मेधा पाटकर का सरकार और देशवासियों के नाम संदेश

इंसाफ की मांग , , मंगलवार , 08-08-2017


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अनशन पर गिरफ़्तारी से ठीक पहले का संदेश

चिखल्दा/धार, 7 अगस्त, शाम 6 बजे.

आज मध्य प्रदेश सरकार हमारे 12 दिन के अनशन पर बैठे हुए 12 साथियों को मात्र गिरफ़्तार करके जवाब दे रही है। ये कोई अहिंसक आंदोलन का जवाब नहीं है। मोदीजी के राज में शिवराजजी के राज में एक गहरा संवादन, जो हुआ उस पर जवाब नहीं, आकड़ों का खेल, कानून का उल्लंघन और केवल बल प्रयोग जो आज पुलिस लाकर और कल पानी लाकर करने की उनकी मंशा है। इसका उपयोग ये हम लोग इस देश में गाँधी के सपनों की हत्या मानते है, बाबा साहेब के संविधान को भी न मानने वाले ये राज पर बैठे हैं।

और वह समाजों के, गांवों के, किसानों के, मज़दूरों के, मछुवारों के कोई परवा नहीं करते हैं। ये अब इस बात से स्पष्ट हो रही है। उन्होंने बंदूकों से हत्या की और यहाँ जल हत्या करने के मंशा है इसलिए हम उनके बीच में आ रहे हैं ऐसा उनका मानना है। पहले अनशन तोड़ो बात करो, यह हम कैसे मंज़ूर कर सकते हैं?

साभार : गूगल

एक बाजू मुख्यमंत्री खुद कह रहे हैं कि ट्रिब्यूनल का फैसला जो कानून, उसका अमल पूरा हो चुका है। दूसरे बाजू बोल रहे हैं अनशन तोड़ने के बाद ही चर्चा करेंगे। इसके साथ जिन मुद्दों पर सब तो रख चुके हैं। तो अब यह चोटी पर जाना पड़ेगा, अहिंसक आंदोलन और जवाब समाज ने देना पड़ेगा। नर्मदा घाटी के लोगों पर बहुत कहर मचाने जा रहे हैं। प्रकृति साथ दे रही है, गुजरात पानी से लबालब है, यहां पानी नहीं भरा है। लेकिन कल क्या होगा कौन जाने?

12 अगस्त को मोदी जी ने अगर इस मुद्दे पर महोत्सव मनाया और जश्न मनाया और वह भी साधुओं के साथ और 12 मुख्यमंत्रियों के साथ, तो उनकी सरकार और उनकी पार्टी किस प्रकार से विकास को आगे धकेलना चाह रही है। इस देश के कोने कोने में संघर्ष पे उतरे साथी कह रहे हैं, वही बात फिर अधूरिखित। हम इतना ही चाहते हैं, कि 'नर्मदा से हो सही विकास, समर्थकों की यही है आस' - यह हमारा नारा आज केवल नर्मदा घाटी के लिए नहीं है, देश में कोई भी अब विस्थापन के आधार पर विकास मान्य न करे। विकल्प वही तय करें।

यही हम चाहते हैं। 
मेधा पाटकर

साभार : गूगल

(प्रसिद्ध समाजसेवी और गांधीवादी कार्यकर्ता मेधा पाटकर एक लंबे समय से नर्मदा घाटी के लोगों के लिए लड़ रही हैं। इस बार भी वे पिछले 12 दिनों से सरदार सरोवर बांध के डूब प्रभावितों के उचित पुनर्वास की मांग को लेकर अनशन पर थीं। कल, 7 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन लाठीचार्ज के बाद उन्हें उनके अन्य साथियों के साथ गिरफ़्तार कर लिया गया। हालांकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मेधा पाटकर को गिरफ़्तार नहीं किया गया है, बल्कि उनकी तबीयत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है। हालांकि मेधा जी की तरफ से स्पष्ट कहा गया है कि प्रमुख प्रश्नों का हल किए बिना जबरन अनशन तुड़वाने की कोशिश का कोई हासिल नहीं है। ऐसी कोशिश पहले भी की गई और अब लाठीचार्ज से एक अहिंसक आंदोलन को जवाब दिया गया है। उधर अनशन स्थल चिखल्दा में फिर 12 अन्य लोग अनशन पर बैठ गए हैं। इसके साथ ही यह भी खबर है कि प्रशासन ने इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं। -संपादक)










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