न रोजगार पर बात, न सेहत की चिंता! आ गया है फिर से जनता के साथ दगाबाजी का नया पत्र

मुद्दा , , मंगलवार , 09-04-2019


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मदन कोथुनियां

जब बीजेपी का घोषणा पत्र जारी हो रहा था तब वित्तमंत्री व वरिष्ठ वकील अरुण जेटली ने कहा कि हमारा घोषणा पत्र "टुकड़े-टुकड़े गैंग "ने तैयार नहीं किया है बल्कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है! बीजेपी के घोषणा पत्र का संक्षिप्त में हम भी विश्लेषण कर लेते हैं कि व्यापक विचार-विमर्श कितना हुआ है व किन मुद्दों पर फोकस किया गया है! सत्ताधारी पार्टी के लिए बेहतर तो यह रहता कि अपने पांच साल का हिसाब जनता के सामने रखती व अगले पांच साल के लिए उनकी कार्ययोजना क्या है इसको बताती। मगर बीजेपी ने ऐसा न करके खुद को विपक्ष के बराबर ही खड़ा कर दिया।

1.रोजगार

पिछले पांच सालों में नए रोजगार सृजन के अभाव में बेरोजगारी देश की सबसे बड़ी समस्या बनकर खड़ी है और बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े 22 बड़े सेक्टरों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मदद देंगे। पूर्वोत्तर के राज्यों में रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए नई स्कीम लेकर आएंगे। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 30 करोड़ लोगों को कर्ज देंगे। 20 हजार करोड़ के सीड स्टार्टअप फंड के जरिए स्टार्टअप को प्रोत्साहित करेंगे।

बीजेपी ने 2014 के घोषणापत्र में हर साल 2 करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था मगर पूरे पांच साल में 1लाख 35हजार रोजगार दिए और नोटबंदी व जीएसटी से 97 लाख लोग बेरोजगार हो गए! आज के घोषणापत्र में रोजगार देने का कोई ठोस रोडमैप सामने रखने के बजाय सिर्फ कर्ज देने, निजी क्षेत्र को बढ़ावा देकर जिम्मेदारी से व अकाउंटेबिलिटी से बचने का गोलमोल वादा किया गया है।

2.स्वास्थ्य

बीजेपी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले पांच सालों में किये कार्यों का कोई लेखा-जोखा जनता के सामने पेश नहीं किया है। आज जारी घोषणापत्र में बीजेपी ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत 1.50 लाख स्वास्थ्य एवं वेलनेस केंद्र खोले जाएंगे! देशभर में 75 मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे! प्रशिक्षित डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात 1:1400 करने का प्रयास किया जाएगा!

इस घोषणा को समझने के लिए मैं आपको हकीकत से रूबरू करवाना चाहता हूँ। अभी देश मे लगभग 11लाख रजिस्टर्ड डॉक्टर है। 11हजार लोगों पर एक डॉक्टर और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों का अनुपात देखें तो दिल्ली में 5300पर एक डॉक्टर और बिहार में 28000लोगों पर एक डॉक्टर! नियमों के हिसाब से 1000 लोगों के लिए एक डॉक्टर होना चाहिए और देश मे 11 गुना डॉक्टरों की कमी है। देश के मेडिकल कॉलेज हर साल 68 हजार डॉक्टर तैयार करते हैं जो जनसंख्या व मरीजों की बृद्धि के अनुपात में पिछड़ता जा रहा है।

बीजेपी ने स्वास्थ्य पर कितना बजट खर्च किया जाएगा उस पर कोई स्पष्ट बात नहीं की है। 75 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किये जायेंगे मतलब ज्यादा से ज्यादा 7500 डॉक्टर तैयार किये जा सकते हैं। न गैप पाटा जा सकता है और न 1:1400का अनुपात हासिल किया जा सकता है।पिछले पांच साल में जीडीपी के अनुपात में हेल्थ बजट बढ़ने के बजाय घटा है!

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतिम समय में जारी की गई जिसके आंकड़े सामने रखना मुमकिन नहीं है। बीजेपी ने आंकड़े देने के बजाय सिर्फ आगे की नामुमकिन मंजिल पर तीर साधने की कोशिश की है जबकि जनता के 5 बुनियादी मुद्दों में सबसे बड़ा मुद्दा यही है क्योंकि चिकित्सा की लाचारी हर साल गरीबी से निकलने वाले 14 करोड़ लोगों में से लगभग 13करोड़ लोगों को वापस गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देती है।

3.महिला

वैसे तो आजादी के 72साल बाद हमारे लिए यह मुद्दा ही नहीं होना चाहिए मगर लाचारी, बेशर्मिन्दगी की नौका के नाविक देश के हुक्मरान बन जायें तो जनता के पास कोई विकल्प नहीं होता है मगर बीजेपी के घोषणापत्र में सरकारी क्षेत्र में महिलाकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी!

संविधान में प्रावधान करके महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का वादा हो तो जरूर सोचा जाना चाहिए!

तीन तलाक़ को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने वाली सरकार को जरूर बताना चाहिए था कि पांच साल पूर्ण बहुमत की सरकार में 33% आरक्षण कहां जाकर अटका था? वादा किया है तो इन पर विश्वास किया जाना चाहिए क्योंकि जनता के पास कोई विकल्प भी तो नहीं है!

तीन तलाक का बिल अटक गया और दोबारा घोषणापत्र में आया है तो एक कमी मुझे व्यक्तिगत रूप से जरूर खली की देश, स्वदेशी, संस्कृति, धर्म का झंडा उठाकर चलने वाली बीजेपी के घोषणापत्र में हिन्दू मैरिज एक्ट जरूर होना चाहिए था मगर राजनैतिक पार्टी का घोषणा पत्र है इसलिए ये सवाल जनता पर छोड़ देने चाहिए!

3.किसान

2014 के वादों में फूलकर जो किसान हवा में मोदी जी के साथ उड़ने लगे थे उनके लिए जो घोषणा पत्र जारी हुआ है उसको ढंग से पढ़ा जाना चाहिए! देश के सभी किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की जाएगी! 2000 अंतिम चुनावी रणनीति के तहत जो चंद किसानों के खाते में भेजे गए उनके बाकी 4000 लेने हैं तो फिर मोदी सरकार चुनना है! छोटे और खेतिहर किसानों की सामाजिक सुरक्षा के लिए 60 साल की उम्र के बाद पेंशन दी जाएगी मगर कितनी दी जाएगी उसका कोई उल्लेख नहीं है। कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए 25 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जायेगा मगर खाद-बीज व कृषि मशीनरी निर्माता कंपनियों को देंगे या किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने, 24घंटे बिजली देने, डेढ़ गुणा फसलों की कीमत देने में किया जाएगा इसका कोई उल्लेख नहीं है।

मछुआरों के लिए जल संसाधन मंत्रालय खोला जाएगा मगर किसान मंत्रालय के लिए कितना बजट देंगे उसका कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है! किसानों की आय दुगुनी करने की लास्ट डेट 2022 तक स्थगित कर दी गई है और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट कूड़ेदान में फेंक दी गई है।

4.राष्ट्रीय सुरक्षा

 बीजेपी ने सदा उधारी खाते के अनुरूप फिर से वादा किया है कि कश्मीर से धारा 370 व संविधान के अनुच्छेद 35A पर हमारा रुख पहले की तरह स्पष्ट है। चाहे 5साल बहुमत की सरकार चला लें मगर हमारा रुख कार्य करने के बजाय घोषणापत्र में सदा यही रहेगा।

बीजेपी सत्ता में आने पर राममंदिर निर्माण का रास्ता तलाशने की कोशिश करने की दुहाई दे रही थी वो पूर्ण बहुमत की सरकार पूरे पांच साल सत्ता में रहकर अगले चुनाव में उतरने से पहले कह रही है कि संवैधानिक दायरे में राममंदिर निर्माण का रास्ता तलाशा जाएगा।

धार्मिक प्रताड़ित पड़ोसी देशों के हिन्दू, जैन, सिख, बौद्धों को इस देश की नागरिकता देने का वादा किया है मगर मुस्लिम के लिए ट्रम्प का नारा ही अंतिम पैगाम है!

AFSFA पर कोई रुख नहीं, आतंकवाद के साथ जीरो टॉलरेंस की नीति जैसी पिछले पांच साल में रही है! नक्सलवाद पर दो लाइन नहीं! अलगाववाद पर कोई रुख नहीं।

(मदन कोथुनियां स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल जयपुर में रहते हैं।)

 










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