विकास के रास्ते से भटककर देश को अंधी खाईं में ले जाने को तैयार है मोदी सरकार

देश , , बुधवार , 26-09-2018


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मदन कोथुनियां

ईरान पर प्रतिबंध से क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की तरफ है। देश घोर आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा है। रुपया गिरकर डॉलर के मुकाबले 72.63 पर पहुंच गया है। सोशल वेलफेयर की योजनाओं के लिए सरकार के पास पैसा उपलब्ध नहीं है। यही कारण है 50 करोड़ लोगों की हेल्थ पॉलिसी के लिए मात्र 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान करके सब कुछ आगे के लिए छोड़ दिया गया।

जब मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में क्रूड ऑयल की कीमत 127 डॉलर प्रति बैरल थी तब पेट्रोल की कीमत 70 रुपये के आसपास नियंत्रित रखी गई थी और जब क्रूड ऑयल की कीमत 90 डालर प्रति बैरल थी तब वर्तमान वित्तमंत्री जो कि उस समय विपक्ष के नेता थे उनके नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन किया गया था और उन्होंने ज्ञान दिया था कि 90 डॉलर प्रति बैरल जब क्रूड ऑयल की कीमत हो तो भारत मे पेट्रोल 50 रुपये प्रति लीटर बिकना चाहिए। अब खुद सत्ता में हैं और क्रूड ऑयल की कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल है तो पेट्रोल का रेट 25 रुपये के आसपास तो होना ही चाहिए था!

अब ईरान पर प्रतिबंध के कारण 15-20 लाख बैरल क्रूड की रोजाना की सप्लाई बंद होने वाली है व वेनेजुएला खुद आर्थिक संकट से जूझ रहा है तो वहां से भी सप्लाई घट रही है। हमारे प्रधानमंत्री जी वास्को डी गामा की तरह दुनिया के चक्कर लगाते रहे और कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाए। हमें दुनियां में भारत की धाक जमाने की बेहूदी घुट्टी पिलाते रहे। अब नतीजे सामने आने लगे हैं। अब सरकार कह रही है कि तेल आयात घटाने का विचार कर रहे हैं। कारण यह बताया जा रहा है कि महंगे तेल से मांग घटेगी लेकिन हकीकत यह है कि पिछले 5 महीने में 7 फीसदी पेट्रोल महंगा हुआ लेकिन मांग में कोई कमी नहीं आई।

विकासशील देश को अगर आगे बढ़ना है तो ईंधन की जरूरत बढ़ानी होती है। उद्योगों व माल ढुलाई की रफ्तार को गति देनी होती है। क्या इस तरह की बेहूदी बातें करके हम बताना चाहते हैं कि देश को अब आगे बढ़ने की जरूरत नहीं है? क्या हम विकास की गाड़ी को रोककर विश्राम करने की सोच रहे हैं?

इस देश के करोड़ों गरीबों के सपने विकास की राहों में आशियाना ढूंढ रहे हैं। शिक्षा बजट में कमी, चिकित्सा बजट में कमी, डेढ़ लाख सैनिकों के पदों में कटौती, सिविल सेवाओं के पद समाप्त कर उन्हें ठेकों पर देकर हम अर्थव्यवस्था बचाने की तरफ बढ़ रहे हैं! सोशल वेलफेयर की हर योजना के मद में कटौती की गई है! भरपाई का तरीका क्रूड ऑयल से वसूली का निकाला गया है जो बेहद खतरनाक है।

विजय माल्या, चोकसी, नीरव मोदी सहित दर्जन भर लुटेरे देश का माल बटोरकर विदेश भाग चुके हैं और रोज फर्जी कंपनियां आम जनता के हजारों करोड़ रुपये चेन सिस्टम से लूटकर फरार हो रही हैं और आर्थिक अपराध शाखा के लोगों अर्थात ईडी, आईटी, सेल्स टैक्स को विपक्षी नेताओं को धमकाने के काम पर लगा दिया गया है! दो दिनों पहले स्टर्लिंग बॉयोटेक कंपनी का गुजराती मालिक जयंतीलाल संदेसरा भारतीय बैंकों का 5383 करोड़ रुपये लेकर यूएई से फरार हो गया जहां कुछ महीनों पहले मोदी-मोदी के नारे लग रहे थे।

(मदन कोथुनियां स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल जयपुर में रहते हैं।)

 








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