योगी जी, लोगों के सपनों के साथ खिलवाड़ है नोएडा का निर्माणाधीन डंपिंग ग्राउंड!

इंसाफ की मांग , नई दिल्ली, मंगलवार , 12-06-2018


noida-landfil-smart-city-protest-pm-modi-letter-yogi-solid-waste

जितेंद्र भट्ट

आदरणीय योगी आदित्यनाथ जी,

आपका जन्म उत्तराखंड के एक पहाड़ी गांव में हुआ है। इसलिए आपको उत्तराखंड के 134 गांवों के दर्द की एक कहानी सुनानी है। शायद आपको पता होगा कि काली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर डैम से पिथौरागढ़, चंपावत और अल्मोड़ा के 134 गांव पानी में डूबने जा रहे हैं। इसका 31 हजार से ज्यादा परिवारों पर सीधा असर होगा। कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा लोगों पर विस्थापन की तलवार लटक रही है।

दुख की बात ये है कि काली नदी पर बन रहे पंचेश्वर डैम से 22 गांवों का अस्तित्व तो हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। इंसान मरते हैं। वो मरते रहेंगे। ऐसा इंसान की नियति है। लेकिन योगी जी उत्तराखंड में इन गांवों की मौत सरकार द्वारा निश्चित की गयी है। गांव धीरे-धीरे मरने वाले हैं। एक पूरा इलाका मर जाएगा।

लोग अपनी जड़ों से उखड़ना नहीं चाहते। वो आंदोलन कर रहे हैं। पर वहां सरकार सुन नहीं रही। पिथौरागढ़ के 31 हजार परिवारों की आवाज कोई सुनने को तैयार नहीं है। वो अपने घरों, अपने गांवों, अपनी सैकड़ों साल की संस्कृति को बचाने के लिए आवाज उठा रहे हैं। पर किसी के कान में जूं नहीं रेंगती। खैर छोड़िए, पिथौरागढ़ की ये कहानी लंबी है, दुखी करने वाली है।

मुख्यमंत्री जी, हाईटेक सिटी के 5 लाख लोगों की परेशानी सुनिए

मुख्यमंत्री जी, पिथौरागढ़ से 450 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश की हाईटेक सिटी नोएडा की कहानी भी कम परेशान करने वाली नहीं है। आपने अखबार में पढ़ा ही होगा। यहां एक लाख परिवार साफ हवा और साफ पानी के लिए लड़ रहे हैं। इन एक लाख परिवारों के साफ हवा में सांस लेने के अधिकार पर संकट मंडरा रहा है। भूजल जिसका इस्तेमाल पीने के पानी के लिए होना है, उसके जहर बनने का खतरा है। और इसके लिए जिम्मेदार नोएडा अथॉरिटी जनता की सुन ही नहीं रही है। शायद आप अफसरों से कुछ कहें, तो वो सुन लें।

मुख्यमंत्री जी, आप तो जानते ही होंगे। नोएडा के सेक्टर-123 में नोएडा अथॉरिटी एक लैंडफिल साइट बना रही है। वहां इन दिनों अफसर पुलिस सुरक्षा में तेजी से काम करा रहे हैं। आसपास के इलाकों में बसे एक लाख परिवार इस लैंडफिल साइट के खिलाफ हैं। वो अपनी आवाज सरकार को सुनाना चाहते हैं। लेकिन अफसर कान में रुई डालकर बैठे हैं। परेशान और चिंतित लोग सड़कों पर उतरकर जिम्मेदार अफसरों, अपने ही वोट से बनी सरकार और चुने गए जन-प्रतिनिधियों से चिल्ला चिल्लाकर कह रहे हैं -हमारे घरों के पास डंपिंग ग्राउंड मत बनाओ। पर अफसर जिद पकड़कर  बैठेहैं।

बड़ा सवाल – सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016 का पालन हुआ?

ये सच है कि आम लोग जटिल नियम कायदों की बहुत ज्यादा समझ नहीं रखते। इसी गफलत में वो कई बार नियम कायदों को तोड़ देते हैं। पर एक बात हर कोई मानता है कि सरकार नियम कायदों पर ही चलती है। लोग कह रहे हैं कि नोएडा के सेक्टर-123 में लैंडफिल साइट नहीं बन सकती। आपके अफसर कहते हैं कि वो नियम कायदों का ध्यान रखकर काम कर रहे हैं। एक आम आदमी आपसे पूछना चाहता है कि क्या नोएडा के सेक्टर-123 में लैंडफिल साइट बनाने के लिए जिम्मेदार अफसरों ने भारत सरकार के ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ के दिशानिर्देशों का ख्याल रखा है? लोग कह रहे हैं कि ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ के कई प्रावधानों की सेक्टर-123 में धज्जियां उड़ रही हैं। 

मुख्यमंत्री जी, लोगों के मन में सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ नोएडा में सेक्टर-123 के आसपास रहने वाले लोगों ने नहीं बनाए। इन नियमों को केंद्र की मोदी सरकार ने तैयार किया है, और वर्तमान में ये देश का नियम कायदा है। लोग पूछ रहे हैं कि उनकी गलती क्या है? लोगों ने सालों साल की कमाई से यहां फ्लैट खरीदने की गलती जरुर की है। पर इस गलती की इतनी बड़ी सजा इन्हें नहीं दी जा सकती कि लाखों फ्लैट के बीच में एक कूड़ेदान सजा दिया जाए।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016 का पेज नंबर 20 

मुख्यमंत्री जी, आपके माध्यम से नोएडा अथॉरिटी के अफसरों को बताना है कि ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बनाए हैं। 91 पन्नों का ये दस्तावेज बताता है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जगह तय करते समय किन-किन बातों का ख्याल रखना है। 8 अप्रैल 2016 को नोटिफाई इस दस्तावेज के पेज नंबर 20 में लिखा है। डंपिंग ग्राउंड का चयन भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइंस के आधार पर होना चाहिए।

सालिड बेस्ट मैनेजमेंट।

मुख्यमंत्री जी, आप भी मानेंगे कि 15 से 20 साल तक नौकरी करने के बाद एक घर लोन पर लेने वाले को दो चार सवाल पूछने का हक है। उन्हें अपनी बात रखने का हक भी है। पर दिक्कत ये है कि आपके अफसर न बात रखने दे रहे हैं और न ही सवाल पूछने दे रहे हैं।

सालिड बेस्ट मैनेजमेंट।

तो मुख्यमंत्री जी, पहला सवाल ये है कि क्या नोएडा के सेक्टर 123 में बनाए जा रहे लैंडफिल साइट पर ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ के पेज नंबर 20 के प्वाइंट नंबर 7 में दर्ज नियम का पालन हो रहा है? ये नियम कहता है कि लैंडफिल साइट ऐसी जगहों पर नहीं बनाए जा सकते, जहां 100 साल के अंदर बाढ़ आई हो।

सालिड बेस्ट मैनेजमेंट।

खतरे में हिंडन और 1978 की भीषण बाढ़

नोएडा के सेक्टर 123 की लैंडफिल साइट से चंद मीटर की दूरी पर स्थित पर्थला खंजरपुर, गढ़ी चौखंडी और बहलोलपुर गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस इलाके में 1978 में भीषण बाढ़ आई थी। गांव के कई बुजुर्गों ने इस इलाके में आई उस बाढ़ को अपनी आंख से देखा था। उस वक्त कई किसानों को सरकार ने मुआवजे भी बांटे थे।

हिंडन नदी के बाढ़ के खतरे का निशान।

मुख्यमंत्री जी, आपके माध्यम से नोएडा अथॉरिटी के अफसरों को बताना है कि पर्थला खंजरपुर के बुजुर्गों की बातों का समर्थन अर्बन प्लानिंग, इनवायरमेंट प्लानिंग और अर्बन वॉटर पॉलिसी के एक्सपर्ट मनु भटनागर ने अपनी एक रिपोर्ट में भी किया है। South Asia Network on Dams, Rivers and People (SANDRP) की वेबसाइट पर दिसंबर 2017 में मनु भटनागर की एक रिपोर्ट दर्ज है। Hindon River Gazetteer: An Introduction नाम से लिखी ये रिपोर्ट बताती है कि हिंडन नदी में पानी का सबसे उच्चतम स्तर 1978 में आई बाढ़ के दौरान 205.39 मीटर रहा। तब हिंडन नदी का पानी काफी ऊपर आकर बहने लगा। जबकि हिंडन नदी पर खतरे का निशान 205.08 मीटर है। यानी 40 साल पहले हिंडन नदी में आई बाढ़ में पानी खतरे के निशाने से 0.31 मीटर ऊपर बह रहा था।

दिसंबर 2012 में governancenow.com में छपी एक और रिपोर्ट बताती है कि हिंडन नदी में बाढ़ का खतरा है। जियोग्राफर डॉ बी बी सिंह वेस्टर्न सब-हिमालयन क्षेत्र के एक्सपर्ट हैं। इस रिपोर्ट में डॉ बी बी सिंह के हवाले से बताया गया है - “1978 की भारी बारिश से हिंडन नदी में बाढ़ आई। जिससे दिल्ली-गाजियाबाद लिंक एक दिन के लिए बाधित रहा। जबकि ग्रांड ट्रंक रोड पर बाढ़ का पानी कई फुट तक आ गया।“ डॉ बी बी सिंह आगे कहते हैं कि “एक नदी के जीवन में ऐसी संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।“

यानी डॉ बी बी सिंह के मुताबिक हिंडन पर बाढ़ का खतरा बरकरार है।

डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, 2010 की रिपोर्ट पर गौर करिए

मुख्यमंत्री जी, प्राइवेट रिसर्च पर शायद आपके अफसर भरोसा न करें। तो कुछ सरकारी दस्तावेज भी हैं। जो हिंडन नदी के आसपास के इलाके में बाढ़ के खतरे की बात कहते हैं।

गौतम बुद्ध नगर के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, 2010 की रिपोर्ट के पेज नंबर 19 में यमुना और हिंडन नदी से जिले में बाढ़ के संभावित खतरे की बात कही गयी है। इसमें लिखा है कि नोएडा का बड़ा हिस्सा निचले इलाकों में बसा हुआ है, जहां बाढ़ का खतरा ज्यादा है।

इसी रिपोर्ट के पेज नंबर 24 में गौतम बुद्ध नगर में आई अलग-अलग बाढ़ का जिक्र है। इसमें बताया गया है कि यमुना नदी में सितंबर 1978 में जबर्दस्त बाढ़ आई। इस बाढ़ में 43 वर्ग किलोमीटर का कृषि क्षेत्र दो मीटर तक पानी में डूब गया। इससे उस साल खरीफ की पूरी फसल चौपट हो गयी। इस बाढ़ से प्रॉपर्टी का भी जबर्दस्त नुकसान हुआ। एक अनुमान के मुताबिक इस बाढ़ से फसल, घर और सार्वजनिक संपत्ति को उस वक्त 17.61 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

डिसैस्टर मैनेंजमेंट।

इसके बाद सितंबर 1988 में यमुना नदी में एक और बाढ़ आई। इस बाढ़ से 8 हजार परिवार प्रभावित हुए। 1995 में भी यमुना नदी में बाढ़ आई, जिससे काफी लोगों पर असर पड़ा।

गौतम बुद्ध नगर के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, 2010 के पेज नंबर 44 में हिंडन नदी में बाढ़ के खतरे का जिक्र है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी और मध्यम दर्जे की बाढ़ की स्थिति में ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। ग्रेटर नोएडा के जिन सेक्टरों को हाई फ्लड रिस्क जोन में रखा गया है, उनमें सेक्टर पी2, नॉलेज पार्क 2 और3‍, इकोटेक शामिल हैं। नॉलेज पार्क 1, सेक्टर चाई 1, पीएस 1 और 2, ओमेगा 2 लो फ्लड रिस्क जोन में रखे गए हैं।

डिसैस्टर मैनेंजमेंट।

रिवर रेग्यूलेशन जोन के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में दर्ज बातों का मतलब

मुख्यमंत्री जी, एक और दस्तावेज है जिसके जरिए आपके अफसरों का ध्यान आकृष्ट करना है। फरवरी 2016 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ‘रिवर रेग्यूलेशन जोन’ को लेकर एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लेकर आया। जिसमें नदियों के किनारे और बाढ़ वाले इलाकों में विकास से जुड़े कार्यों पर रोक या उन्हें रेग्यूलेट करने के प्रस्ताव किए गए। केंद्र सरकार ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को राय जानने के लिए राज्यों को भेजा।

रिवर रेग्यूलेशन जोन में जो प्रमुख प्रावधान किए गए हैं। उनमें नदियों के किनारे अतिक्रमण को रोकना प्रमुख है। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में नदी के फैलाव और बाढ़ के इलाके को नदी संरक्षण जोन घोषित करने का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में इस इलाके में किसी भी तरह के विकास के कार्यों पर रोक लगाने की बात कही गयी थी।

हिंडन को लेकर रेग्यूलेशन।

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में रिवर रेग्यूलेशन जोन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी में विकास के काम के लिए अलग-अलग प्रस्ताव किए गए हैं। पहला, 50 साल के दौरान बाढ़ के उच्चतम स्तर वाले क्षेत्र से 500 मीटर की दूरी तक के इलाके को Prohibited activities zone में रखने का प्रस्ताव है। दूसरा, Prohibited activities zone की बाहरी सीमा से एक किलोमीटर के दायरे को Restricted activities zone बताया गया है। तीसरा, Restricted activities zone की बाहरी सीमा से तीन किलोमीटर के दायरे को रेग्यूलेटेड एक्टिविटी जोन बताया गया है। इस इलाके में कुछ तय गतिविधियां करने का प्रस्ताव है।

रिवर रेग्यूलेशन जोन में जिन कार्यों की इजाजत नहीं है। उनमें सॉलिड वेस्ट की डंपिंग भी शामिल है। इसी के साथ ज्वलनशील और जहरीले तत्वों का भंडारण भी ऐसे इलाकों में नहीं किया जा सकता। हाईड्रो पावर और सिंचाई से जुड़े प्रोजेक्ट के अलावा ऐसे इलाकों में पानी छोड़ना भी प्रतिबंधित है।

हिंडन को क्या इस तरह बचाएगी सरकार?

मुख्यमंत्री जी, ऐसा नहीं है कि आपके अफसर हिंडन नदी और इसके आसपास के इलाकों की अहमियत नहीं जानते। अखबारों में पढ़ने को मिला कि मेरठ के डिविजनल कमिश्नर प्रभात कुमार ने जून के पहले हफ्ते में हिंडन को लेकर एक बेहतरीन आदेश जारी किया है। प्रभात कुमार ने उन सात जिलों के एडमिनिस्ट्रेशन को एक दिशानिर्देश जारी किया है, जहां से हिंडन नदी गुजरती है। निर्देश दिया गया है कि हिंडन नदी के किनारे स्थित 70 गांवों के 1400 किसानों को आर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग दी जाए, जिससे पेस्टीसाइड का इस्तेमाल न हो। ताकि हिंडन का पानी और खराब न होने पाए। ये भी आदेश है कि हिंडन के आसपास स्थित तालाबों को फिर से पुनर्जीवित किया जाए।

मुख्यमंत्री जी, प्रभात कुमार ने सात जिलों के एडमिनिस्ट्रेशन को आदेश दिया है कि वो हिंडन के 500 मीटर के दायरे में हो विकास कार्यों पर रोक लगाएं। यहां तक कि हिंडन के किनारे ऐसे विकास कार्यों को लेकर सीआरपीसी के सेक्शन 133 के इस्तेमाल की बात भी की गयी है।

मुख्यमंत्री जी, आपके मार्फत अफसरों को बताना ये है कि नोएडा के सेक्टर 123 में बन रहा डंपिंग ग्राउंड हिंडन के काफी करीब है। आने वाले दिनों में डंपिंग ग्राउंड बनने से हिंडन नदी पर बुरा असर हो सकता है। हिंडन का पानी जो बुरी तरह खराब हो चुका है, डंपिंग ग्राउंट बनने से वो और खराब होगा। ऐसे में हिंडन को साफ और पुनर्जीवित करने के सरकारी मिशन का क्या हश्र होगा? ये बताने की जरुरत नहीं है। मुख्यमंत्री जी, आप चाहें तो इन अफसरों को कह सकते हैं कि वो तमाम नियम कायदों का अध्ययन करें। जमीनी हकीकत को समझें, और डंपिंग ग्राउंड का विरोध कर रहे लोगों की भावनाओं का ख्याल रखें।

(जितेंद्र भट्ट पेशे से पत्रकार हैं और आजकल एक प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल में काम कर रहे हैं।)










Leave your comment