महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश ही नहीं गुजरात में भी मर रहे हैं किसान

एक नज़र इधर भी , , शुक्रवार , 09-06-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। आज पूरे देश के किसानों में बेचैनी और गुस्सा है। किसान या तो मर रहे हैं या मारे जा रहे हैं। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का आंदोलन आपके सामने है। तमिलनाडु के किसानों का आंदोलन भी देश और देश की राजधानी ने पिछले दिनों देखा था, लेकिन गुजरात की ऐसी ख़बरें कम ही राष्ट्रीय सुर्खियां बन पाती हैं। जबकि गुजरात में भी किसान परेशान और आंदोलित हैं। कल 8 जून को भी किसानों की समस्याओं को लेकर रैली निकालने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस-प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। एक संगठन 21 जून योग दिवस पर धरना-उपवास और मार्च का कार्यक्रम बना रहा है। इसके अलावा यहां भी आत्महत्या की कई मार्मिक और दिल-दहलाने वाली कहानियां हैं, लेकिन न राज्य सरकार और न केंद्र सरकार और न ही मुख्यधारा का मीडिया इस ओर ध्यान दे रहा है।

किसान आंदोलन की एक तस्वीर। फोटो साभार: गूगल

रविराज ने दी जान

एक महीना पहले जाम नगर जिले के शिशांग गाँव के 32 वर्षीय किसान रविराज सिंह जाडेजा ने आत्महत्या की थी। रविराज दो बच्चों के पिता थे। मूंगफली और कॉटन की किसानी करते थे। पिछले वर्ष कर्ज़ा ले कर मूंगफली की खेती की थी परन्तु पानी की कमी के कारण फसल अच्छी नहीं हुई। मूल रक़म निकलना तो दूर 65 हज़ार का नुकसान हो गया। इस वर्ष नफा होने की उम्मीद से कपास की खेती की परन्तु फिर से वही पानी की समस्या के कारण फसल ठीक-ठाक नहीं हो पाई। MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) मिलने के कारण कपास में भी 70 हज़ार रुपये का नुकसान हो गया।

कर्ज़ ने ली जान

रविराज के पिता सिक्योरिटी (सुरक्षा गार्ड) की नौकरी करते हैं। छोटा भाई फैक्ट्री में मजदूर हैपरिवार की ज़िम्मेदारी रविराज के ही कन्धों पर थी। इसी दरम्यान रवि के छोटे भाई की पत्नी को समय से पहले शिशु के जन्म के कारण अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। सरकारी दवाखाना में नवजात शिशु के लिए विशेष देखभाल की सुविधा (स्पेशल केयर यूनिट) होने के कारण राजकोट के प्राइवेट हॉस्पिटल में दाखिल कराना पड़ा जिसने रविराज को 70-80 हज़ार के और कर्ज़ में डुबो दिया। रविराज ने यूनियन बैंक से खेती के लिए कर्ज़ ले रखा था। पैसों की ज़रूरत के कारण अपनी पत्नी और छोटे भाई की पत्नी के गहनों को भी कालावाड तहसील के कोऑपरेटिव बैंक में गिरवी रखा था। इन सब के अलावा दोस्तों से भी कर्जा ले रखा था। किसानी और परिवार के पालन पोषण से जूझते हुए अचानक अंत में मायूस होकर पेस्टीसाइड (कीटनाशक) पीकर आत्महत्या कर ली।

9-10 बीघा ज़मीन होने के बावजूद ये परिवार हमेशा गरीब रहा। चंद दिनों में बरसात शुरू होने वाली है। टूटा फूटा मकान परिवार के लिए चिंता बना हुआ है।

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

रविराज को किसान ही नहीं मानते अफसर!

रविराज के चचेरे भाई बलभद्र सिंह जाडेजा ने जनचौक से बताया कि रविराज को अधिकारी किसान ही नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि खेती की ज़मीन रविराज के पिता के नाम पर है, इसलिए उसके पिता को ही किसान माना जायेगा। जब हम लोग सरकारी मुआवज़े की बात करते हैं तो मामलतदार कहते है कि अकस्मात पर मुआवज़े की नीति है परन्तु किसान आत्महत्या पर किसी भी प्रकार की नीति नहीं है जिस कारण हम मुआवजा नहीं दे सकते।

सीएम को तीन पत्र

बलभद्र ने बताया कि हम लोग मुख्यमंत्री विजय रूपानी को तीन पत्र लिख चुके हैं, मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता की मांग कर चुके हैं परन्तु तो कोई सहायता मिली है, ही भाजपा सरकार का कोई नेता परिवार से मिलने आया। परिवार मुख्यमंत्री को तीन पत्र लिखने के अलावा विपक्ष के नेता और मामलतदार से भी मुआवजे की गुहार लगा चुका है परन्तु कोई भी परिवार की सुध तक नहीं लेने आया। शिशांग गाँव के किसानों की मांग है कि सरकार रविराज के परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी और 10 लाख का मुआवजा दे।

प्रहार संस्था की रैली (फाइल फोटो)। साभार : गूगल

महाराष्ट्र के विधायक परिवार से मिले

बीते रविवार को प्रहार संस्था के प्रमुख बच्चू कडू ने रविराज के परिवार से मुलाक़ात की और परिवार के साथ बैठकर सांत्वना दी। बच्चू कडू महाराष्ट्र के अमरावती के किसान नेता और निर्दलीय विधायक हैं। दो महीने पहले बच्चू कडू ने स्वामीनाथन समिति के सुझाव पर अमल तथा किसानों द्वारा हो रही आत्महत्या को रोकने के प्रयास पर नीति बनाने की मांग के महाराष्ट्र के सीएम के गृहनगर (अमरावती) से पीएम के गृहनगर (वड नगर) की यात्रा की थी।

किसान करेंगे उपवास और पैदल मार्च

प्रहार संस्था एक बार फिर गुजरात के किसानों के साथ मिलकर किसानों के मुद्दे पर गुजरात के ही अंदर प्रधानमंत्री को घेरने की तैयारी कर रही है। 21 जून को योग दिवस है, गुजरात सरकार सरकारी त्योहार की तरह योग दिवस मनाएगी। इस दिन बाबा रामदेव खुद अहमदाबाद के जीएमडीसी ग्राउंड पर योग कराएँगे। योग दिवस को ही गुजरात और महराष्ट्र के किसानों के साथ बच्चू कडू एक दिवसीय उपवास करेंगे। इस उपवास में रविराज के गाँव के किसान के अलावा जिले के दूसरे किसान भी सरकार के विरुद्ध उपवास करेंगे।

प्रहार संस्था के सचिव गणेश पुरोहित ने जनचौक को बताया कि हम लोग रविराज के घर से पास के ही गाँव के अन्य किसान जो आत्महत्या कर चुका है उसके घर तक की पैदल यात्रा भी करेंगे।

उनके अनुसार इस समय देश के किसानों की परिस्थिति और भी ख़राब होती जा रही है इसीलिए गुजरात और महराष्ट्र के किसानों के साथ-साथ देश के अन्य किसानों को एक कर किसान और किसानी बचने के लिए बड़े आन्दोलन की आवश्यकता है।

सुप्रीम कोर्ट की भी अनदेखी

किसानों की समस्याओं के समाधान तथा किसानों की आत्महत्या रुक सके इसके के लिए केंद्र और राज्यों सरकारों से नीति बनाने की मांग लेकर भारत सिंह झाला सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं। झाला ने जनचौक को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च को केंद्र सरकार, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया तथा राज्यों को किसानों के लिए चार हफ्ते में नीति बनाए जाने का आदेश दिया था परन्तु किसी ने भी अब तक कोई क़दम नहीं उठाया है। किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्यों की सरकारें असंवेदनशील हैं, यदि नीति बने तो आत्महत्याओं को रोका जा सकता है।

रैली को रोका

खेडूत समाज संगठन गुजरात, जो एक गैर राजनैतिक संगठन है ने भी कल 8 जून को गुजरात सरकार के खिलाफ रैली निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस प्रशासन ने ऐसा नहीं होने दिया। संगठन के महासचिव सागर रबारी का कहना है कि 68 गांव के किसान वाहन रैली निकालकर मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देना चाहते थे लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी। उनके मुताबिक किसानों को आतंकित करने के लिए गांवों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

रबारी कहते हैं कि गुजरात फासीवाद की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, पुलिस बल का इस्तेमाल करके असंतोष को दबाया जा रहा है आने वाले चुनाव से पहले लोगों को आतंकित करने के लिए अवैध नजरबंदी का इस्तेमाल किया जाता है। रबारी का कहना है कि उनके आंदोलन को कुचलने के लिए पुलिस ने 6 जून को उनके एक सहयोगी लखन मुसाफिर को अवैध तौर पर अपनी हिरासत में ले लिया और अपने बचाव के लिए गलत रिपोर्ट दर्ज की। 

खेडूत समाज संगठन की मांग है कि शहरीकरण के नाम पर किसानों से ली गई ज़मीने वापस की जाएँ। 2009 की अधिसूचना वापस ली जाए जिसमें अहमदाबाद के 625 वर्ग मीटर को अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण (AUDA )का भाग माना है, जिस कारण बिल्डरों को फ़ायदा हुआ है और खेती की ज़मीन कम हो गई।






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jagdish h mehta :: - 06-10-2017
Sahi he jo gaya vo to vapas nahi la sakate fir kisi ki jindagi n jaye

jagdish h mehta :: - 06-10-2017
JAGDISH mehta

jadeja balbhadrasinh :: - 06-10-2017
Sarkar bilkul nathi he yeah par kisan log kon leke mar raha he par sarkar ko to khuda ghar ki padi he kisan matte he to Marne do