कई आंदोलनकारी युवा नेताओं ने थामा कांग्रेस का दामन

राजनीति , अहमदाबाद/लखनऊ, सोमवार , 03-09-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद/लखनऊ। गुजरात विधानसभा चुनाव से तीन दिन पहले की बात है अहमदाबाद की दरियापुर विधानसभा में एक पर्चा बांटा गया जिसमें लिखा था राजू मोमिन (विधानसभा के निर्दलीय उम्मीदवार ) शिया हैं। इसके प्रचार में लखनऊ से बहुत से शिया प्रचार के लिए आये हैं हमें सावधान रहने की ज़रूरत है। कारण था सुन्नी मुस्लिम बहुल दरियापुर में रिहाई मंच के शाहनवाज़ आलम के कई तेजाबी भाषण हुए थे। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार गयासुद्दीन शेख को भय हो गया कहीं मैं हार न जाऊं। तत्कालीन विधायक एवं कांग्रेस प्रत्याशी गयासुद्दीन ने शाहनवाज़ आलम के उत्तर में मोटी फीस देकर शायर इमरान प्रतापगढ़ी को अपने प्रचार के लिए एक नहीं, दो बार बुलाया प्रचार के लिए।

राजनीति में अफवाह की अपनी भूमिका होती है कांग्रेस ने राजू मोमिन और शाहनवाज़ आलम के खिलाफ शिया होने की अफवाह फैला दी। लेकिन सच्चाई यह है कि न तो राजू मोमिन न ही शानावाज़ आलम शिया मुस्लिम हैं। खैर राजनीति है। राजनीति, जंग और मुहब्बत में सब कुछ जायज़ है। 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव के समय अहमदाबाद के वटवा विधानसभा में एक चुनावी भाषण में पुलिस ने शाहनवाज़ आलम का माइक बंद करा दिया था क्योंकि एक कांग्रेसी कार्यकर्ता ने 100 नंबर पर फोन कर भड़काऊ भाषण देने की शिकायत की थी। वह शिकायत आज भी पेंडिंग है।   

खबर आई है कि शाहनवाज़ आलम और उनके कई आन्दोलनकारी साथी 2019 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया है। जानकारी के अनुसार 9 अगस्त को शाहनवाज़ आलम, अनिल यादव, लक्षमण प्रसाद, दिनेश सिंह और मंगलराम आंबेडकरवादी इत्यादि की राहुल गाँधी से दो शिफ्ट में लगभग तीन घंटे की मुलाक़ात हुई थी। राहुल गांधी द्वारा इन युवा आन्दोलनकारियों से तीन घंटे बात और वाद विवाद करना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी आन्दोलन और आंदोलकारियों को लेकर गंभीर है।

शाहनवाज़ आलम ने जनचौक को बताया “राहुल गाँधी ने हमारी बातों को ध्यान से सुना और कहा कुछ करना चाहते हो तो करो कांग्रेस की आलोचना भी करो लेकिन पार्टी के अंदर रह कर।” आलम ने आगे बताया कि राहुल गाँधी अपनी बात रखना भी जानते हैं और हमें सुनना भी। उनका समानता में विश्वास है। गाँधी पार्टी को प्रगतिशील बनाना चाहते हैं। उन्होंने हमें कांग्रेस से जुड़ने का न्योता दिया। विचार-विमर्श के बाद हम लोगों ने उसे स्वीकार कर लिया। 

राज बब्बर के साथ शाहनवाज।

रविवार को वामपंथी छात्र आन्दोलन से निकले आंदोलकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर की उपस्थिति में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 250 लोग शाहनवाज़ आलम तथा अन्य आदोलनकारियों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। पार्टी में शामिल होने वालों में मुख्यतः अनिल यादव, मंगलराम आंबेडकरवादी  (गाजीपुर), सरिता पटेल (बनारस), दिनेश सिंह (फैजाबाद), सरवन साहू (जालौन आम आदमी पार्टी प्रमुख ), सरोज (ग्राम प्रधान), राजनारायण यादव (छात्र सेना), सुधांशु (छात्र नेता, लखनऊ), अक्षत शुक्ल (युवा नेता), फरहान वारसी (पीस पार्टी प्रदेश सचिव)। इनमें अधिकतर वामपंथ के क्रांतिकारी विचारों से प्रभावित तथा राम मनोहर लोहिया को अपना राजनैतिक गुरु मानते हैं।

समाजवाद के अलमबरदार राम मनोहर लोहिया पूरे जीवन राहुल गांधी के दादा जवाहरलाल नेहरु के खिलाफ राजनैतिक लड़ाई लड़ते रहे हैं। नेहरु के खिलाफ लोहिया की चार आना बनाम बारह आना वाली लड़ाई बहुत चर्चित हुई थी। लोहिया के विचारों पर चलने वाले आन्दोलनकारी जिन्होंने एक दशक से अधिक समय तक UPA और कांग्रेस की नीतियों की आलोचना के बाद अब नवासे राहुल की कांग्रेस की नैय्या पार लगाएंगे। पहले आलोचक अब साथी के जवाब में आलम का कहना है कि “कांग्रेस की गलत नीतियों के खिलाफ लड़ रहे थे लेकिन अब गलत विचारधारा के खिलाफ लड़ने की आवश्यकता है। नीतियां बदली जा सकती हैं लेकिन देश-विरोधी विचारधारा के खिलाफ एक होकर लड़ना ज़रूरी हो जाता है।”

अहमदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार बसंत रावत का कहना है “ऐसे प्रगतिशील युवा जो बेबाक तरीके से संघ और भाजपा के खिलाफ बोलते हैं, बेहतरीन प्रवक्ता हैं। उस समाज के लिए उम्मीद हैं जिन्हें अब तक केवल वोट बैंक समझा जाता रहा है। उनके मुद्दों को उठा सकते हैं। राजनैतिक निराशा के कारण AIMIM जैसी पार्टियों में उम्मीद देखते हैं। शाहनवाज़ जैसे प्रगतिशील युवाओं में ऐसा आकर्षण है जो इन्हें सही दिशा में मोड़ सकते हैं। गुजरात जैसे राज्यों में इन्हें कैंप करने की आवश्यकता है। जहां यह लोग अशांत धारा कानून, राजनैतिक हिस्सेदारी, 10% मुस्लिम आबादी वाले गुजरात में जेलों में मुलाक़ात के समय 60–70% बुरखे वाली महिलाऐं क्यों होती हैं। ऐसी समस्याओं के खिलाफ ऐसे ही युवा लड़ सकते हैं। इन्हें एक प्लेटफार्म मिला है यह अच्छी खबर है।”

पूर्वांचल से आने वाले आन्दोलनकारी अनिल यादव का मानना है कि कांग्रेस पार्टी सामाजिक न्याय वाली पार्टी है। राहुल गाँधी की लीडरशिप पर विश्वास करते हुए पार्टी को नई धार के साथ पुराने वोट बैंक (दलित,पिछड़ा,आदिवासी,अल्पसंख्यक) को पार्टी के साथ पुनः जोड़ने का प्रयत्न करेंगे। 

आप को बता दें यह सभी लोग वामपंथी, लोहिया और आंबेडकर के विचारों वाले बीते एक दशक से समाजवादी और कांग्रेस के खिलाफ जनविरोधी नीतियों पर सड़क की लड़ाई लड़ रहे थे। शाहनवाज़ आलम स्वतंत्र पत्रकार भी हैं जिन्होंने दो पुस्तकें भी लिखी हैं।  

 










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