छत्तीसगढ़ के आंदोलनरत पत्रकार हेलमेट पहनकर ले रहे हैं बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रियाएं

मुद्दा , रायपुर/कांकेर, बृहस्पतिवार , 07-02-2019


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तामेश्वर सिन्हा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पत्रकार हेलमेट पहनकर और एम्बुलेंस साथ लेकर चल रहे हैं। इन दिनों छत्तीसगढ़ में पत्रकार हेलमेट लगाकर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। रिपोर्टिंग का यह नया तरीका काफी सुर्खियां भी बटोर रहा है। बीते कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ के पत्रकार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से बाईट या फिर उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए हेलमेट पहनकर कवरेज कर रहे हैं। उनका मानना है कि भाजपा के लोग कहीं उन पर दुबारा हमला न कर दे। 

क्योंकि बीते शनिवार  पत्रकार सुमन पांडेय को भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में ही कवरेज के दौरान पीट दिया गया। पत्रकार ने भाजपा नेताओं के झगड़े का वीडियो बनाया था, लिहाजा वीडियो डिलीट करने की मांग को लेकर भाजपा नेताओं ने पत्रकारों को बाकायदा बंधक बनाकर पीटा था।

धरनास्थल पर हेल्मेट के साथ पत्रकार।

अब छत्तीसगढ़ के पत्रकार राज्य भर में इस हमले का विरोध कर रहे हैं। इसी सिलसिले में राजधानी रायपुर में भाजपा पार्षद दल के एक कार्यक्रम का कवरेज करने मीडियाकर्मी हेलमेट लगाकर पहुंचे ताकि कोई भाजपा नेता उन पर हमला ना कर दे। हेलमेट पहने हुए पत्रकारों ने विजुअल्स शूट किए और भाजपा नेताओं के बयान भी लिए। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में पत्रकार नए-नए तरीकों से भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में हुए हमले का विरोध कर रहे हैं। आज आंदोलन का छठा दिन है। 

घटना के बाद से आक्रोशित पत्रकार दोषी नेताओं का पार्टी से निष्कासन की मांग कर रहे हैं।  वे अपनी मांग को लेकर प्रेस क्लब के बाहर शनिवार से लगातार धरना दे रहे हैं। पत्रकारों ने प्रेस क्लब से एक मशाल रैली भी निकाली थी। इस रैली को कई समाजसेवी संगठनों ने अपना समर्थन दिया था। लगातार आंदोलनरत छत्तीसगढ़ के पत्रकार मांग कर रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी मारपीट करने वाले नेताओं पर पार्टी स्तर पर कार्रवाई करे। पत्रकारों की मांग है कि पुलिस मारपीट करने वालों पर की गई FIR में कड़ी कानूनी धाराओं को जोड़ा जाए। जांजगीर में कांग्रेस नेता और विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत से भी पत्रकारों से बदसलूकी किए जाने के मामले में कांग्रेस पार्टी से माफ़ी मांगने की मांग की है।

रायपुर में धरने पर पत्रकार।

वरिष्ठ युवा पत्रकार देवेश तिवारी प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं  कि "भरोसा नहीं है गुंडों का। बयान देते हुए ठूंसा मार दें। इसलिए बचाव जरूरी है। यह लोकतांत्रिक विरोध का तरीका है। खबरें भी कवर होंगी, अपनी सुरक्षा का ख्याल भी रखा जाएगा।"

इसी तरह का एक धरना आज बस्तर के कांकेर में भी हुआ। जिसमें पत्रकारों ने स्थानीय बीजेपी कार्यालय के सामने बैठकर अपना विरोध जताया। उनका कहना था कि उनका विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक बीजेपी दोषी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है।








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