पारा शिक्षकों के आंदोलन का बर्बर दमन; लाठीचार्ज के बाद सैकड़ों गिरफ्तार,रघुवर दास ने कहा- शिक्षक नहीं ये गुंडे हैं

मुद्दा , , मंगलवार , 27-11-2018


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विशद कुमार

रांची। पिछले 16 नवंबर से झारखंड के पारा शिक्षक अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिससे राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में पठन-पाठन पूरी तरह ठप्प हो गया है, बावजूद इसके सरकार इन हड़ताली शिक्षकों की मांग मानने को तैयार नहीं है, जबकि विपक्ष के अलावा सरकार में शामिल आजसू पार्टी सहित सत्तासीन बीजेपी के कई जनप्रतिनिधियों की संवेदना पारा शिक्षकों के साथ है।

इसके पहले अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पारा शिक्षकों ने राज्य स्थापना दिवस के मौके पर जमकर प्रदर्शन किया था। इस मौके पर राज्य के सभी जिलों से आए पारा शिक्षक न केवल मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यक्रम में घुस गए बल्कि उन्होंने उन्हें काले झंडे भी दिखाए। 5000 से ज्यादा की संख्या में जुटे ये पारा शिक्षक जब कार्यक्रम स्थल पर घुसने का प्रयास कर रहे थे तभी पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। 

पारा शिक्षकों के उग्र प्रदर्शन एवं मुख्यमंत्री को प्रदर्शन के दौरान काला झंडा दिखाने के मामले में रांची पुलिस ने 280 पारा शिक्षकों को गिरफ्तार कर 16 नवंबर की शाम को जेल भेज दिया। इनमें 16 महिला पारा शिक्षिकाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने पारा शिक्षकों पर आठ धाराएं लगायी हैं। उनपर धारा 144, 341, 342, 323, 307, 353, 337 और 338 लगा है। पारा शिक्षकों को होटवार स्थित बिरसा करावास में रखा गया है ।

सरकार के इस रवैये से सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियां भी खफा हैं। आजसू के विरोध का ही नतीजा है कि पिछले दिनों पारा शिक्षकों के समर्थन में टुंडी के आजसू विधायक राज किशोर महतो ने धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ''आजसू मानती है कि पारा शिक्षकों की मांगें जायज हैं। रघुवर सरकार उनकी मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बजाय उनके आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है। सरकार का निर्णय झारखंड के हित में नहीं है। आजसू इस सरकार में शामिल है, बावजूद इसके सरकार अगर गलत करेगी तो आजसू विरोध करेगी, पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है।''

 बेरमो के भाजपा विधायक योगेश्वर महतो 'बाटुल' का मानना है कि ''सरकार को पारा शिक्षकों के मामले में अपना स्टैंड स्पष्ट करना चाहिये तथा विधायक दल की बैठक करके इस मामले पर विधायकों की राय लेकर पारा शिक्षकों की मांगों पर साकारात्मक निर्णय लेना चाहिये।''

 दूसरी तरफ पूरा विपक्ष पारा शिक्षकों के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है। वहीं माओवादी पार्टी के प्रवक्ता आजाद ने भी एक बयान जारी कर पारा शिक्षकों के साथ खड़ा रहने के साथ-साथ उनके आंदोलन को समर्थन दिया है।

जबकि राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने साफ कहा है कि वे पारा शिक्षकों की गुंडागर्दी नहीं चलने देंगे। मुख्यमंत्री 19 नवंबर को पलामू पुलिस स्टेडियम में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित पलामू प्रमंडलीय ‘चौपाल’ में बोल रहे थे। सीएम के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि ''राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा पारा शिक्षकों को गुंडा कहना कहीं से भी उचित नहीं है। यह अशोभनीय व निंदनीय है। सीएम अगर पारा शिक्षकों को गुंडा बता रहे हैं तो विधानसभा के अंदर अपशब्दों का प्रयोग करने वाले को क्या कहना चाहिए, उन्हें लगे हाथ इसको भी बता ही देना चाहिए। कितनी हास्यास्पद बात है कि जो वास्तव में गुंडागर्दी कर रहे हैं, उसे गुंडा कहने की हिम्मत सरकार में नहीं है, लेकिन राज्य के नौजवान व महिलाएं जो अपने हक-अधिकार को लेकर आंदोलन कर रहे हैं उन्हें गुंडा कहा जा रहा है।''

बता दें कि पारा शिक्षकों के मामले पर बीजेपी के कुछ विधायक भी सरकार के रवैए से क्षुब्ध हैं। वे यहां तक कह रहे हैं कि झारखंड में थोपा हुआ मुख्यमंत्री है, जो हमारी बात नहीं सुनता है। ये विधायक आगे रोना रोते हैं कि हम भाजपा में मंडल अध्यक्ष तक नहीं बना सकते हैं, वह भी ऊपर से ही थोपा जाता है। रघुवर सरकार सत्ता के नशे में पूरी तरह चूर है। अगर यही हाल रहा तो 2019 में इनका सारा घमंड जनता उतार देगी।

झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने पारा शिक्षकों पर पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज की निंदा करते हुए अमानवीय बताया है।

महासंघ के अध्यक्ष शिवाकांत झा व प्रांतीय महासचिव राजाराम सिंह ने लाठीचार्ज को शिक्षकों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहे पारा शिक्षकों पर अंधाधुंध लाठी चलायी गयी। इसमें दर्जनों घायल हो गये।

17 नवंबर को प्रदेश के हर जिले में पारा टीचर्स ने बैठक की और रणनीति बनाई। कहा गया कि 20 नवंबर से जेल भरो आंदोलन शुरू होगा। इससे पहले राजधानी में सभी पारा टीचर जुटेंगे और प्रदर्शन करेंगे। ''झारखंड एकीकृत पारा शिक्षक संघ मोर्चा'' के बजरंग प्रसाद ने बताया कि सरकार द्वारा जो कार्रवाई की गई है, वह सरासर गलत है। पारा शिक्षक स्थापना दिवस समारोह में शिरकत करने के लिए मोरहाबादी पहुंचे थे, लेकिन उन्हें नक्सलियों की तरह गिरफ्तार किया गया। यह पूरी तरह से अमानवीय घटना थी।''

पारा शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने जो विज्ञापन जारी किया है, उससे यह संकेत मिलता है कि सरकार बाहरी लोगों को पारा टीचर बनाना चाहती है। सरकार द्वारा जारी विज्ञापन पूरी तरह से पारा शिक्षक विरोधी है। इस आदेश को सरकार वापस ले। पारा शिक्षकों को अगर सम्मानपूर्वक शर्तों के साथ बुलाया जाता है, तभी स्कूल में योगदान देंगे, नहीं तो जोरदार आंदोलन होगा।

क्या हैं पारा शिक्षकों की मांगें:

-छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पारा शिक्षकों का स्थायीकरण किया जाए। 

-टेट पास पारा शिक्षकों को सीधी नियुक्ति प्रकिया में आरक्षण का लाभ दिया जाए।

-प्रखंडवार पारा शिक्षकों को योगदान का लाभ दिया जाए।

-सरकारी स्कूलों में नियोजन के तहत 50 फीसदी पद सुरक्षित करने की मांग।

-पारा शिक्षकों के लिये कल्याण कोष का गठन हो।

-टेट पास पारा शिक्षकों की डिग्री की वैधता दो साल बढ़ाई जाए

झारखंड के करीब 70 हजार पारा शिक्षक हड़ताल पर हैं। मगर रघुवर सरकार उनकी मांगें मानने को कतई तैयार नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा हड़ताली पारा शिक्षकों को 20 नवंबर तक अपने काम पर लौट आने का अल्टीमेटम दिया गया था। उल्टे हड़ताली पारा शिक्षकों ने 20 से ही जेल भरो अभियान के तहत पूरे राज्य के थानों में गिरफ्तारियां देनी शुरू कर दी।

बता दें कि 25 नवंबर से पारा शिक्षकों ने राज्य के भाजपा के सांसदों विधायकों के आवास पर अनिश्चितकालीन घेरा डालो, डेरा डालो धरना कार्यक्रम शुरू किया है।

इनके आंदोलन की बुलंदी का आलम यह है कि रात की कड़कड़ाती ठंड या दिन का शीतलहर पारा शिक्षकों के इरादों को डिगा नहीं पा रही है।

घेरा डालो, डेरा डालो धरना कार्यक्रम के तहत राज्य के कई भाजपा के सांसदों विधायकों के आवास सहित केंद्रीय राज्य मंत्री हजारीबाग के सांसद जयंत सिन्हा के आवास ऋषभ वाटिका के सामने सैंकड़ों की संख्या में पारा शिक्षक दिन-रात जमे हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक सांसदों और विधायकों के आवास के समक्ष धरना देते रहेंगे।








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