सतीश यूके ने जज लोया से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए कई विभागों को भेजा नोटिस

मुद्दा , नई दिल्ली/नागपुर, मंगलवार , 22-05-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली/नागपुर। सीबीआई जज बीएच लोया की मौत से जुड़े सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए बांबे हाईकोर्ट के वकील सतीश यूके ने विभिन्न विभागों को कानूनी नोटिस दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अगर उन दस्तावेजों में किसी तरह का हेर-फेर या फिर उन्हें गायब करने की कोशिश की जाती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही विभाग में काम करने वाले अफसरों और कर्मचारियों की होगी। इस संदर्भ में यूके ने बाकायदा पावती हासिल की है।

आपको बता दें सतीश यूके अकेले जीवित बचे शख्स हैं जिनको सोहराबुद्दीन मामले में फैसला सुनाने के लिए लोया के पास भेजे गए ड्राफ्ट की जानकारी थी। इससे जुड़े दो लोगों रिटायर्ड जज थोंबरे और वकील श्रीकांत खंडाल्कर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। सतीश यूके पर भी एक बार जानलेवा हमला हो चुका है।

सतीश यूके ने ये नोटिस नागपुर में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, जिलाधिकारी, गवर्नमेंट मेडिकल कालेज के फोरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के डीन, रिजनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के उपसंचालक और पुलिस निरीक्षक को सौंपा है।

कानूनी नोटिस।

मुख्य अभियंता को दी गयी नोटिस में कहा गया है कि “...आपके आदेशानुसार रविभवन का रहिवास वास्तव्य नोंदवही रिकॉर्ड संबंधित कार्यकारी अभियंता नं.1 नागपुर की सुरक्षित रखवाली में रखा गया है। लेकिन कभी वह रिकॉर्ड किसी मंत्री ने मांग लिया, पुलिस ने लिया और रसीद नहीं दी, जिसके रखवाली में था वो मर गया, गीला हो गया, दीमक लग गयी, आग लग गयी, चोरी हो गया, पन्ने फट गए, शॉट सर्किट हो गया, सरकारी वकील ने मांगा और वापस नहीं दिया और कोई रसीद नहीं दी, बड़े अफसर ने मांगा, मंत्रालय ने मांगा, सीबीआई या एंटी करप्शन के अफसर दफ्तर में आए और हम डर गए- ब्लड प्रेशर बढ़ गया और उस वक्त वह रिकॉर्ड कहीं चला गया, इस प्रकार के कोई कारण हो सकते हैं।”

नोटिस में सतीश ने कहा है कि इन रिकॉर्डों का न केवल लोया की मृत्यु के प्रकरण के लिहाज से बल्कि एक दूसरे अति महत्वपूर्ण, बेहद गंभीर और गैरकानूनी कृत्य को उजागर करने के लिए भी सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है। ये मामला राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है। हालांकि सतीश ने सीधे तौर उस गैरकानूनी कृत्य के बारे में तो कुछ नहीं कहा है। लेकिन एक दूसरे इशारे से जरूर उस पर कुछ प्रकाश डाला है।

कानूनी नोटिस।

नोटिस में आगे कहा गया है कि भविष्य में किसी कोर्ट में किसी तफ्तीश में इस रिकार्ड की जरूरत पड़े या फिर बीजेपी सरकार के बदलने पर इसकी कोर्ट को जरूरत पड़े। ऐसी स्थिति में इस रिकार्ड को सुरक्षित रखने के लिए जो भी आवश्यक कदम उठाने जरूरी हों विभाग को उसे उठाने चाहिए। इसके विपरीत अगर रिकार्ड के साथ कुछ भी अघटित होता है तो उसकी जिम्मेदारी विभाग के कनिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की होगी।

जिलाधिकारी को दी गयी नोटिस में उनके तहत आने वाले प्रोटोकाल रजिस्टर का हवाला दिया गया है। नोटिस में कहा गया है कि 2013 के बाद से राज शिष्टाचार से जुड़े सभी रिकार्ड उसमें दर्ज हैं। साथ ही इस दौरान इस्तेमाल हुए सभी वाहनों का लॉगबुक भी उसमें मौजूद है। लिहाजा उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी कलेक्टर की है।

इस सिलसिले में सौंपी गयी सबसे महत्वपूर्ण नोटिस गवर्नमेंट मेडिकल कालेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डीन की है। डीन को दी गयी नोटिस में कहा गया है कि “यहां 1.12.2014 को श्री बीएच लोया का शव विच्छेदन हुआ था जिसका एंट्री रजिस्टर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इनक्वेस्ट पंचनामा, विसेरा फारवर्डिंग फॉर्म और अन्य सभी दस्तावेज यहां हैं।”

कानूनी नोटिस।

इसी तरह की एक महत्वपूर्ण नोटिस नागपुर स्थित रिजनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के उपसंचालक को दी गयी है। नोटिस में कहा गया है कि “यहां 1.12.2014 को बीएच लोया इनका शव विच्छेदन जीएमसी में हुआ था। इस नाम का विसेरा, विसेरा फारवर्डिंग फार्म के साथ पुलिस स्टेशन सदर के द्वारा आपके कार्यालय में पेश किया था। वह सारे दस्तावेज आपके कार्यालय में हैं”। इन रिकार्डों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी विभाग की है।

इसी तरह की नोटिस नागपुर के पुलिस अधीक्षक को दी गयी है। जिसमें बीएच लोया की मौत और उसकी एफआईआर आपके कार्यक्षेत्र के पुलिस स्टेशन में दर्ज हुयी थी। नोटिस में उससे जुड़े सभी दस्तावेजों की किसी भी कीमत सुरक्षा की मांग की गयी है।

इसके अलावा इसकी एक-एक कापी महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव, नागपुर के पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त को भेजा है।  








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