जगदलपुर में 50 पैसे किलो में बेचने की बजाय सड़कों पर फेंका किसानों ने टमाटर

ज़रा सोचिए... , बस्तर (जगदलपुर), सोमवार , 16-04-2018


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तामेश्वर सिन्हा

बस्तर (जगदलपुर)। जिस बस्तर से प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी सभा कर एक दिन पहले लौटे थे, उसी बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में किसान वाजिब दाम नहीं मिलने से दुखी होकर सड़कों पर टमाटर फेंकने के लिए मजबूर हो गए हैं।

आप को बता दें कि बस्तर संभाग मुख्यलाय जगदलपुर में टमाटर का वाजिब दाम नहीं मिलने से 15 अप्रैल दिन रविवार को नाराज किसानों ने बाजार परिसर में ही करीब 15 क्विंटल टमाटर फेंक दिया। जगदलपुर शहर में यह नजारा पहली बार दिखा,  थोक बाजार में आवक ज्यादा होने से व्यापारियों ने टमाटर का दाम पचास पैसे प्रति किलो कर दिया। ऐसे में किसानों ने इसे फेंक कर जाना ही उचित समझा। एक ओर कारोबारी किसानों से पचास पैसे के हिसाब से माल लेने पर अड़े हुए थे, वहीं दूसरी ओर चिल्हर बाजार में वही कारोबारी इन्हीं टमाटरों को 5 से 7 रुपए प्रति किलो में बेच रहे थे। 

कांग्रेस शासन में पूर्व कृषि राज्य मंत्री रहे और आदिवासी समाज के संरक्षक अरविन्द नेताम कहते हैं कि बस्तर में यह पहली घटना है जहां किसान सड़कों पर टमाटर फेंक रहे हैं और अपना वाजिब दर मांग रहे हैं, भाजपा सरकार खुद को किसानों की हितैषी बताती है लेकिन उसके शासन में बस्तर के किसानों के साथ धोखा हो रहा है। उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी जी किसानों की भी बात कर लेते अगर बस्तर आए हुए थे तो।

किसानों के टमाटरों को मुफ्त में ले जाते लोग।

किसानों के मुताबिक बाजार में 50 और 60 पैसे किलो टमाटर का भाव मिल रहा है, ऐसे में उन्होंने जितनी लागत टमाटर की फसल पैदा करने में लगाई, वो भी नहीं निकल पा रही है। आने वाले दिनों में कर्ज पटाने में भी परेशानी होगी। पिछले कुछ दिनों से टमाटर के दाम एक से दो रुपए किलो थे, लेकिन रविवार को ज्यादा मात्रा में टमाटर बाजार पहुंचा और रेट नीचे गिर गया। वहीं दूसरी ओर मौसम ख़राब होने के चलते बारिश और हवा से पौधे खराब हो रहे हैं। किसानों के दोहरे नुकसान से किसान तंग आकर सड़कों पर टमाटर फेंक दे रहे हैं।

उद्यानिकी विभाग के उप संचालक एमएस तोमर ने पत्रकारों को बताया कि किसानों को सब्जियों का न्यूनतम दर मिले, इसका कोई प्रावधान ही नहीं है। व्यापारी आवक को देखते हुए रेट लगा रहे हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों ने सोमवार से कम से कम 40 रुपए कैरेट (25 किलो) का दाम लगाने की बात कही है। इससे कम पर वे अपने टमाटर को बेचने के लिए तैयार नहीं हैं। 

जगदलपुर किसान संगठन से जुड़े संतोष यादव कहते हैं कि किसानों की लागत के अनुसार उन्हें वाजिब दाम नहीं मिल रहा है ऊपर से बिचौलिए व्यापारी सक्रिय हैं जो किसानों की उपज को औने-पौने दाम में खरीदते हैं। किसानों को उनका वाजिब दाम मिलना ही चाहिए।

(ये रिपोर्ट बस्तर से युवा और तेज तर्रार पत्रकार तामेश्वर सिन्हा ने भेजी है। तामेश्वर अपनी गहरी जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।)

 










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