मोदीजी! वैचारिक असहमति रखने वाले मीडियाकर्मी को आप गाली देने वाला पत्रकार नहीं बोल सकते!

आप के वास्ते , , सोमवार , 01-04-2019


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यशवंत सिंह

पीएम पद पर बैठे व्यक्ति को वैचारिक असहमति का सम्मान करना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार विनोद कापड़ी के साथ जैसी हरकत मोदीजी ने की, उससे विनोद कापड़ी की नहीं बल्कि खुद मोदीजी की छवि का सत्यानाश हुआ है। लोग कहने लगे हैं कि इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की इतनी छोटी सोच.....वो भी ऐसे पत्रकारों के प्रति जिन्होंने उन्हें कभी गाली तो नहीं दी, लेकिन उनकी गलत नीतियों की खुलेआम मुखालफत में कतई संकोच नहीं किया।

वैचारिक असहमति रखने वाले मीडिया के वरिष्ठ साथियों के लिए पीएम मोदी द्वारा कहे गए शब्दों को बेहद अशोभनीय और अलोकतांत्रिक मानता हूं। उम्मीद करता हूं कि दक्षिणपंथी नेताओं में अपने वैचारिक विरोधियों, खासकर मीडिया के प्रति इतना जहर भरा भाव रखने-पालने की प्रवृत्ति कम होगी। आखिर हम एक लोकतांत्रिक देश में हैं जहां सबको संवैधानिक दायरे में अपना मत, विचार, भाषा, संस्कृति रखने, जीने, कहने का अधिकार है।

मोदीजी, अब तो बड़े बन जाइए। कब तक इन छोटी-छोटी चीजों में अटके रहेंगे। किसी पुण्य प्रसून वाजपेयी, किसी रवीश कुमार, किसी विनोद कापड़ी, किसी अजीत अंजुम के प्रति निजी घृणा भाव पालने से इनका नुकसान कम, आपकी इमेज को ज्यादा धक्का लग रहा है। अमेरिका में ट्रंप को देखिए। मीडिया से लाख नफरत के बावजूद वे मीडिया का सामना रोज करते हैं और चिढ़ने के बावजूद उनके सवालों का जवाब देते हैं। पर आपने तो पांच साल में आज तक एक प्रेस कांफ्रेंस भी न की। इसी से पता चलता है कि आप आजाद मीडिया और अपने वैचारिक विरोधियों से डरते हैं।

मैं निजी तौर पर कल आपके द्वारा मीडिया के साथियों के लिए सरेआम कहे गए ग़लत वाक्यों का विरोध करता हूं और इसकी कड़ी निंदा करता हूं। उम्मीद करता हूं कि एडिटर्स गिल्ड समेत सारी मीडिया संस्थाएं व संगठन इस प्रकरण का संज्ञान लेकर अपने बयान जारी करेंगे ताकि चौथे खंभे की बची-खुची साख के बचे होने का हम सब भरोसा कर सकें।

(यशवंत सिंह भड़ास फॉर मीडिया के संस्थापक संपादक हैं। और आज कल दिल्ली में रहते हैं।)








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