जनता के नुमाइंदों की दौलत में बेहिसाब इजाफे के वक्त माणिक सरकार हुए और गरीब

एक नज़र इधर भी , , बुधवार , 31-01-2018


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जनचौक ब्यूरो

 

माणिक सरकार ने सोमवार (29 जनवरी) को फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हलफनामा दाखिल किया था। इसमें उन्होंने हाथ में महज 1520 रुपये नकद होने की जानकारी दी। इसके अलावा माकपा के वरिष्ठ नेता के बैंक खाते में 20 जनवरी तक 2410 रुपये थे।

देश में सांसद, विधायक यहां तक कि ग्राम प्रधान बनने के बाद लोग बेहिसाब संपत्ति अर्जित कर लेते हैं। लेकिन, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार की कहानी इससे ठीक उलट है। पांच बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उनकी संपत्ति बढ़ने के बजाय घटती ही जा रही है। माणिक सरकार ने सोमवार (29 जनवरी) को फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए हलफनामा दाखिल किया था। इसमें उन्होंने हाथ में महज 1520 रुपये नकद होने की जानकारी दी। इसके अलावा माकपा के वरिष्ठ नेता के बैंक खाते में 20 जनवरी तक 2410 रुपये थे। वर्ष 2013 में उनके पास 9,720 रुपये थे। 

इसका मतलब यह हुआ कि पिछले पांच वर्षों में उनकी संपत्ति में बहुत कमी आई है। इस तरह माणिक सरकार देश के सबसे गरीब मुख्यमंत्री बने हुए हैं। माणिक सरकार त्रिपुरा के मुख्यमंत्री होने के साथ ही माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं। वह धानपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरते हैं।

त्रिपुरा में सीपीएम की एक रैली।

माणिक सरकार को वेतन के तौर पर 26,315 रुपये मिलते हैं। वह पूरी राशि पार्टी फंड को दान कर देते हैं। इसके बदले में पार्टी की ओर से उन्हें जीवन-यापन के लिए 9,700 रुपये प्रति माह दिया जाता है।

हलफनामे के अनुसार, सीएम के पास 0.01 एकड़ जमीन है जो कृषि योग्य नहीं है। इस पर उनके भाई का भी हक है। मालूम हो कि सूचना क्रांति और सोशल नेटवर्किंग साइट के इस युग में माणिक सरकार अपने पास मोबाइल फोन तक नहीं रखते हैं। हलफनामे के मुताबिक, उनकी पत्नी पांचाली भाट्टाचार्य के हाथ में 20,140 रुपये नकद हैं। पांचाली सरकारी कर्मचारी रह चुकी हैं। 

माणिक सरकार मुख्यमंत्री के तौर पर मिले सरकारी आवास में रहते हैं। उनकी पत्नी को अगरतला में अक्सर आम लोगों की तरह रिक्शे से आते-जाते देखा जाता है। माणिक सरकार वर्ष 1998 से त्रिपुरा के मुख्यमंत्री हैं। उनकी संपत्ति का ब्यौरा ऐसे समय सामने आया है जब जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में बेहिसाब वृद्धि एक मुद्दा बना हुआ है। संपत्ति को लेकर देश के कई जनप्रतिनिधि विवाद के केंद्र में हैं। मालूम हो कि 18 फरवरी को त्रिपुरा के 60 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव होने हैँ। वाम मोर्चा माणिक सरकार के नेतृत्व में लगातार छठवीं बार सत्ता में आने को लेकर आश्वस्त है।

                          (वेब पोर्टल वर्कर वायस से साभार)

 






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