मोदी अडानी और अंबानी की दौलत के हैं चौकीदार!

मुद्दा , , मंगलवार , 19-03-2019


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चरण सिंह

क्या हो रहा है देश में? आम चुनाव में जहां सत्तारूढ़ दल अपनी उपलब्धियों के आधार पर चुनावी समर में जाता है वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार भावनात्मक मुद्दों को आगे बढ़ाने में लगे हैं। कभी एयर सर्जिकल स्ट्राइक, कभी पाकिस्तान से युद्ध का उन्माद। और अब मैं भी चौकीदार हूं का अभियान। मतलब कोई ऐसा मुद्दा मिल जाये कि जिस पर चुनावी स्तर पर लोगों को ठगा जा सके। चौकीदार शब्द को ऐसे प्रचारित किया जा रहा है कि जैसे देश में बस चौकीदार है जो बड़ी ईमानदारी से देश की चौकीदारी कर रहे हैं।

यदि जमीनी हकीकत की बात करें तो सबसे अधिक सवाल चौकीदारों की चौकीदारी पर ही उठे हैं। देश के संविधान का चौकीदार जिन तीन तंत्रों को सौंपा गया था। क्या रवैया है उनका अपनी जवाबदेही के प्रति? न्यायपालिका, कार्यपालिका विधायिका तीनों की चौकीदारी पर लगातार भ्रष्टाचार के  आरोप लग रहे हैं। चौथा चौकीदार हम मीडिया को मानते हैं। इस चौकीदार ने तो सभी हदें ही पर कर दी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तो इसके विधायिका तंत्र से ही आते हैं। वह भी तो इन जैसे ही चौकीदार हैं। ये तो ऐसे चौकीदार हैं जो गरीबों को देश के संसाधनों की ओर जाने पर ही उनके पीछे डंडा लेकर दौड़ पड़ते हैं। हां देश के जाने माने चोरों को चोरी करने की पूरी छूट दे रखी है। इनका इन चोरों से यह समझौता है कि उनकी नौकरी बरकरार रहने में जितना पैसा लगेगा वे लोग लगाएंगे। 

नौकरी लगने का माहौल बनाएंगे। यह चौकीदार बिल्कुल उसी तरह का है जैसे गांव की चौकीदारी आज के भ्रष्ट प्रधान कर रहे हैं। विधानसभा का विधायक और लोकसभा का सांसद है। जिले का डीएम और प्रदेशों के मुख्यमंत्री हैं। तो देश के प्रधानमंत्री भी तो इन्हीं में से ही हैं। तभी तो एमजे अकबर लेकर नीरव मोदी तक खुद को चौकीदार कहने लगे हैं। 

सोशल मीडिया पर यह कविता खूब वायरल हो रही है कि कहाँ है रोजगार

वो बोल रहे हैं मैं हूँ चौकीदार क्यों है मंहगाई की मार

बोले मैं हूँ चौकीदार, देश भुखमरी से लाचार बोले मैं हूँ चौकीदार, किसान आत्महत्या की नहीं थमती रफ़्तार

बोले मैं हूँ चौकीदार, नागरिक आतंक के शिकार

बोले मैं हूँ चौकीदार, महिलाएं असुरक्षित, दलित, अल्पसंख्यकों पर वार बोले मैं हूँ चौकीदार, एच.ए.एल.-बी.एस. एन.एल बेहाल 

अम्बानी को क्यों सारा कारोबार बोले मैं हूँ चौकीदार, 

माल्या,नीरव,चौकसी क्यों विदेश फरार बोले मैं हूँ चौकीदार, अडानी-अम्बानी की जेबी सरकार

बोले इनका ही तो मैं चौकीदार।

अब देखना विजय माल्या, सुब्रत राय, मुकेश अम्बानी, अनिल अंबानी, अडानी समेत भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायकों के साथ ही दूसरे अन्य पूंजीपति भी जुड़ने लगेंगे। जिन पूंजीपतियों को एनपीए में डालकर देश की जनता के खून पसीने की कमाई को लुटवाया गया है। वे लोग भी इस अभियान से जुड़ते दिखेंगे। हां देश के असली चौकीदार जवान और किसान का इस तरह के अभियान से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है। 

दरअसल जो लोग मोदी सरकार में मलाई काट रहे हैं वे सब मोदी की तरह ही चौकीदार बन रहे हैं। ये सब वे चौकीदार हैं जिन्होंने करोङ़ों लोगों की रोजी रोटी छीनकर अपनी नौकरी पक्की कर ली है। ये वे चौकीदार हैं जिन्होंने देश में एक बड़ी बेरोजगारों की फौज खड़ी कर दी है। इन चौकीदारों ने गरीब किसान मजदूर और गरीब को खदेड़ कर अमीरों को देश की संपत्ति और संसाधनों पर कब्जा करा दिया है।

आज की तारीख में मोदी को राफेल सौदा घोटाले से बचाने के लिए वे ही चौकीदार बन रहे हैं जो देश में चल रही लूटखसोट के भागीदार हैं। इस अभियान में मुलायम सिंह यादव और शरद पवार जैसे विपक्षी नेता भी शामिल हो जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

देश की बड़ी विडम्बना यह है कि लोग जमीनी मुद्दों को छोड़कर भावनात्मक मुद्दों की ओर भाग रहे हैं। युवा अपने भविष्य से ज्यादा चिंतित जाति धर्म और खोखले राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों को लेकर दिखाई दे रहा है। अपने ऊपर करोड़ों खर्च करने वाले प्रधानमंत्री मोदी को कितने लोग अभी भी गरीब मानकर चल रहे हैं। जिस व्यक्ति ने आम आदमी को पीछे धकेल कर देश की सत्ता और व्यवस्था दोनों पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दी हो वह लोगों को देश का उद्धारक दिखाई दे रहा है। देश को जाति धर्म के नाम पर बांट रहा हो। नफरत की फसल तैयार कर रहा हो, उसमें देश के भले की उम्मीद की जा रही है।

मोदी के झूठ बिकने का बड़ा कारण विपक्ष का स्वार्थी, लालची, कायर और सत्तालोलुप होना भी है। जिस राफेल मुद्दे पर मोदी चौकीदारी की ढाल का सहारा ले रहे हैं। उस पर विपक्ष के कितने नेताओं ने राहुल गांधी का साथ दिया ? अखिलेश यादव तो उल्टे राहुल गांधी को ही लपेटने लगे थे। जब देश का विपक्ष कमजोर होगा। जनता सब कुछ जानते हुए भी झूठे आश्वासनों में आएगी तो मोदी जैसे शातिर लोग ऐसे ही कभी चायवाला बनकर तो कभी फ़क़ीर बनकर और कभी चौकीदार बनकर लोगों की भावनाओं को भुनाते रहेंगे।

(चरण सिंह पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)








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Shikha :: - 03-21-2019
Excellent attacks in the right direction.Eill u able to write something any that the election will not take place after election:2019:Modi hai to Mumkin hai