जीएन साईंबाबा की गिरफ्तारी, चुनाव में धांधली की आशंकाओं और मोदी सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ अमेरिका में प्रदर्शन

मुद्दा , न्यूयार्क, सोमवार , 08-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

न्यूयॉर्क। अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में भारतीय दूतावास के बाहर सैकड़ों भारतीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और अलग-अलग संगठनों की ओर से एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। 

यह विरोध-प्रदर्शन हाल में देश के पैमाने पर किए गए भाजपा /मोदी सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मोदी शासन के पिछले पांच सालों हजारों केस हैं जिनमें मानवाधिकारों को दरकिनार कर जघन्य हिंसा को अंजाम दिया गया।

उन्होंने कहा कि गुजरात में दलित साथियों को सरेआम पीटने घटना हो, कोरेगाव की हिंसा के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओ की असंवैधानिक गिरफ्तारी हो , योगी के साम्प्रदायिक बयान हों, चंद्रशेखर की जबरदस्ती बेवजह गिरफ्तारी हो,  मॉब लिंचिंग ( भीड़ के द्वारा हत्या)  हो  या महिलाओं के साथ बढ़े यौन हिंसा के मामले हों। हर क्षेत्र में इस शासन ने बर्बरता दिखाई है।  

देश का माहौल ऐसा है कि कोई भी सरकार के काम पर सवाल खड़ा करने वाला व्यक्ति देशद्रोही हो जाता है।  

कोई भी सरकार के खिलाफ लिखने-बोलने वाला  या पूंजीपतियों के गैरकानूनी काम के बारे में लिखने वाला नक्सली करार दे दिया जाता है या फिर उसे जेल में डाल दिया जा रहा है।

 

न्यूयार्क में विरोध प्रदर्शन।

ओडिशा , झारखण्ड , छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाकों में देश के नामी पूंजीपतियों के द्वारा जबरदस्ती माइनिंग की जा रही है  और यह सब कुछ मोदी सरकार की सरपरस्ती में हो रही है। 

देश का एक बड़ा तबका जो मध्यवर्गीय है वह इन सब बातों से कोई इत्तफाक नहीं रखता।  1 करोड़ आदिवासियों को जंगल छोड़ने का आदेश दे दिया जाता है , भला कैसे ? 

कौन है जो इसके खिलाफ बोलेगा, लिखेगा ? 

दिल्ली के एक प्रोफेसर है जी.एन. साईंबाबा, शारीरिक रूप से विकलांग हैं। आदिवासियों  के खिलाफ होने वाली हिंसा के बारे में लिखते- बोलते थे। इसी को गुनाह मानकर उन्हें उम्र कैद की सजा दे दी गई। 

एक विकलांग प्रोफेसर देश के लिए इतना बड़ा खतरा कैसे हो सकता है ? 

क्या यही देश है जिसमें हम रहना चाहते हैं ? क्या इस सरकार की इस न्यायिक व्यवस्था के अंदर जीना चाहते है ? क्या हम ऐसे ही चुप रहेंगे ? 

वक्ताओं का कहना था कि मोदी सरकार ने जिस तरह लोगों के मन में एक दहशत भर दी है उससे वे डरने वाले नहीं हैं। 

न्यूयार्क में विरोध प्रदर्शन।

उनका कहना था कि इसी डर के चलते सैकड़ों लोग देश के लिए फिक्रमंद हैं , अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने वाले इन भारतीयों ने मौजूदा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बीच-बीच में इस तरह के अक्सर प्रदर्शन हो रहे हैं। इस मौके पर तमाम तरह के पोस्टर, ढोल, कविता से लोग झूमझूमकर नारे लगा रहे थे और अपनी आवाज को बुलंद कर रहे थे। 

प्रदर्शन की ख़ास बात यह थी कि इसमें अलग-अलग विचारधारा के लोग शामिल थे। 

एक संस्था है , जो hindu resist  के पोस्टर के साथ विरोश-प्रदर्शन कर रही थी।  मतलब हम हिन्दू हैं लेकिन मोदी के खिलाफ हैं के नारों के साथ प्रदर्शन कर रही थी।  उन्ही में से कई साथियों ने बोला की हिन्दू का मतलब मोदी नहीं है और ना ही भाजपा है।  हिन्दू किसी भी तरह के हिंसा को स्वीकार नहीं करेगा।  और हम मोदी और इस हिन्दुत्व के खिलाफ हैं। 

प्रदर्शन में अलग -अलग राजनैतिक विचारधारा वाले दलों से लोग आये थे।  दलित संगठन, मुस्लिम संगठन से लेकर वामपंथी इसके हिस्से थे।  विचारधाराए भले ही सबकी अलग रही हो पर सब एक जुट थे इस हत्यारी और भ्रष्टाचारी  सरकार के खिलाफ।  

ढेर सारे पोस्टरों में एक ऐसा पोस्टर था जिसमें एक मुस्लिम साथी अम्बेडकर का फोटो लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। 

न्यूयार्क में विरोध प्रदर्शन।

एक पोस्टर ऐसा था जिसमें लिखा गया था कि हम गौरी लंकेश को नहीं भूलेंगे। 

एक और पोस्टर था जिसे एक महिला थाम रखी थी - मैं आजादी चाहती हूं।  इस मनुवाद से, ब्राम्हणवाद से।  

दो घंटे के इस प्रदर्शन से लोग भारत सरकार को यह संदेश देना चाह रहे थे कि हम सरकार की बर्बरता के खिलाफ चुप रहने वाले नहीं हैं। 

इस देश में पहले भी क्रांति हुई है और अब जब भी समय आएगा हम क्रांति के लिए उतर जाएंगे। 

यह देश सावित्री बाई, अम्बेडकर, गुरुनानक जैसे योद्धाओं का रहा है जो इतिहास बदलने का माद्दा रखते हैं।  और हम उसी देश के बचाव के लिए लड़ते और विरोध करते रहेंगे। 

ये प्रदर्शन यही नहीं रुकने वाला, ये चलता रहेगा।  ये तब तक चलेगा , जब तक सबको न्याय नहीं मिल जाता , जब तक एक व्यक्ति दूसरे से बराबर ना माना जाए। जब तक यह हिंदुत्व- फासीवादी -ब्राम्हणवादी व्यवस्था ध्वस्त नहीं हो जाती। 








 










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