कौन काटेगा इनकी बिजली? मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर लाखों का बिल बकाया

एक नज़र इधर भी , रायपुर, शनिवार , 09-12-2017


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तामेश्वर सिन्हा

रायपुर (छत्तीसगढ़)। गरीब जनता की बिजली का भुगतान अगर आर्थिक तंगी की वजह से कभी समय पर नहीं हुआ तो बिजली विभाग का अमला कनेक्शन काटो कार्रवाई में संकोच नहीं करता, लेकिन वही बात जब सूबे के सत्ताधारी मंत्रियों और मुख्यमंत्री पर लागू हो तो विद्युत मंडल भीगी बिल्ली बन शांत रहता है। 

 

प्रदेश में मुख्यमंत्री निवास से लेकर आधा दर्जन मंत्रियों का लाखों का बिजली बिल बकाया है। लेकिन कोई कार्रवाई करने में विद्युत विभाग के हाथ-पाँव फूल रहे हैं। 

 

विद्युत विभाग की ओर से सितंबर माह में जारी हुई लिस्ट के अनुसार कुल 1 करोड़, 32 लाख की बकाया राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। 

छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग की ओर से जारी बकाया की लिस्ट।


इस लिस्ट में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, गृहमंत्री राम सेवक पैकरा, रमशीला साहू मंत्री (महिला एवं बाल विकास), पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर राजेश मूणत, वन मंत्री महेश गागड़ा, पुन्नूराम मोहिले, स्कूली शिक्षामंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ मंत्री अजय चंद्राकर जैसे कद्दावर मंत्री के बंगले शामिल हैं।


आपको बता दें कि 4 लाख से ऊपर का बिल मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बंगले के नाम दर्ज है।गिरते शुल्क के क्रम में मंत्री और अफसरों के बंगले भी शामिल हैं। 

“मंत्रियों की बिजली कौन काटेगा?”

विद्युत विभाग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आरके अवस्थी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि मंत्रियों की बिजली कौन कटेगा और कार्रवाई की बात से मुंह मोड़ लिया। 


इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने "देख लेंगे" कह कर टालते हुए इस मसले पर बात करने में मना कर दिया। 


रसूखदारों को राहत : कांग्रेस

उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि इन बंगलों की बिजली का भुगतान नहीं होना दुर्भाग्यजनक है। एक ओर विद्युत विभाग गरीब परिवारों की इस स्थिति में बिजली काट देता है, वहीं रसूखदारों को राहत देता है।

डिफाल्टर और बकाया राशि

सूची में  30 नम्बर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री रमशीला साहू का बंगला ब्लैक लिस्टेड है। इस सूची के अनुसार उनके ऊपर सितम्बर तक विद्युत विभाग के 70024 रुपये का भुगतान बकाया है। इसमें अंतिम बार भुगतान  23 अगस्त  2017 को 36320 रुपये किया गया है। 

सूची में 32वें नम्बर पर उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय का बंगला है, जिसका 71213 रुपये का भुगतान बकाया है। जिसमें अंतिम भुगतान 43730 रुपये  22 जुलाई, 2017 को किया गया है।

सूची में दो बिल वन एवं विधि विधायी मंत्री महेश गागडा के हैं। जिसमें एक बिल 72592 रुपये का है तो दूसरा बिल 97852 रुपये का है। इसमें अंतिम भुगतान 23 अगस्त को 43090 और 43540 रुपये  किया गया है।

41वें नम्बर पर आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल का बंगला है। जिसका 76828 रुपये शुल्क बकाया है। मंत्री अमर अग्रवाल के बंगले का आखरी भुगतान 22 जुलाई 2017 को 33280 रुपये का किया गया है।

खाद्य मंत्री पुन्नू लाल मोहिले का नाम सूची में 47वें नम्बर पर है। जिसकी बकाया राशि 81023 रुपये है। इसमें अंतिम भुगतान 33130 रुपये का 22 जुलाई को किया गया है।

एक लाख से ऊपर बकाया

अब तक आप ने जो सूची पढ़ी है वह एक लाख के अंदर की थी। अब वो सूची पढ़िए जो एक लाख की रकम को पार कर बढ़ती चली जाएगी। यहां यह ध्यान रखिए कि अंतिम बिल भुगतान का मतलब है कि अगर यह भी न किया गया होता तो बकाया बिल और ज़्यादा होता। 

बढ़ते क्रम की सूची में सर्वप्रथम स्कूली शिक्षा मंत्री केदार कश्यप का बंगला आता है जिसकी बकाया राशि दो बिलों में है जिसका नम्बर 15 और 18 है। पहले की बात करे तो 156609 रुपये की राशि भुगतान नहीं हुई है। इस बिल का अंतिम भुगतान 22 जुलाई, 2017 को 54,150/- किया गया था। वहीं दूसरे बिल की अगर हम बात करें तो वह बढ़कर 171702/- है जिसका अंतिम भुगतान भी 22 जुलाई, 2017 को 74,280/- का किया गया है। मतलब साफ है मंत्री केदार कश्यप के नाम विद्युत विभाग के दो कनेक्शन चल रहे हैं।

अब बारी है सूची के नम्बर 19 की जिसमें प्रदेश के गृहमंत्री का बंगला रोशन होता है। उसकी बकाया राशि कुल 172038 रुपये है। जिसका अंतिम भुगतान 22 जुलाई, 2017 को 180650 रुपये का किया गया था यानी जुलाई से पहले तक यह राशि और भी बढ़ गयी थी।

सूची में नम्बर 20 और 23 पर प्रदेश के स्वास्थ मंत्री अजय चंद्राकर का नाम है जिनके नाम भी दो कनेक्शन अलॉट हैं। पहले बिल की बकाया राशि 181655/- है जिसका अंतिम भुगतान दिनांक 22 जुलाई 2017 को 91520/- का किया गया है। वही दूसरे बिल की राशि 215776/- है जिसका अंतिम भुगतान 22 जुलाई 2017 को ही 88340/- किया गया।

सूची के नम्बर 29 की कहानी भी हैरान कर देती है। जिसमें प्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष पूर्व विधायक चंद्रशेखर साहू का बंगला आता है। इसमें साल 2014 के बाद से आज तक बिल का भुगतान नहीं किया गया। सितंबर माह की सूची में चंद्रशेखर साहू के बंगले का बकाया 557159/- है। 14 फरवरी 2014 को जो इस बिल में अंतिम भुगतान किया गया था वह राशि केवल 1800/- की गई थी। विद्युत विभाग के दोहरे रवैया का इससे बेहतर उदाहरण और नहीं दिया जा सकता है। 

विद्युत विभाग की इस सूची का 27 और 30वां नम्बर स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का है। राज्य के मुख्यमंत्री सिंह के निवास में भी विद्युत विभाग की दो कनेक्शन हैं। 


प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह के बंगले भी विद्युत विभाग की ब्लैक लिस्ट में है। इस सूची के  27वें और 30वें नम्बर पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बंगले का पेंडिंग बिल है, जो लाखो में है। पहला बिल 3,51,110 रुपये  का है जिसका अंतिम भुगतान दिनांक 22 जुलाई 2017 को 1,55,640 रुपये का किया गया। वहीं दूसरे बिल की बकाया राशि 5,57,159 रुपये है। इसमें अंतिम भुगतान 22 जुलाई 2017 को ही 1,46,050 रुपये का कराया गया।


राज्य में रसूखदारों की साख को बखूबी बयां करने वाले इस खुलासे से विद्युत विभाग के दोहरे रवैया को साफ देखा जा सकता है। इस बिल में आप सितंबर के बाद अक्टूबर, नवंबर का भी बिल जोड़ सकते हैं। तो कुल मिलाकर गरीबों पर मार है और रसूख का लुत्फ उठाता प्रदेश का मंत्रिमंडल है और स्वयं रमन सरकार जी का जीरो पावर कट का सच भी शायद यही है।  

 










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