ग्राउंड रिपोर्ट: बिहार के सीमांचल में सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की बीजेपी-संघ की साजिश का हिस्सा है काबुल मियां की भीड़ हत्या

ग्राउंड रिपोर्ट , पटना, सोमवार , 07-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

पटना। विगत दिनों अररिया जिले में 60 वर्षीय काबुल मियां की गाय चोरी के आरोप में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इसकी जांच करने के लिहाज से भाकपा-माले की एक टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। टीम ने पाया कि पूरी घटना के पीछे आरएसएस-बीजेपी की साजिश है। और पूरे मामले को एक सोची समझी रणनीति के तहत अंजाम दिया गया है। टीम में शामिल पार्टी के स्थानीय नेता रामविलास यादव व इन्द्रानन पासवान न केवल घटनास्थल पर गए बल्कि काबुल मियां के गांव पहुंचकर उन्होंने लोगों से पूरे मामले का जायजा भी लिया।

जांच टीम की रिपोर्ट के मुताबिक घटना सीमांचल के इलाके में भाजपा व आरएसएस द्वारा सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दी गई है। लंबे अर्से से भाजपा के लोग इस इलाके में बांग्लादेश घुसपैठ के नाम पर अपनी सांप्रदायिक राजनीति का जहर फैलाना चाहते थे लेकिन अब तक वे बहुत कामयाब नहीं हो सके थे। सूबे के मुखिया नीतीश कुमार ने जब से एक बार फिर भाजपा के सामने आत्मसमर्पण किया तब से भाजपाइयों का मनोबल पूरे बिहार और खासकर इस इलाके में बहुत अधिक बढ़ गया है और वे खुलेआम मॉब लिंचिंग की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। नीतीश कुमार तथाकथित न्याय के राज की धज्जियां उड़ा रहे हैं और अपराधियों-हत्यारों का मनोबल सातवें आसमान पर चढ़ गया है।

जांच टीम ने बताया कि अररिया के दहगांव के रहने वाले काबुल मियां को गाय चोरी के आरोप में पीट-पीट कर हत्या कर देने के पीछे भाजपा की यही मंशा काम कर रही है। 

भाकपा-माले की जांच टीम ने अररिया जिले के सिकटी प्रखंड के दहगांव के रहने वाले काबुल मियां की हत्या का ब्योरा देते हुए बताया कि घटना के दिन वो अपने गांव से खाना खाकर बगल के टोले खान टोला, जो उनके गांव से 1-1.5 किलोमीटर की दूरी पर है, कव्वाली देखने गए थे। सुबह खान टोला से 7 किलोमीटर उत्तर-पूर्व सिमरबन्नी में उनकी लाश मिली। सिमरबन्नी में दो वार्ड हैं। एक बांग्लादेश से आए मुस्लिमों की आबादी वाला टोला है, दूसरा मंडल जाति से आने वाले महतो लोगों का टोला है। महतो टोला भाजपा-आरएसएस का समर्थक गांव है। इन्हीं दोनों टोलों के बीच काबुल मियां की लाश मिली।

जांच टीम के सदस्यों ने मुस्लिम मियां से मुलाकात की। आरोप है कि काबुल मियां इन्हीं की गाय चुरा कर ले जा रहे थे। मुस्लिम मियां का घर सिमरीबन्नी के ही एक टोले में घटनास्थल से 1 किलोमीटर पूरब है। मुस्लिम मियां ने माले नेताओं को बताया कि रात के लगभग 1 बजे बछड़े के चिल्लाने की आवाज आई। वे देखने गए तो वहां उनकी गाय नहीं थी। उसी वक्त पश्चिम टोले में हल्ला हो रहा था और महतो टोला के लोग काबुल मियां को लगातार पीटे जा रहे थे। यह बात फैलाई गई कि काबुल मियां गाय चोरी करके ले जा रहे थे। लेकिन मुस्लिम मियां ने यह अंतर्विरोधी बयान दिया कि गाय घटनास्थल पर नहीं बल्कि उनके घर के बगल के खेत में मिली। जब माले नेताओं ने खेत की वह जगह दिखलाने की बात कही तो मुस्लिम मियां टाल गए। जांच टीम खेत में गाय के खुर के निशान देखना चाहती थी।

जिस वक्त महतो टोला के लोग काबुल मियां को पीट रहे थे, गांव के चैकीदार प्रमोदी ऋषिदेव ने पुलिस को फोन किया, लेकिन पुलिस मौका-ए-वारदात पर नहीं पहुंची। हालांकि माले जांच टीम को बताया गया कि काबुल मियां का एक आपराधिक रिकार्ड भी रहा है। लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि 15 साल पहले ही उन्होंने इस तरह की कार्रवाईयां छोड़ दी थीं और वे फिलहाल कई मामलों में बेल पर थे। यह बात बहुत ही आसानी से समझी जा सकती है कि 15 एकड़ जमीन का मालिक एक गाय चुराने क्यों जाएगा?

जांच टीम ने गाय चोरी की घटना के मामले में संदेह व्यक्त किया है। इसीलिए उसने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। जांच टीम को इस बात का पूरा अंदेशा है कि गाय की चोरी की बात एक बहाने के बतौर इस्तेमाल की गई और एक अल्पसंख्यक समुदाय के ही व्यक्ति को सामने खड़ कर दिया गया। जाहिर है कि इसको लेकर अल्पसंख्यक समुदाय पर दबाव बनाया जा रहा है। भाजपा-संघ बांग्लादेशी घुसपैठ के नाम पर इस पूरे इलाके को डिस्टर्ब करने पर तुले हैं। उनके इसी अभियान का काबुल मियां आसान शिकार बन गए।

लेकिन सीपीआईएमएल का कहना है कि बिहार की जनता उनके नापाक इरादों को समझ चुकी है। पार्टी ने इस साजिश में शामिल सभी लोगों व हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी तथा घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। 


 








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