गोपाल कृष्ण गांधी होंगे उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष के उम्मीदवार

राजनीति , नई दिल्ली, मंगलवार , 11-07-2017


gopal-vice-president-opposition-jdu-congress-sonia-meet

जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति पद के लिए बंगाल के पूर्व गवर्नर गोपाल कृष्ण गांधी विपक्ष के साझा उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में आज दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक में उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लग गयी। खास बात ये है क 17 दलों की इस बैठक में जेडीयू भी शामिल हुई। इसके साथ ही राष्ट्रपति पद पर उम्मीदवारी की घोषणा में पीछे रहने वाले विपक्ष ने उपराष्ट्रपति में बाजी मार ली है। लेकिन संख्या बल के लिहाज से सत्ता पक्ष भारी है और ऐसा माना जा रहा है कि उसके उम्मीदवार के जीत के रास्ते में कोई बाधा नहीं आएगी। इसीलिए शायद वो ज्यादा निश्चिंत भी दिख रहा है। 

विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी के परिचय की जहां तक बात है तो वो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र हैं। गोपाल कृष्ण महात्मा गांधी के छोटे बेटे देवदास गांधी और चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की बेटी लक्ष्मी गांधी के बेटे हैं। गोपाल का जन्म 22 अप्रैल 1946 को हुआ था। सेंट स्टीफेंस कॉलेज नई दिल्ली से अंग्रेजी साहित्य में एमए करने के बाद उनका चयन आईएएस में हो गया। अपने आईएएस रहने के दौरान वो कई सालों तक विभिन्न पदों पर तमिलनाडु में रहे। इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। गोपाल राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के सचिव रहने के साथ ही कई देशों में राजदूत भी रह चुके हैं। 1985-87 तक वो उपराष्ट्रपति के सचिव रहे जबकि 1987-92 तक उन्होंने राष्ट्रपति के संयुक्त सचिव के पद पर काम किया। उसके बाद एक बार फिर वो 1997 में राष्ट्रपति के सचिव बने। 

वो लंदन स्थित भारत के उच्चायोग में संस्कृति के मंत्री रहे साथ ही लंदन स्थित नेहरू केंद्र के निदेशक भी रहे। 1996 में दक्षिण अफ्रीका के राजदूत रहने के दौरान उन्हें बहुत लोकप्रियता हासिल की। वो लेसोथो में भी भारत के उच्चायुक्त रह चुके हैं। उसके बाद 2000 में उन्हें श्रीलंका में भारत का उच्चायुक्त के पद पर नियुक्त किया गया। उन्हें आइसलैंड में भारत का राजदूत भी बनने का गौरव हासिल है। 

कई पुस्तकों के लेखक गोपाल कृष्ण गांधी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे। वे राजनेता राजमोहन गांधी और दार्शनिक रामचंद्र गांधी के छोटे भाई हैं।  

विक्रम सेठ के सुटेबुल ब्वाय का हिंदी अनुवाद भी उन्होंने ही किया था। इसके अलावा श्रीलंका के प्लांटेशन मजदूरों पर उन्हें एक किताब भी लिखी है। साथ ही दारा शिकोह पर एक नाटक भी उन्होंने लिखा था।

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने उन्हें एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि “ भारत का अल्पसंख्यक भारत का एक अलग भाग नहीं है वो मुख्यधारा का अभिन्न हिस्सा है। कोई भी रस्सी को जलाकर राख कर सकता है लेकिन उसकी ऐंठन को उससे नहीं अलग कर सकता है। मोदी जी, निश्चित तौर पर भारत माता की जय है लेकिन इसको सुभाष चंद्र बोस के जयहिंद के आह्वान से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है।”

 










Leave your comment