जिनका पूरे देश पर कब्जा भला उनको आरक्षण की क्या जरूरत?

मुद्दा , , बुधवार , 09-01-2019


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मदन कोथुनियां

आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10% आरक्षण। जय हो। इसे कहते हैं जातिवाद। इसे कहते हैं पक्षपात। इसे कहते हैं शोषण। इसे कहते हैं तथाकथित न्याय। गरीब के साथ न्याय हो इसका हम भी समर्थन करते हैं लेकिन सवाल यह है कि गरीब कौन? 

बाबा साहब ने आरक्षण की व्यवस्था उन लोगों के लिये की थी जिनके साथ भेदभाव होता था, जिनके मानव अधिकारों का हनन होता था, देश में आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार व संसाधनों से वंचित थे। उन्हें देश व समाज की मुख्यधारा में लाने के लिये आरक्षण की व्यवस्था की थी।

सवर्णों के किस अधिकार का हनन हो रहा है। सारे अधिकार इनके पास हैं कानून बनाने वाली विधायका में सबसे अधिक, कानून को अमल में लाने वाली कार्यपालिका में सबसे अधिक, कानून के अनुसार न्याय देने वाली  न्यायपालिका पर एकाधिकार व कानून में कहीं चूक हो तो उसमें सुधार की आवाज उठाने वाली मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण। अब इनके अधिकारों का कहां हनन हो रहा है।

देश के 15% सवर्णों का देश की धनसंपदा पर 90% कब्जा, मंदिरों में 100% कब्जा, देश की प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों पर 100% कब्जा, देश में जितने एनजीओ हैं उनमें से 90% इनके, देश के चयनित तथाकथित महापुरुषों में 95% इनके हैं। देश के शहर, गांवों, गली मोहल्लों, चौराहों, स्कूलों, कालेजों, सरकारी योजनाओं, सरकारी भवनों, कॉलोनियों, सड़कों, पार्कों, नदी-नालों-नहरों, ट्रेनों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों व अस्पतालों के 90%  इनके महापुरुषों के नाम से हैं। 10  प्रतिशत आरक्षण देने से हमें कोई एतराज नहीं है देश की जनता को सिर्फ यह बता दीजिये कि यहां सवर्णों का शोषण हुआ है, यहां भेदभाव हुआ है।

सवर्णों की आबादी देश में 15% है और देश की कुल 90% धनसंपदा, नौकरियों व संसाधनों पर इनका कब्जा है तो आर्थिक रूप से कितने प्रतिशत कमजोर हैं। इसके आंकड़े जाने बगैर 10% आरक्षण कैसे दिया? आर्थिक रूप से 1% मुश्किल से कमजोर मिलेंगे। फिर 1% के लिये 10% आरक्षण क्यों? देश में सवर्ण आरक्षण की मांग किस सन में उठी, किसने मांग उठाई, कहां-कहां प्रदर्शन हुये और कितने लोगों ने कुर्बानी दी ? 

देश में ओबीसी की आबादी 52% है फिर आरक्षण 27% क्यों? ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था बाबा साहब ने भारत के संविधान में की थी। फिर भी लागू करने में 40 साल क्यों लगे?  50% से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता इस कानून की आड़ में गूजरों, जाटों, पटेलों, मराठों, कापुओं को क्यों मारा ? उन पर देशद्रोह के मुकदमे क्यों चलाये ? क्यों 20 साल तक इन्हें लटकाये रखा ? इनके लिये लोकसभा में विधेयक क्यों नहीं लाया गया ? यही वो लोग हैं जो संविधान में दिये गये अधिकारों को भीख कहकर गरीबों का मजाक उड़ाते थे। आज खुद कटोरा ले लिए हैं। 15% सवर्णों के लिये 10% आरक्षण का लोकसभा में विधेयक लाने का सीधा सा मतलब है कि अभी भी देश 15% सवर्णों का गुलाम है।

(मदन कोथुनियां स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल जयपुर में रहते हैं।)








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Kamlesh Verma :: - 01-10-2019
ये एक कड़वी सच्चाई है कि आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था ने एक ऐस वर्ग खड़ा कर दिया है जिसमे लगभग 35 %से 40 % लोग ही पुश्त दर पुश्त लाभ उठा रहे हैं और वे इसे अपने अन्य वंचित लोगो के लिए छोड़ने को तैयार नहीं, आज भी लगभग 60 % से 65 % लोग आरक्षण के लाभ से महरूम हैं। वास्तव में आरक्षण का लाभ उन लोगों द्वारा अन्य वंचित लीगों के लिए स्वतः त्याग देना उचित होगा अन्यथा इसके फलस्वरूप आरक्षित वर्ग- समाज में एक नई भेदभाव पूर्ण खड़ी हो रही है जो लीगों में परस्पर कटुता व असमानता खड़ी कर रही है।

Kamlesh kumar :: - 01-09-2019
Right sir ji