीय संतोषी की भूख से हुई मौत के बाद पूरे देश में रघुबर सरकार की काफी थू-थू हुई, बावजूद इसके राज्य के सिस्टम की बेशर्मी बरकरार है और इस बेशर्मी का प्रमाण यह है कि पिछले दो दिनों में लगातार सूबे में भूख से दो मौतें हो गईं। तुर्रा यह कि इन मौतों का रघुबर दास को काफी दुख है और उन्होंने इस संबंध में जिला प्रशासन को मामले की जांच कर तुरंत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

और जिला प्रशासन जैसा कि पिछली कई इस तरह की मौतों पर हुआ है साफ कह दिया कि दोनों मौतें बीमारी से हुई हैं। जबकि सारे प्रमाण चिल्ला-चिल्ला कर बता रहे हैं कि मौत का कारण भूख है। 

उल्लेखनीय है कि गिरीडीह जिला अंतर्गत डुमरी अनुमंडल क्षेत्र मंगरगड़ी गांव में पिछले दिनों सावित्री देवी की उस वक्त भूख से मौत हो गई जब उन्हें राशनकार्ड के अभाव में सरकारी राशन नहीं मिल पाया। नतीजतन उन्हें लगातार चार दिनों तक भूखे रहना पड़ा और पेट में अन्न का एक दाना भी नहीं जा पाया।

बता दें कि तीन दिनों तक मृतका की बहू को काम न मिलने पर घर का चूल्हा भी नहीं जल सका। पड़ोसियों से भोजन मांगने में लज्जा आड़े आयी, उसका नतीजा ये रहा कि एक जर्जर काया का असमय अवसान हो गया। उसके बाद सावित्री के शव का रविवार को दाह संस्कार कर दिया गया।

भूख से मरी सावित्री को ले जाते परिजन।

सावित्री के घर की माली हालत काफी ख़राब है। सावित्री के परिवार के पास 30 डिसमिल जमीन है। जमीन पर किसी भी तरह की फसल नहीं हो पा रही थी। फसल और उपज के नाम पर खेत में एक पपीता का पेड़ लगा है। मृतका के पुत्र हुलास महतो ने बताया कि गरीबी तो थी और वह जिस काम के लिये यूपी गया था, वहां पर भी पर्याप्त पैसा नहीं मिलता था। उसे मात्र दो हजार रुपये मिलता था, जो उसके भोजन में ही खर्च हो जाता था।

बड़ा भाई टावर लाइन में काम करता है और उसे भी छह माह से पैसा नहीं मिला था। हुलास ने बताया कि उसकी भाभी ही भोजन का जुगाड़ करती थी। उसने भी स्वीकार किया कि उसकी मां की मौत भोजन के अभाव के चलते हुई है।

दो दिनों पूर्व अनाज मिल जाता तो शायद जिंदा रहती सावित्री

सोमवार को प्रशासन के आदेश पर स्थानीय डीलर नंदकिशोर प्रसाद सिन्हा ने 50 किलो अनाज पहुंचाया। अनाज पहुंचा तो घर का चूल्हा भी जला और बच्चों को भोजन भी मिला। भोजन मिलने पर बच्चे काफी खुश दिखे। मृतका के बेटे की आंखों में आंसू साफ-साफ झलक रहा था। हुलास ने कहा कि यही अनाज दो दिनों पूर्व मिल जाता तो शायद उसकी मां आज जिंदा रहती।

रघुबर दास और सावित्री।

ऑनलाइन राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया में परिवर्तन की मांग

अब सावित्री देवी की भूख से हुई मौत का मामला तूल पकड़ लिया है। मौत के बाद भाकपा माले की केंद्रीय कमेटी ने व्यवस्था को दोषी करार दिया तो भाजपा के कोडरमा सांसद रविंद्र राय ने इसे नौकरशाह की लापरवाही करार दी। डॉ. रविंद्र राय ने कहा कि ऑनलाइन राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया में परिवर्तन किया जाना चाहिए। जबकि पूर्व विधायक विनोद सिंह ने कहा कि गढ़वा, सिमडेगा, देवघर, धनबाद व गिरिडीह जिले के तिसरी में भूख से हुई मौत के बाद भी राज्य सरकार ने सबक नहीं लिया। इस मामले को लेकर माले कार्यकर्ता आगामी नौ जून को जिले के सभी प्रखंडों में विरोध-प्रदर्शन करेंगे।

(विशद कुमार स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल रांची में रहते हैं।)










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