सीवर में हत्याओं के खि़लाफ़ लोगों ने किया आर-पार की लड़ाई का ऐलान,विल्सन ने कहा- मौतों पर चुप क्यों हैं पीएम

ज़रा सोचिए... , , मंगलवार , 25-09-2018


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वीना

नई दिल्ली। सीवर में लगातार हो रही हत्याओं के खिलाफ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन हुआ। तकरीबन सात दिनों तक चले अभियान के बाद आज भारी तादाद में जुटकर लोगों ने इस जानलेवा व्यवस्था से निजात दिलाने का संकल्प लिया। प्रदर्शन में कई संगठन शामिल थे। इस मौके पर सीवर में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों ने अपनी आपबीती सुनाकर प्रदर्शनकारियों के संकल्प को और पुख्ता कर दिया था।

आप को बता दें कि गंदे नालों या सेप्टिक टैंक की सफाई करने के दौरान जहरीली गैसों से दम घुटने से केवल 7 दिनों में 11 लोगों की मौत हो गयी।

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे सफाई कर्मचारी आंदोलन के नेता और मैग्सेसे पुरस्कार विजेता विल्सन बैजवाड़ा ने इस मौके पर जमकर सरकार पर हमला बोला। 

उन्होंने कहा कि ‘‘1,790 नागरिक मर चुके हैं। इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? सीवर साफ करते हुए जो लोग मरे उनके परिवार वाले यहां बैठे हैं। इनकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? प्रधानमंत्री जी आप चुपचाप बैठे रहते हैं। पर इस देश के नागरिक चुप नहीं बैठेंगे। ये पूछेंगे - हमारे भाई को किसने मारा? हमारे पिता को किसने मारा? हम ग़ुलाम नहीं है। इस देश के नागरिक हैं। हमें जीने का हक़ है। संविधान के अनुसार जीने का हक़ सबको है। आप हमें कैसे मार सकते हैं?’’

ऑल इंडिया प्रगतीशील महिला एसोसिएशन (एपवा) की राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन ने मोदी के स्वच्छता अभियान की पोल खोलते हुए कहा कि ‘‘सरकार कहती है कि सफाई कर्मचारियों के कांट्रेक्टर-ठेकेदार ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई तो हम क्या करें। ऐसा कहकर वो अपना पल्ला झाड़ लेती हैं। झाडू उठाकर वो महिलाएं रोज़-रोज़ काम करती हैं। वो लोग काम करते हैं जो दलित हैं। और उनके नाम पर स्वच्छता की राजनीति आप करेंगे। लेकिन इनको वेतन मिले, इनको जीने का अधिकार मिले, इनकी मौतें न हों इसको सुनिश्चित करने से अगर आप कतरा रहे हैं, इस पर एक शब्द नहीं बोल सकते तो शर्म करिये।’’

जंतर मंतर पर प्रदर्शन।

सीपीएम की नेता वृंदा करात ने कहा कि ‘‘आज दिल्ली के अंदर जो निजीकरण की नीति है उसके चलते किसी भी सफाई कर्मचारी को आज किसी प्रकार का अधिकार हासिल नहीं है। आज हज़ारों की संख्या में पूर्वी दिल्ली में वो बैठे हुए हैं। क्योंकि उनको महीनों-महीनों साल-साल तक वेतन नहीं मिल रहा है। केंद्र और दिल्ली की सरकार बातें बनाने में लगी हुई हैं।’’

इस मौके पर राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा ने कहा कि ‘‘70 साल में सीवर साफ करने वाले की जाति नहीं बदली। मौत का सिलसिला नहीं बदला तो हमें मंगलयान बनाने का कोई हक़ नहीं है। एक बीमार समाज में हम तब्दील हो गए हैं। और मेरी ये शिकायत आज के प्रधानमंत्री से नहीं है। हम तमाम राजनीतिक दल शरीके़ गुनाह है। हम जो आपके बीच में हैं इस चुप्पी को स्वीकार करने के लिए भी हैं। जो 70 सालों से हमारी चुप्पी रही उस चुप्पी की वजह से ये मौतों का सिलसिला लगातार चला।’’

‘‘2005 को नौवें महीने की पांच तारीख को सीवर में गैस चढ़ने से मेरे पति की मौत हो गई थी।’’ ये बयान है हरियाणा के सोनीपत से आई पुष्पा का। बेबस अकेली पुष्पा कहती हैं कि ‘‘मेरे छोटे-छोटे बच्चे थे। तब से लेकर अब तक मैं अकेले ‘‘मज़दूरी करके अपने बच्चों का पेट पाल रही हूं। आज तक सरकार से लड़ रही हूं। मेरे बच्चों को कुछ भी सहारा नहीं मिला। मेरे पास अपना घर नहीं। सास-ससुर का सहारा नहीं। मैं चाहती हूं ये सीवर लाइन बंद हो जाए। जैसे मैं बिना पति के रह रही हूं किसी का भाई, किसी का पति, किसी का बेटा ना मरे ऐसे।’’

जौनपुर उत्तर प्रदेश के निवासी कृष्णा यादव के भाई पंकज की भी मौत अभी हाल ही में सीवर में गैस निकलने से हुई है। कृष्णा ने बताया कि ‘‘ मेरे भाई की मौत सीवर की जहरीली गैस लगने से हुई। सीवर में मीथेन गैस बनती है। सुपरवाइज़र ने चेक नहीं किया। ये गैस फेफड़ा फाड़ देती है। गला सूखने लगता है। मेरा भाई सीवर टैंक में ही मर गया। अभी तक न प्राइवेट लिमिटेड कंपनी उन्नति इंजीनियर्स जिसके लिए हम काम करते हैं, की तरफ से कोई मदद मिली और न ही सरकार की तरफ से। उस दिन उसकी छुट्टी थी। पंकज ऑपरेटर था उसका सीवर सफाई का काम नहीं था। उससे ज़बर्दस्ती ये काम करवाया गया।’’

पीड़ितों के परिजन और बच्चे।

वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि ‘‘ बेजवाड़ा विल्सन ने बिल्कुल सही सवाल हमारे सामने रखा है। जिम्मेदारी किसकी है? ये उन्होंने स्पष्ट शब्दों में हमें बताया है। केंद्र सरकार कहती है हम नहीं हैं। राज्य सरकार कहती है हम नहीं हैं। जल बोर्ड कहता है हम नहीं हैं। अगर ये जो मौतें हो रही हैं। हत्या हैं, हत्या हैं तो हत्या की ज़िम्मेदारी कानून में है। और जिसकी ज़िम्मेदारी है उसको जवाबदेह बनाना होगा। जिस सरकार ने ये मौत होने देने के सिस्टम को सहमति दी है उसकी भी जिम्मेदारी होनी होगी।

आज का कानून कहता है कि अगर आप प्रोटेक्टिव गियर टोपी-दस्ताने दे देंगे तो उसके बाद वो मैन्युअल स्कैवेंजिंग नहीं रहेगा। ये हत्याएं गैसों से हो रही हैं। कोई ऐसा प्रोटेक्टिव गियर ना है ना दिया जा रहा है इन लोगों को। कानून में जो गोल-माल किया जा रहा है उसको साफ करना होगा। इन हत्याओं को बंद करने की ज़िम्मेदारी अदालतों को भी लेनी होगी। और जो-जो सरकारें और नीचे के अफसर ज़िम्मेदार हैं उन सबकी जवाबदेही लेना, इन हत्याओं को बंद करना आज इस देश की अदालतों की अहम ज़िम्मेदारी होनी चाहिये।’’

14 सितंबर को दिल्ली में सीवर सफाई के दौरान अनिल की मौत हो गई। अनिल की पत्नी रानी अपने तीन बच्चों के साथ विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने बताया कि अभी तक न तो सरकार की तरफ से और न ही सोशल मीडिया पर जो मदद उनके लिए आई है वो उन तक पहुंची है। रानी बार-बार पति अनिल को याद कर रोने लगती थी। तुम वापस आ जाओ...वापस आ जाओ...कहते हुए।’’ 

सवाल है कि क्या हमारे स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर प्रधानमंत्री के कलेजे तक रानी के बिलखने की आवाज़ पहुंच पाएगी?  क्या इन मौतों का सिलसिला जिसे विल्सन हत्या कह रहे हैं, रुकेगा? इन मज़दूरों के रोज़गार-सुरक्षा, विस्थापन की गारंटी कोई पार्टी या सरकार लेगी? आखि़र में सीवर हत्याओं के खि़लाफ़ जनता की तरफ़ से अब आंदोलन का बिगुल बज चुका है। 

सिविल सोयायटी और राजनीतिक-सामाजिक, छात्र संगठनों ने बेजवाड़ा विल्सन के सीवर हत्या विरोधी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। लेखिका अरुंधति राय, योगेन्द्र यादव, सुभाषिनी अली ने भी सीवर-सफाई कर्मचारी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। 









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