महानता के खोल में बर्बरता का नंगा नाच !

ज़रा सोचिए... , , बृहस्पतिवार , 26-10-2017


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उदय राम

जब बचपन मे स्कूल जाते थे तो ट्रकों, मकान के आगे, स्कूल के गेट पर लिखा मिलता था मेरा भारत महान।  बच्चे थे समझ नही पाते थे इसका मतलब टीचर से पूछा तो उन्होंने बताया था कि मेरा जो भारत है वो सबसे अच्छा है। पूरी दुनिया मे सबसे अच्छा, सर्वोपरि है। यहां 6 ऋतुएं हैं, दुनिया के महान ग्रंथ हैं, दुनिया में सबसे अच्छा खान-पान, स्वास्थ्य, चिकित्सा हमारी है। अनाज के भंडारों से भरा हुआ, धन-धान्य से भरपूर, सोने की चिड़िया, बंधुत्व के सिद्धांत पर चलने वाला, मानवता के लिए सबको शरण देने वाला, यहां ब्रह्मांड के रचयिता ईश्वर ने बार-बार जन्म लिया। बहादुरी में हमारा कोई मुकाबला नहीं हमारी सेना महान है पड़ोसी देश पाकिस्तान को कितनी बार नाकों चने चबावाए हैं। चीन जरूर धोखाधड़ी से जीत गया। लेकिन बहादुरी में हमारे धर्म ग्रन्थ भरे पड़े हैं।

ऐसा है मेरा देश, मेरा महान देश, मेरा भारत महान था, है और जब तक धरती है तब तक रहेगा..रहेगा... रहेगा....ये शब्द जैसे ही मेरे टीचर ने हमको सुनाए दिल खुशी से भर गया। ऐसा लगा जैसे इस भारत की धरती पर जन्म लेना मेरे पिछले जन्मों का फल है। शायद हम भारत के लोगों ने बहुत अच्छे कर्म पिछले जन्मों में किये होंगे तभी इस महान देश की महान धरती पर जन्म मिला। अक्सर पंडितों को सुना था बोलते हुए कि जो इंसान पिछले जन्मों में अच्छे कर्म करता है तो भगवान उसको नए जन्म में अच्छी जगह जन्म देता है। ताकि वो सुखी रहे। इस जन्म में अच्छे करेगा तो अगला जन्म सुधर जाएगा। लेकिन बचपन में जब कुछ जातियों के साथ भेदभाव देखते, उनके साथ छूआ-छूत देखते तो मन में सवाल उठता कि इनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों...

नजीब की मां।

शायद इन्होंने हमारी जाति वालों के मुकाबले पिछले जन्म में अच्छे कर्म कम किये होंगे। इसलिए प्रभु ने इनको कथित छोटी जाति में पैदा किया। ऐसा ही जब बिहार, बंगाल या पूर्व के मजदूर धान लगाने या कटाई करने आते तो उनके साथ ऐसा बुरा व्यवहार किया जाता। उनके साथ हम जिनको कथित छोटी जाति मानते थे वो भी बुरा व्यवहार करते। उनको बिहारी या पूरबिया कहते। जब वो काम करके अपने घर लौट जाते तो यहाँ के लोग सबसे फटेहाल दिखने वाले को घृणा की नजर से देखते और पूर्बिया या बिहारी कहते। इनको देख कर लगता कि इन्होंने हमारे मुकाबले पिछले जन्मों में और ज्यादा कम अच्छे कर्म किये होंगे तभी तो इनको बिहार, बंगाल, असम की तरफ जन्म मिला।

  • दिमाग में जमी गंदगी को दूर करना जरूरी
  • इस देश पर चलता है लुटेरों का राज

अब तक एक बात साफ हो चुकी थी कि सबसे अच्छी हमारी जाति जिसमें भगवान ने जन्म लिया हमारे अच्छे कर्मों के कारण हमें ये मिली। उसके बाद कथित छोटी जाति वाले इसके बाद बिहारी ओर पूरबिये। मतलब महान देश में भी भगवान ने हमें सबसे अच्छी जाति और स्थान पर जन्म दिया। बस ये सोच-सोच कर खुशी से मन भर उठता। लेकिन अब जब बड़े हुए कुछ अच्छे प्रगतिशील देशी-विदेशी लेखकों को पढ़ने का अवसर मिला, समाज को, इतिहास को जानने की कोशिश की, धर्म के आडम्बरों को जाना तो दिमाग पर चढ़ी खुद के सर्वोत्तम होने की चादर खिसक गई। दिमाग पर जमी गन्दगी जो खुद को सर्वोत्तम होने का अहसास करवाती थी मेरा भारत महान होने का काल्पनिक अहसास करवाती थी वो धुल गयी। अब समझ में आया कि.....मेरा भारत महान कभी था ही नहीं....महान भारत सूदखोरों, काला बाजारियों, मुनाफाखोरों, पूंजीपतियों, सामन्तियों, धार्मिक आंडम्बरियों, जाति के ठेकेदारों का था और अब भी है। 

ये सुन आपको अगर बहुत गुस्सा रहा है कि मैं आपके देश को महान मानने से इंकार कर रहा हूँ तो अभी आपके दिमाग पर काल्पनिक महानता की गंदगी जमी हुई है। जिस दिन ये गन्दगी धुल जाएगी, उस दिन आप खुद कहोगे कि मेरा देश महान नहीं है। महान देश तो लुटेरे सामन्तियों, पूंजीपतियों ओर उनके लगुओं-भगुओं का है।

अब मेरे देश को भी देख लीजिए वो महान नहीं है तो क्या है, वो तो एक लुटा हुआ मुल्क है, उसके जल-जंगल-जमीन को महान भारत के लोगों ने तबाह कर दिया है। मेरे भारत की जमीन को बंजर बना दिया है, महान मुल्क के लोगों ने अपनी राष्ट्रीयता को सर्वोपरि दिखाने के लिए कश्मीरी, आदिवासी, पूर्व की राष्ट्रीयताओं को कितनी बार बन्दूक की नाल से लाल किया है। विश्व बन्धुत्व की बात करने वालों ने रोहिंग्यों के साथ जो व्यवहार किया है उसे पूरे विश्व ने देखा है। क्या ये ही विश्व बंधुत्व होता है। जब पड़ोसी को जरूरत पड़े आप उसके काम आने कि बजाय उसको आंतकवादी कहिए। उसको धक्के मार कर घर से निकाल दीजिए?

मेरे भारत के लोग मेहनत करते हैं, अन्न उगाते हैं फिर भी भूख से मरते हैं। दूध, दही, घी, सब्जी, फल, पैदा करते हैं लेकिन फिर भी ये और इनके बच्चे इनको खा नहीं सकते। इनको खाते हैं महान देश के लुटेरे, और हम कुपोषण में पैदा होते हैं और कुपोषण में ही मर जाते हैं। मेरे देश के बच्चे अस्पताल में बिना आक्सीजन के मर जाते हैं। पूरे विश्व में सबसे ज्यादा कुपोषण, खून की कमी, भुखमरी, बच्चों की मृत्युदर, मेरे मुल्क में। लेकिन महान मुल्क के लोग उनके बच्चे बिना मेहनत किये ऐसो आराम की जिंदगी व्यतीत करते हैं। गाड़ी, बस, रेल, हवाई जहाज, स्कूल, अस्पताल, होटल, मॉल सब महान मुल्क के लोगों के लिए हैं।

महान देश की छोटी से बड़ी हवेलियां, होटल, स्कूल बनाये मेरे देश के लोगों ने लेकिन खुद रहते हैं फुटपाथ पर, झुग्गी झोपड़ी में, स्कूल, अस्पताल के दरवाजे इनके लिए बन्द हैं। ये है मेरा मुल्क

थोड़ा और सुन लीजिए मेरे मुल्क का ताजा हाल-

Ø  एक बच्ची सिर्फ इसलिए मर जाती है क्योंकि उसको मेरी सरकार की तरफ से मिलने वाला अनाज नहीं मिलता। क्यों क्योंकि महान देश के लोगों ने जो पहचान का कागज बनाया है वो नहीं था।
Ø  कुछ किसान मेरे मुल्क के महान देश के महान शहर में आकर रहम-रहम चिल्लाते हैं। वो नंगे होकर प्रदर्शन करते हैं। वो कहते हैं कि हम अन्न पैदा करने वाले हैं, हम अन्न दाता हैं। आज हमारे पास अनाज है, कपड़े हैं। हमारे पास है तो सिर्फ कर्ज, इसलिए हे महान देश के लोगों हम पर थोड़ा रहम करो। महान मुल्क के लोगों हम बुरे दौर में हैं हमारी कुछ मदद करो। लेकिन महान मुल्क के लुटेरे उनको देखकर हंसते हैं।
Ø  मेरे मुल्क के कुछ लोग गाय खरीद कर लाते हैं ताकि बच्चों को दूध पिला सकें, लेकिन महान मुल्क के लोग उनको घेर कर मार देते हैं फिर हंसते हैं उनकी मौत पर।
Ø  मेरे मुल्क के एक लड़के को वो पीटते हैं उसको गायब करते हैं आज तक वो गायब ही है। जब भी ढूंढने की गुहार महान मुल्क के लोगों से की ढूंढना तो उन पर दूर लाठियां बरसाई गयीं।
Ø  मेरे मुल्क के कुछ लोगों ने महान मुल्क के लुटेरे तंत्र के खिलाफ आवाज उठाई, उनके खिलाफ लिखा तो उनको गोली से मार दिया गया। उनकी मौत पर महान मुल्क के लोग हंसते हैं जश्न मनाते हैं और कहते हैं कि कुतिया मर गयी कुते की मौत।
Ø  मेरे मुल्क के मेहनतकश जब गैर बराबरी के खिलाफ, पिटाई के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो महान मुल्क के लोग उनका बहिष्कार कर देते हैं। कभी महान मुल्क के लोग मेरे मुल्क के इंसानों को गाड़ी से बांध कर पीटते हैं, कभी गोबर खिलाते हैं तो कभी थूक चटवाते हैं।
Ø  महान मुल्क के लुटेरों की लूट के कारण मेरे मुल्क के 3 लाख मेहनतकश किसान पिछले 20 साल में मर गए, महान मुल्क के लोगों द्वारा फैलाई गन्दगी के गटर को साफ करने के लिए हर साल मेरे मुल्क के 22 हजार गरीब लोग गटर में ही समा जाते हैं।
Ø  इन महान देश के जालिमों ने कल ही तमिलनाडु में एक गरीब की जान ले ली। इस गरीब इंसान ने 1.40 लाख सूद पर लिए 7 महीने में 2 लाख से ज्यादा लौटा भी दिए। फिर भी महान भारत के जालिम इसको तंग कर रहे थे और रुपया देने के लिए इसको धमकियां दे रहे थे। इस गरीब इंसान ने जालिमों से तंग आकर आज महान भारत में खुद को और अपने 2 मासूम बच्चों को आग के हवाले कर दिया।

ये महान भारत के लोग हर रोज मेरे गरीब मुल्क के इंसानों का खून पीते रहते हैं। खून पीती इन जोकों का और इनके महान देश का सर्वनाश होना जरूरी है। ये भगत सिंह, आजाद के सपनों का देश नहीं है। ये देश काले अंग्रेजों का है।

उनका भारत महान मेरे लोगों के भारत को लूट कर बना है। मेरे भारत के लोगों को जिंदा रहना है तो इन महान देश के लुटेरों का सर्वनाश जरूरी है।

अब हम मेहनतकश लड़ेंगे ऐसे मुल्क के लिए जिसमें मेहनत करने वाला महान हो। जिसमें कोई गरीब आग लगा कर मरे। जिसमे कोई बच्ची भूख से मरे, कोई बच्चा कुपोषित हो, किसी को जाति, धर्म के नाम पर कत्ल न किया जाये, कोई मेहनतकश किसान आत्महत्या करे, कोई गटर में समा पाए, स्कूल, अस्पताल के दरवाजे सबके लिए खुले हों, कोई किसी की मेहनत को लूट कर अय्याशियां करे।

किसी मां का नजीब गायब हो। उस दिन मेरे मुल्क के लोग महान होंगे।

एक हमारी और एक उनकी

मुल्क में हैं आवाजें दो।

अब तुम पर है कौन सी तुम

आवाज सुनो तुम क्या मानो।।....जावेद अख्तर

(उदय चे सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और आजकल हरियाणा में रहते हैं।)

 

 

 

 

 






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