प्रधानमंत्री जी! स्मार्ट सिटी की बात तो दूर आप ने कूड़ों का पहाड़ पकड़ा दिया

ज़रा सोचिए... , , बृहस्पतिवार , 07-06-2018


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जितेंद्र भट्ट

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

आपको बताना है कि आपके निवास 7 लोक कल्याण मार्ग से करीब 40 मिनट की दूरी पर रहने वाले एक लाख से ज्यादा परिवार इन दिनों बड़े परेशान हैं। इन परिवारों के करीब पांच लाख लोगों को एक चिंता खाए जा रही है। कुछ सवाल हैं, जो बार-बार परेशान कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी, ये लोग रह रहकर सोच रहे हैं कि हमारे घरों का क्या होगा? हमारे बच्चों का क्या होगा? क्या हमारे बच्चे साफ हवा में सांस ले पाएंगे? या फिर घर के अंदर भी मास्क लगाकर रहना पड़ेगा?

प्रधानमंत्री जी, इनकी परेशानी सुनेंगे, तो आप भी परेशान हो जाएंगे। इन एक लाख घरों की तरफ बाढ़ आती, तो शायद लखनऊ में मुख्यमंत्री जी का दफ्तर हरकत में आ जाता। आपके दर्जनों मंत्रियों में से कोई एक इनकी परेशानी जरुर सुनता। अगर ऐसा नहीं होता, तो आपका पीएमओ मुस्तैद हो जाता। लेकिन इन एक लाख से ज्यादा परिवारों की बदकिस्मती समझिए कि जून में बाढ़ नहीं आ रही है। वैसे यहां बाढ़ आने की उम्मीद भी नहीं है। 

प्रधानमंत्री जी, आप खुद एक गरीब परिवार में पैदा हुए हैं। आप जानते ही होंगे कि एक आम आदमी कैसे पाई पाई जोड़कर बचाता है। एक आम आदमी का सपना ही क्या होता है? दो वक्त की रोटी और मकान बन जाए। प्रधानमंत्री जी, रोटी तो हम लोग आपकी बदौलत अच्छी तरह खा रहे हैं। लेकिन मकानों पर असंवेदनशील सिस्टम का काला साया पड़ गया है।

लैंडफिल के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन।

प्रधानमंत्री जी, परेशानी चाहे जितनी बड़ी हो; करोड़ों लोगों को अब भी आप पर भरोसा है। सिस्टम और इसमें बैठे अफसर कितने भी ‘काले’ हों। मुझे यकीन है कि आपके पास हमारी परेशानी दूर करने की शक्ति है। तो ऐसी बातें लिखने का मकसद भी यही है। और यकीन भी है कि हमारा प्रधानसेवक परेशान लोगों की बातें सुनेगा।

प्रधानमंत्री जी, रेडियो और टीवी बता रहे हैं कि आप करोड़ों लोगों का सिर ढकने के लिए घर बनवा रहे हैं। ऐसे वक्त में मेरे और मेरे जैसे लाखों परिवारों के घर की तरफ कूड़े का एक बड़ा ढेर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी, सच मानिए हमें तो ऐसा लग रहा है, जैसे कूड़े का ये ढेर हमारे कई साल के सपने को ढकने ही वाला है। और धीरे धीरे कूड़ा हमारे सालों साल के खून पसीने की कमाई को अपनी बदबू से घेर लेगा। प्रधानमंत्री जी, ये सब सोचकर कलेजा मुंह को आता है।

प्रधानमंत्री जी, ये बात बताना बहुत जरुरी है। मेरे एक मित्र ने कल ही मुझसे अपने मन की बात कही। प्रधानमंत्री जी, जब वो मित्र अपनी बात कह रहे थे, तो उनकी पलकों के पीछे नमी थी। दिल में तूफान भी होगा, उनका चेहरा देखकर मुझे ऐसा लगा। उन्होंने कहा, हम तो बर्बाद हो जाएंगे। प्रधानमंत्री जी, कूड़े का पहाड़ उस मित्र के घर से बमुश्किल सौ डेढ़ सौ मीटर दूर खड़ा होगा। बिहार से दिल्ली आकर किसका सपना नहीं होता कि दिल्ली में अपना घर हो। दिल्ली में न सही, इसके पास ही सही। यही सोचकर उस मित्र ने 18-19 साल की नौकरी के बाद बैंक लोन से एक घर लिया था। पचास साठ लाख के घर की ईएमआई का बोझ अभी खत्म नहीं हुआ है कि कूड़े का ढेर परेशान करने लगा है।

प्रधानमंत्री जी, यकीन मानिए कूड़े के इस ढेर की बात शुरू होते होते, मेरे उस मित्र के घर की कीमत घटनी शुरू हो गयी है। उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे 18-19 साल की कमाई उन्होंने जुए में गवां दी है।

मौके पर पहुंची पुलिस।

प्रधानमंत्री जी,  आपको शायद जानकारी न हो। पर सिस्टम और कुछ अफसर मिलकर आपकी एक लाख करोड़ से ज्यादा की योजना पर ‘टाट का पैबंद’ लगा रहे हैं। ऐसा कैसे हो रहा है, ये आपको बताऊं। इससे पहले आपको तीन साल पुरानी एक बात याद दिलानी है।

प्रधानमंत्री जी, याद कीजिए साल 2015 का 25 जून। यही वो दिन था, जब आपने देश के सामने स्मार्ट सिटी योजना लॉन्च की थी। 125 करोड़ लोगों को आपकी तरफ से बताया गया था कि आप किस तरह करीब एक लाख करोड़ रुपये की लागत से देश के शहरों की किस्मत बदलने वाले हैं। 

प्रधानमंत्री जी, करोड़ों लोग हैं, जो आपकी बातों को गंभीरता से लेते हैं। वो समझते हैं कि आप जो कहते हैं, वो सच होता है। तीन साल पहले 25 जून के उस दिन करोड़ों लोगों ने आपकी बातों पर यकीन किया था। मैंने भी किया था, मुझे लगा था कि स्मार्ट सिटी योजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मेरे इलाके की किस्मत भी बदल देगी। जिस इलाके में मैं रहता हूं, उस पर आपकी महत्तवाकांक्षी योजना का असर होगा। मैंने सोचा था कि आपका ये विजन मेरे इलाके को संवार देगा।

लेकिन प्रधानमंत्री जी, आज तीन साल बाद बड़े दुखी मन से बताना है कि आपकी स्मार्ट सिटी योजना पर कुछ अफसरों ने कचरा डाल दिया है। इस कचरे को अभी नहीं हटाया गया, तो ये जल्द ही ये एक लाख से ज्यादा लोगों के सिर पर सज जाएगा।

प्रधानमंत्री जी, जैसा मैंने ऊपर कहा – 7 लोक कल्याण मार्ग पर स्थित आपके निवास से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर एक असंवेदनशील सिस्टम और कुछ अफसरों ने एक परेशानी पहुंचा दी है। दिक्कत ये है कि जिन जन-प्रतिनिधियों को हमने पांच साल के लिए अपने इलाके से चुन लिया है, वो भी असंवेदशीलता की हद दिखा रहे हैं।

लैंडफिल के रद्दीकरण की आरटीआई।

दुख दुख में असल कहानी पीछे न छूट जाए। तो प्रधानमंत्री जी, नोएडा के सेक्टर 123 में इन दिनों अफसर एक लैंडफिल साइट बनाने में लगे हैं। इस लैंडफिल साइट पर पूरे नोएडा का कूड़ा डाला जाएगा। सेक्टर 123 की जिस जमीन पर लैंडफिल साइट बनाई जा रही है, उसके चारों तरफ रिहायशी इलाके हैं। डेढ़ सौ मीटर दूर दो हजार परिवारों की एक सोसाइटी है। दूसरी तरफ हजारों परिवारों की बसाहट वाले तीन से चार बड़े गांव है। और तकरीबन सात सौ आठ सौ मीटर की दूरी पर ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसाइटी हैं। जहां इस वक्त 50 हजार से ज्यादा परिवार रह रहे हैं।

प्रधानमंत्री जी, नोएडा के सेक्टर 123 में जहां कूड़े का डंपिंग ग्राउंड बनना है। उसके बिल्कुल बगल से हाईवे निकल रहा है। पास में हिंडन नदी भी बहती है। प्रधानमंत्री जी, गांव के पुराने लोग बताते हैं कि यहां कई साल पहले बाढ़ भी आई थी।

प्रधानमंत्री जी, आपकी सरकार ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए दो साल पहले 8 अप्रैल 2016 को कुछ नियम तय किए थे। जो भारत के राजपत्र में नोटिफाई किए गए हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा तैयार 91 पन्नों का ये दस्तावेज बताता है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जगह तय करते समय किन बातों का ख्याल रखना है।

प्रधानमंत्री जी, 8 अप्रैल 2016 को नोटिफाई इस दस्तावेज के पेज नंबर 20 में लिखा है। डंपिंग ग्राउंड का चयन भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइंस के आधार पर होना चाहिए। डंपिंग ग्राउंड की क्षमता ऐसी होनी चाहिए, जो आने वाले 20 से 25 साल के लिए पर्याप्त हो। साथ ही ऐसी जगह पर जल भराव न हो। पहली बात ये है कि जिस जगह पर ये लैंडफिल साइट बन रही है, वो जगह काफी छोटी है और संभवतया कुछ ही साल में भर जाए।

विरोध प्रदर्शन।

प्रधानमंत्री जी, सेक्टर 123 के आसपास रहने वाले लोगों को लगता है कि लैंड फिल साइट बनाने के लिए ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ का दुरुपयोग हो रहा है, क्योंकि इसमें साफ साफ लिखा है कि लैंडफिल साइट नदी से 100 मीटर, तालाब से 200 मीटर, हाईवे और आवासीय स्थल से 200 मीटर दूर हो। इस दस्तावेज में ये भी लिखा है कि लैंडफिल साइट एयरपोर्ट से 20 किलोमीटर की दूरी पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री जी, घुमावदार सड़क से भी चलें तो एयरफोर्स का हिंडन एयरपोर्ट इस लैंडफिल साइट से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। हवा से इसकी दूरी निश्चित रुप से बहुत कम होगी। इसी दस्तावेज में एक और बात लिखी है। लैंडफिल साइट ऐसी जगहों पर नहीं बनाए जा सकते, जहां 100 साल के अंदर बाढ़ आई हो।

प्रधानमंत्री जी, पीने का पानी और सांस लेने की हवा हर इंसान का प्राकृतिक अधिकार है। लेकिन सिस्टम और अफसर इस अधिकार का गला घोंटना चाहते हैं। प्रधानमंत्री जी, हम ये जानना चाहते हैं कि क्या लैंडफिल साइट के निर्माण कार्य में लगे अफसरों ने ‘सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016’ के पेज नंबर 22 में बताए गए नियम का पालन किया है। ये नियम कहता है कि किसी स्थान पर लैंडफिल साइट बनाने से पहले इलाके में भूजल की गुणवत्ता के आंकड़े इकट्ठा करने होंगे। इन आंकड़ों को भविष्य में संदर्भ के लिए रिकॉर्ड में रखना पड़ेगा। नियम ये भी कहता है कि जहां लैंडफिल साइट बन रही हो, उसके 50 मीटर के दायरे में भूजल की क्वालिटी को गर्मी, मॉनसून और मॉनसून के बाद की अवधि के दौरान मॉनीटर किया जाए। जिससे ये तय हो सके कि इलाके का भूजल स्वीकार्य सीमा से ज्यादा प्रदूषित न हो।

प्रधानमंत्री जी, यहां अफसरों की मनमानी चल रही है। इलाके के निवासी परेशान होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं। लेकिन अफसर पुलिस बल का इस्तेमाल करते हैं। औरतों, बुजुर्गों और नौजवानों पर लाठियां भांजी जाती हैं। अभी तक पुलिस दर्जनों लोगों को अरेस्ट कर चुकी है।

प्रधानमंत्री जी, एक रिहायशी इलाके में लैंडफिल साइट सिस्टम और अफसरों द्वारा लोगों को अंधेरे में रखकर बनाई जा रही है। प्रधानमंत्री जी, नोएडा विकास प्राधिकरण के अफसर दिनदहाड़े झूठ बोल रहे हैं। दो साल पहले सेक्टर 123 में लैंडफिल साइट के संदर्भ में नोएडा विकास प्राधिकरण से आरटीआई के तहत कुछ सवाल पूछे गए थे। “सेक्टर 123 में प्रस्तावित लैंडफिल साइट के संबंध में आरटीआई संख्या – 14682/14683” के विषय में नोएडा विकास प्राधिकरण ने चौंकाने वाली बातें कही।

14 सितंबर, 2016 को नोएडा विकास प्राधिकरण की तरफ से आरटीआई के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में दो बातें कही गयी। पहली बात,  “नोएडा के मास्टर प्लान- 2031 में नियोजित सेक्टर-123 की लैंडफिल साइट को पर्यावरणीय दृष्टि से निर्धारित मापदंडों पर उचित न पाए जाने के कारण इस नियोजन को निरस्त कर दिया गया है। नोएडा क्षेत्र के म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट को शोधित करने हेतू इसकी लैंडफिल साइट ग्रेटर नोएडा के ग्राम अस्तौली में प्रस्तावित की गई है। जिसकी पर्यावरणीय स्वीकृति पर्यावरण निदेशालय उत्तर प्रदेश शासन से प्राप्त की जा चुकी है।“

दूसरी और सीधी बात, “ सेक्टर-123 में लैंडफिल साइट का कोई भी प्रस्ताव प्राधिकरण स्तर पर न तो विचाराधीन है, न ही प्रस्तावित है।

प्रधानमंत्री जी, इलाके के एक लाख से ज्यादा परिवार जानना चाहते हैं कि आखिर दो साल में ऐसा क्या हुआ कि 2016 में जिस लैंडफिल साइट को पर्यावरणीय दृष्टि से निर्धारित मापदंडों पर उचित नहीं पाया गया था। 2018 में उसे पर्यावरणीय दृष्टि से निर्धारित मापदंडों पर उचित पाया गया। आखिर इस इलाके में अफसरों ने ऐसा क्या किया?

प्रधानमंत्री जी, बातें ढेर सारी हैं। लेकिन अंत में फिर वही बात। देश का एक आम नौकरीपेशा पूरी जिंदगी की कमाई से ही घर बना पाता है। नोएडा के सेक्टर 123 में बन रहे लैंडफिल साइट की वजह से एक लाख परिवारों का जिंदगी भर का सपना टूट रहा है।

आप प्रधानमंत्री तो हैं ही, प्रधानसेवक भी हैं। आप अपने मन की बात करते हैं, तो दूसरों की सुनते भी हैं। उम्मीद है कि आप हमारी बात भी सुनेंगे।

आपका एक देशवासी

 








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Ravi Dutta :: - 06-07-2018
Noida authority is gang of lazy and corrupt officers. They are playing with life of thousands people. UP Bjp government is also deaf & dumb towards the people of this area.