पद्मावत मामले में 4 राज्य सरकारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का केस, सोमवार को सुनवाई

ज़रा सोचिए... , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 25-01-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पद्मावत मामले में गुजरात, राजस्थान, एमपी और हरियाणा सरकार के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की दो याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है। इन पर सोमवार को सुनवाई होगी। दोनों याचिकाओं में इन सरकारों पर पद्मावत के प्रदर्शन के लिए थियेटरों को जरूरी सुरक्षा मुहैया न कराने का आरोप लगाया गया है।

गौरतलब है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने फिल्म के प्रदर्शन से पहले राज्यों को सुरक्षा का उचित प्रबंधन करने का आदेश दिया था। याचिकाएं एडवोकेट विनीत धंडा और तहसीन पूनावाला की ओर से दायर की गयी हैं।

राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के मल्टीप्लेक्स मालिकों ने फिल्म को दिखाने से इंकार कर दिया है। ऐसा उन्होंने करणी सेना जैसे अराजक तत्वों और गुंडों द्वारा की जा रही तोड़-फोड़ और आगजनी की घटना के चलते किया। जो जगह-जगह गाड़ियों को जला रहे हैं और मालों पर हमले कर रहे हैं। गुड़गांव में इन लंपट तत्वों ने एक स्कूल की बस को निशाना बनाया। जिससे उसमें सवार बच्चे काफी डर गए।

एडवोकेट विनीत धंडा ने अपनी याचिका में कहा है कि हरियाणा रोडवेज की एक बस को अराजकत तत्वों ने आग के हवाले कर दिया जबकि गुड़गांव के भोड़सी इलाके में एक दूसरी बस में भी इन तत्वों ने जमकर तोड़-फोड़ की। ऐसा बताया जा रहा है कि इस घटना को अंजाम देने वाले पद्मावत फिल्म के विरोधी और श्री राजपूत करणी सेना के समर्थक थे।

इसके अलावा इन अराजक तत्वों ने गुड़गांव-अलवर नेशनल हाईवे पर पुलिस कर्मियों को निशाना बनाया जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए।

तहसीन पूनावाला ने कहा कि “मैंने कोर्ट से चारों प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और करणी सेना के नेताओं को बुलाकर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। जो हुआ है वो 18 जनवरी के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुल्ला उल्लंघन है। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है। जो कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन हिंसा को देखते हुए कहा जा सकता है कि वो उसको नियंत्रित करने में पूरी तरह से नाकाम रही हैं।”

इसके बाद जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि “ओके इस पर सोमवार को सुनवाई होगी।”  

मध्य प्रदेश और राजस्थान ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के सामने आदेश में एक बदलाव की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि सिनेमैटोग्राफ एक्ट का सेक्शन 6 उन्हें कानून और व्यवस्था के खराब होने की आशंका पर किसी विवादित फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की इजाजत देता है।

 






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