"अखंड भारत" की बात करने वालों ने इलाज में भी मुंबई को बाहरी भीतरी में बांटा!

विशेष रिपोर्ट , मुंबई, बृहस्पतिवार , 18-01-2018


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लोकमित्र गौतम

मुंबई। आखिरकार हमारी आशंका सच साबित हुई।  हमने 24 दिसंबर 2017 को ही अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि मुंबई के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल यानी जेजे अस्पताल में 1 जनवरी 2018 से इलाज कराना जो 10 से 25% तक महंगा होने जा रहा है, उसका असली और छिपा हुआ मक़सद, ‘मुंबई के सरकारी अस्पतालों से आम लोगों की होने वाली भारी भीड़ को कम करना है।’

16 दिनों के ही भीतर यानी 16 जनवरी को यह छुपी हुई बात बड़े बेशर्म तरीके से तब खुलकर सामने आ गयी, जब देश की सबसे समृद्ध मुंबई महानगर पालिका उर्फ़ ब्रह्न्न मुंबई म्युनिस्पल कार्पोरेशन [बीएमसी] के तमाम सदस्यों ने मिलकर इसे तय कर लिया और बीएमसी के अधिकारियों ने साफ़ साफ़ ऐलान कर दिया कि आगामी 1 अप्रैल से मुंबई के सरकारी अस्पताल, ‘मुंबई के लोगों के लिए 20 से 25 प्रतिशत तो मुंबई की सीमा से बाहर के लोगों के लिए 30 से 35% महंगे हो जायेंगे।’

गौर फरमाइए यह उस बीएमसी का ऐलान है जिसका सालाना बजट केरल, हिमाचल, उड़ीसा, झारखंड और उत्तराखंड सहित देश के 16 राज्यों से बड़ा होता है और कमाई तो करीब 20 राज्यों से ज्यादा होती है। मजे की बात यह है कि इस समय तो बीएमसी अपने इस फैसले के लिए पैसे की कमी का रोना भी नहीं रो सकती क्योंकि इस साल बीएमसी की कमाई में बम्पर उछाल आया है। 

बीएमसी का राजस्व बढ़कर करीब 70,000 करोड़ रुपये हो गया है जो पिछले साल की तुलना में 9000 करोड़ रुपये ज्यादा है। इसका साफ़ मतलब है कि नया कर ढांचा बीएमसी को खूब रास आ रहा है।

इस समय बीएमसी की तिजोरी में जितना माल है उतना इतिहास में पहले कभी नहीं रहा। यह अकारण नहीं है कि देश के तमाम बड़े बैंक इन दिनों बीएमसी के दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं ताकि उन्हें इसके भारी-भरकम खजाने का कुछ हिस्सा अपने यहाँ जमा करने को मिल जाए। 

ज्ञात हो कि अच्छी-खासी तादाद में बीएमसी की रकम विभिन्न बैंकों में फिक्स डिपोजिट है, जिसके भारी-भरकम होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल उसे विभिन्न बैंकों से ब्याज के रूप में 4500 करोड़ रुपये हासिल हुए। इस सबके बावजूद देश के नागरिकों के साथ जो भेदभाव संविधान ने नहीं किया वह बीएमसी करने जा रही है।  

भारत का संविधान देश के नागरिकों में कोई भेदभाव नहीं करता है, संविधान की नजर में सभी भारतीय बराबर हैं चाहे कोई राजा हो या रंक, लेकिन बीएमसी ऐसा नहीं मानता। 

 

बीएमसी अस्पतालों में 1 अप्रैल 2018 से मुंबई का वोटर कार्ड रखने वाले लोगों को इलाज की अलग दरें देनी होंगी और बाहर के आईकार्ड वालों को अलग। 

बीएमसी में गुट नेताओं की बैठक में ऐसा प्रस्ताव आया है। शिवसेना का कहना है कि इसे पूरी तरह से पारित भले अभी नहीं किया गया है। लेकिन अब इसकी मंजूरी की औपचारिकता ही शेष है। सभागृह से मंजूरी मिलने के बाद 1 अप्रैल से इसे लागू कर दिया जाएगा। इस तरह से दोहरी दरें लागू करने वाली बीएमसी देश की पहली महानगर पालिका होगी। मालूम हो कि मुंबई में केईएम, नायर, सायन जैसे बड़े अस्पतालों के साथ 16 पेरिफेरल अस्पताल भी हैं।

बाहरी का जो ठप्पा लगेगा उसमें मुंबई के उपनगरीय मराठी भी होंगे।

 

इससे साफ़ है कि इसमें ठाकरे बंधुओं का ‘संस ऑफ़ स्वायल’ का नारा भी झूठा साबित होता है। यह सारे मराठियों की भलाई या भावना के लिए भी उठाया गया कदम नहीं है। यह वास्तव में मुंबई के धनी मध्यवर्ग को विशेषाधिकार दिए जाने की शुरुआत है। क्योंकि बीएमसी के इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न इलाकों से इलाज के लिए मुंबई आने वाले मरीजों को महानगर पालिका (मनपा) अस्पतालों में अधिक शुल्क देना होगा। 

 

मुंबई के मरीजों का इलाज 20-25 प्रतिशत महंगा हुआ है जबकि मुंबई के बाहर से आने वाले मरीजों को 30-35 प्रतिशत अधिक शुल्क देना होगा। हालांकि इस प्रस्ताव में वरिष्ठ नागरिकों का इलाज मुफ्त में किये जाने की छौंक लगाई गयी है। 

 

मंगलवार यानी 16 जनवरी को महापौर विश्वनाथ महाडेश्वर की अध्यक्षता में हुई गुट नेताओं की बैठक में मनपा प्रशसन की तरफ से तैयार किये गए प्रस्ताव पर चर्चा हुई और सबने इसमें अपनी सहमति दी। 

इस प्रस्ताव को यह कहकर उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है कि मरीजों से वसूल किये जाने वाले अतिरिक्त शुल्क का उपयोग मनपा के उपनगरीय अस्पतालों में सेवा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।

वैसे सच यह है कि यह बढ़ोत्तरी और भेदभाव के प्रति तात्कालिक रूप से लोगों को शांत रखने का बहाना भर है। अगर सचमुच मनपा यानी बीएमसी चाहे कि उपनगरीय इलाकों के सरकारी अस्पताल बेहतर हों तो इसके लिए उसके पास फंड की कोई कमी नहीं है। 


बहरहाल 1 अप्रैल से मनपा अस्पतालों में इस शुल्क बढ़ोत्तरी के बाद अति विशेष ऑपरेशन का शुल्क 6 हजार रुपये होगा जबकि अभी तक यह शुल्क 5 हजार रुपये है। इसी तरह विशेष ऑपरेशन का शुल्क 500 से बढ़ा कर 600 रुपये कर दिया गया है। छोटे ऑपरेशन का शुल्क 200 से बढ़ाकर 240 रुपये किया जा रहा है। मनपा अस्पतालों एवं प्रसूति गृहों में प्रसूति का शुल्क 600 रुपये लिया जाएगा अभी तक इसके लिये 500 रुपये लिए जाते हैं। 


बाहरी लोगों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के फैसले पर बीएमसी के अधिकारी कहते हैं, 'आसपास की महानगर पालिकाओं को भी अपने यहां सुविधाएं बढ़ानी चाहिए, ताकि मुंबई में लोगों को कम आना पड़े। क्योंकि हमारे ऊपर काफी भार है।' वास्तव में यह वही भाषा है जो वर्षों से ठाकरे परिवार के तमाम सदस्य बोलते रहे हैं।

(लोकमित्र गौतम वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल मुंबई में रहते हैं।)






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