भड़केगा आरक्षण आंदोलन: महाराष्ट्र में पिछड़ों ने की आरक्षण बढ़ाने की मांग, 25 फरवरी को रैली

मुद्दा , , शुक्रवार , 11-01-2019


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चरण सिंह राजपूत

नई दिल्ली। जमीनी मुद्दों से ध्यान बांटने में माहिर भाजपा ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले लोगों को आरक्षण के झांसे में उलझा दिया है। जो लोग बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिकता जैसे मुद्दों को लेकर मोदी सरकार को घेर रहे थे उनका दिमाग अब आरक्षण पर आकर अटक गया है। आर्थिक आधार पर सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देने के मोदी सरकार की कवायद का जवाब देने के लिए महाराष्ट्र ओबीसी संघर्ष समन्वय समिति खड़ी हो गई है। समिति ने  25 फरवरी को महाराष्ट्र में रैली करने का ऐलान कर दिया है। समिति के अध्यक्ष ने अपनी आबादी 52 फीसद बताते हुए आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग की है।

ओबीसी नेता प्रकाश अन्ना सेगड़े को आंदोलन के नेतृत्व की जिम्मेदारी दी गई। समिति के इस कदम के साथ दूसरे कई संगठन भी बताये जा रहे हैं। समिति के नेता पिछड़े वर्ग के नेताओं को साधने में लग गए हैं। समिति के नेता कांग्रेस, एनसीपी, शिवसेना के साथ ही भारतीय जनता पार्टी के भी ओबीसी नेताओं से मिलने की रणनीति बना रहे हैं। आंदोलन को धार देने के लिए एससी/एसटी नेताओं के समर्थन के भी प्रयास किये जा रहे हैं।

महाराष्ट्र में ओबीसी का 27 प्रतिशत आरक्षण है। यह आरक्षण शिक्षण संस्थानों के साथ ही सरकारी नौकरियों में भी लागू होता है। स्थानीय चुनाव में भी ये लोग इस आरक्षण का फायदा उठाते हैं।सवर्णों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का 124वां संविधान संशोधन बिल राज्यसभा में भी पास होने के बाद पिछड़े व दलित संगठन सचेत हो गए हैं।

ज्ञात हो कि बिहार में राजद नेता तेजस्वी यादव इस आरक्षण का विरोध कर पहले ही पिछड़ों के लिए आरक्षण बढ़ाने की मांग कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश में सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण का विरोध शुरू हो चुका है। कल लखनऊ में इसके विरोध में धरना दिया गया। राजनीतिक दलों में भी राजद के अलावा ओवैसी और डीएमके ने भी इसका विरोध किया है।

कांग्रेस, सपा, बसपा, जदयू और लोजपा ने इसका विरोध न किया हो पर इन संगठनों के पिछड़े वर्ग के नेताओं का समिति से संवाद शुरू हो चुका है। भले ही दलित नेता रामविलास पासवान इस मामले पर मोदी सरकार की पैरवी कर रहे हों। ऐसा न करने पर आरक्षण खत्म होने की बात कर रहे हों पर सरकार के इस कदम को आरक्षण खत्म करने की कवायद मानकर आंदोलन शुरू हो चुके हैं। सामान्य वर्ग के गरीब लोग भी 8 लाख तक आय का विरोध करने लगे हैं। उनको आशंका है कि इससे उनकी हक मारी जाएगी।

मोदी सरकार के सवर्णों को 10 फीसद आरक्षण देने इस हथकंडे के बाद अब देश में फिर से आरक्षण आंदोलन के भड़कने की आशंका हो गई है। जिस तरह 1989 में वीपी सिंह के मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद सवर्ण छात्रों का आंदोलन भड़का था उसी तरह से अब पिछड़े वर्ग ने आंदोलन करने के लिए कमर कस ली है।










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