पेट्रोल-डीजल की कीमतें आखिर क्यों कर रही हैं आसमान से बातें?

मुद्दा , इंदौर, सोमवार , 22-01-2018


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गिरीश मालवीय

 

पेट्रोल की कीमत 80 के पार बस पहुंचने ही वाली है। रविवार को मुंबई में पेट्रोल का दाम 79.95 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया। इससे पहले एक अगस्त 2014 को मुंबई में पेट्रोल की कीमत 80.60 रुपये तक जा पुहंची थी। यह अब तक पेट्रोल के प्रति लीटर दाम का उच्चतम स्तर है, उम्मीद है एक दो दिन में ही यह आंकड़ा भी क्रॉस हो जाएगा।

लेकिन एक दिलचस्प तुलना भी कर लेना जरूरी है। जब 2014 में पेट्रोल के दाम 80 को पार कर गए थे तब भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 108.05 डॉलर प्रति बैरल पुहंच गयी थी। लेकिन आज कच्चे तेल की कीमत मात्र 67 डॉलर प्रति बैरल है। और तब भी दाम लगभग 80 रुपये लीटर हो गए हैं। यानी अगर कच्चे तेल के दाम वापस 108 डॉलर प्रति बैरल पर चले जायेंगे। तो मोटे अनुमान से पेट्रोल 130 रुपये प्रति लीटर के लगभग आपको मिलेगा।

तो आखिर इतना अधिक अंतर आया कैसे, दरअसल हुआ ये है कि यूपीए सरकार ने उस वक्त मूल्य नियंत्रण के कड़े उपाय किये थे लेकिन मोदी सरकार ने छह महीने पहले पेट्रोल डीजल के दामों को बाजार के हवाले कर दिया। इसलिए इस मूल्य वृद्धि को रोकना मोदी जी के बस की बात नहीं रह गयी है। दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह है कि पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मौजूदा सरकार के सत्ता में आने के समय इस पर उत्पाद शुल्क 9.48 पैसे था। जो फिलहाल 21.48 रुपए प्रति लीटर पर पहुंच चुका है।

अब डीजल पर आते हैं आपको यह जानकर बेहद हैरानी होगी कि 2 जुलाई 2017 को डीजल की कीमत 56.58 रुपये थी, आज इसके दाम में लगभग 10 रुपये और जुड़ चुके हैं यानी डेढ़ साल में 10 रुपये महंगा।

इंडियन ऑयल के आंकड़ों के मुताबिक दक्षिण भारत के शहर त्रिवेंद्रम में डीजल का भाव 68.21 रुपए और हैदराबाद में 68.26 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया जो देशभर में डीजल का सबसे ज्यादा और रिकॉर्ड भाव है। 

जब से मोदी सरकार आयी है डीजल पर उत्पाद शुल्क 3.56 रुपए से बढ़कर 17.33 रुपए प्रति लीटर हो गया है। 2014 से डीजल पर उत्पाद शुल्क 380 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाया गया है। डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से देश में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। डीजल का इस्तेमाल कामर्शियल गाड़ियों में ज्यादा होता है जिससे सामान और वस्तुओं के ट्रांसपोर्टेशन के लिए कमर्शियल गाड़ियों की लागत बढ़ गई है, महंगाई का दानव मुँह बाये खड़ा है।

2014 में सत्ता में आने से पहले भाजपा अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुपात में तेल की कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी को लेकर यूपीए सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोले हुए थी। बढ़ती महंगाई पर संसद के बाहर थाली बजाकर बाकायदा डांस किया जाता था। प्रधानमंत्री मोदी अपनी चुनावी रैली में तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर यूपीए की कड़ी आलोचना करते थे लेकिन जब 2015-16 के मध्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 60 प्रतिशत से भी अधिक नीचे आ गईं तब भी जनता को महंगी कीमत पर पेट्रोल डीजल बेचा गया।

और आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में थोड़ी सी मूल्य वृद्धि पर पेट्रोल फिर से 80 पार जाने वाला है। एक्सपर्ट का अनुमान है कि यह दाम अगले महीने तक 85 रुपये प्रति लीटर ओर जुलाई अगस्त तक 100 रुपये प्रति लीटर पुहंच जाएंगे।

लेकिन बढ़ती महंगाई से जनता में कोई गुस्सा नजर नहीं आ रहा है। जनता जय-जयकार के नारे लगा रही है और मोदी जी की लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है ऐसा हम नहीं कह रहे हैं न्यूज़ चैनल के सर्वे बता रहे हैं।

(गिरीश मालवीय आर्थिक मामलों के जानकार हैं और आजकल इंदौर में रहते हैं।)






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