लोया मामले की अहम कड़ी सतीश यूके को फिर चार दिन की रिमांड पर भेजा गया

मुद्दा , , सोमवार , 06-08-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। जज बीएच लोया मामले में अहम कड़ी रहे एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता सतीश यूके को कोर्ट ने फिर से चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। सतीश यूके से जुड़े 17 साल पुराने जमीन विवाद के इस मामले को महाराष्ट्र की क्राइम ब्रांच देख रही है। ये मसला सिविल है या फौजदारी इसको लेकर भी विवाद है। 17 साल पुराने केस के एकाएक सामने आने पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। खास बात ये है कि नागपुर की स्थानीय पुलिस ने मामला सिविल बताते हुए इसे लेने से इंकार कर दिया था। बाद में मामले को क्राइम ब्रांच की ईडब्ल्यूओ को सौंप दिया गया। इसके पहले 1 अगस्त को नागपुर सीजेएम की कोर्ट ने यूके को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा था।  

नागपुर सेशन कोर्ट ने इसी 25 जुलाई को सतीश यूके की ओर से पेश एक शिकायत में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को नोटिस जारी किया था। जिसमें उन पर चुनावी एफिडेविट में अपने से जुड़े दो आपराधिक मामलों को छुपाने का आरोप है। ठीक उसके एक हफ्ते बाद ही यूके की गिरफ्तारी हो गयी। जो कई तरह के संदेह को जन्म देती है। अभी फडनवीस को नोटिस मिली भी नहीं थी कि इधर यूके गिरफ्तार हो गए।

जमीन कब्जा मामले की जांच कर रहे पुलिस इंस्पेक्टर ललित वार्तिकर के मुताबिक यूके ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर ऐश्वर्यी सहकारी गृह निर्माण संस्थान के मालिकाने वाली जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए थे। वार्तिकर का दावा है कि 5 करोड़ रुपये की कीमत वाली 1.5 एकड़ जमीन को तीनों ने अवैध तरीके से हासिल कर लिया था। और उन लोगों ने असली मालिक को उससे बेदखल कर दिया था। वार्तिकर ने बताया कि “वो जमीन पर जबरन कब्जा कर लिए थे और जब भी मालिकान अपनी संपत्ति तक पहुंचने की कोशिश किए तो उन्होंने ताकत के बल पर उन्हें रोक दिया।”

ये पूछे जाने पर कि मामले को क्यों क्राइम ब्रांच का ईओडब्ल्यू देख रहा है स्थानीय पुलिस क्यों नहीं? तो वार्तिकर ने कहा कि शिकायतकर्ता ने सबसे पहले स्थानीय पुलिस से संपर्क किया था। लेकिन उसने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने बताया कि “हाउसिंग सोसाइटी की सेक्रेटरी शोभारानी नलोडे ने पहले अजनी पुलिस स्टेशन से संपर्क किया था। लेकिन चूंकि पुलिस ने उनके केस पर कार्रवाई नहीं की इसलिए हमें उसमें कूदना पड़ा।” पुलिस ने इस मामले से जुड़े कई लोगों के बयानों को पहले ही दर्ज कर लिया है। उनके मुताबिक नलोडे समेत तीन दूसरे पीड़ितों ने भूमि कब्जे के मामलों के लिए बनी एसआईटी से संपर्क किया था। और उन्होंने इसमें हस्तक्षेप की मांग की थी। वार्तिकर के मुताबिक अजनी पुलिस ने मामले को सिविल करार देते हुए उसमें दखल देने से इंकार कर दिया था।

वार्तिकर ने केस के राजनीतिक मंशा से प्रेरित होने से इंकार किया। लेकिन साथ ही ये भी कहा कि यूके मशहूर शख्स है। उन्होंने बताया कि “उसने दिल्ली में कपिल सिब्बल की ओर से आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में भी हिस्सा लिया था।”

गौरतलब है कि सतीश यूके लोया मामले में कई अहम सबूत और उससे जुड़े कागजात सामने ले आए थे। जिसमें लोया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कथित हेराफेरी प्रमुख था। इसके साथ ही उन्होंने बताया था कि 29 नवंबर 2014 को खुद उनकी लोया से मुलाकात और बातचीत हुई थी। इस सिलसिले में वो अपने दोस्त श्रीकांत खांडेल्कर का भी हवाला देते हैं। उनका कहना है कि खांडेल्कर ने लोया से जुड़े कई सबूत उनको दिए थे। लेकिन उनके दफ्तर में उनके ऊपर जानलेवा हमले की कोशिश में गिरे गर्डर के नीचे आकर ढेर सारे सबूत नष्ट हो गए।

अभी हाल में यूके ने बांबे हाईकोर्ट में एक मुकदमा दायर किया है जिसमें सामने आये नये सबूतों के आइने में उन्होंने लोया के परिजनों के लिए मुआवजे की मांग की है। इसमें उनका कहना है चूंकि लोया की मौत सरकारी ड्यूटी के दौरान हुई थी इसलिए उनके परिजन मुआवजे के हकदार हैं। उनकी याचिका अभी हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार की जानी बाकी है। 

सतीश यूके बड़े और रसूखदार लोगों से लड़ने के लिए जाने जाते हैं। 2009 में उन्होंने नागपुर एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने फडनवीस के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें उन्होंने अपने लंबित आपराधिक केसों को चुनावी एफिडेविट में छुपाने का आरोप लगाया था। यूके ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपराधिक मुकदमे को शुरू करने की मांग की थी। हालांकि मजिस्ट्रेट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया था लेकिन उसके बाद यूके 2014 में हाईकोर्ट चले गए। 

धोखेधड़ी के इस मामले में पुलिस की जांच जारी है। लेकिन पुलिस इस बात का जवाब नहीं दे पा रही है कि मामले को दर्ज करने में देरी क्यों हुई। इस पर वार्तिक का कहना था कि “ये सभी कुछ जांच का हिस्सा है। हम जांच की प्रक्रिया में मंशा और मामले में आरोपी की भूमिका को जानने की कोशिश करेंगे”।

स्थानीय स्तर पर वकीलों ने सतीश यूके की इस गिरफ्तारी का विरोध भी शुरू कर दिया है। शनिवार को वकीलों ने नागपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस कर उसे पूरी तरह से अवैध करार दिया है। संवाददाताओं को संबोधित करते हुए एडवोकेट संजय पाटिल ने कहा कि दीवानी प्रकरण को फौजदारी का रूप देकर उन्हें अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि ये सब कुछ राजनीतिक दबाव में हो रहा है।

उन्होंने बताया कि इस विवाद से संबंधित दो मामले न्यायालय में लंबित हैं। और न्यायालय ने उसका मालिकाना अधिकार शोभारानी नलोडे को नहीं दिया है। वो इसके पीछे यूके द्वारा फडनवीस के खिलाफ दर्ज मुकदमा और लोया में उनकी पैरवी को अहम वजह बताते हैं। जिसमें मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के आला नेता घेरे में हैं। संजय पाटिल का कहना है कि यूके को गिरफ्तार कर उसकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इस मौके पर कई दूसरे वकील भी मौजूद थे जिसमें नागेश चौधरी, मिलिंद पखाले, वैभव जगताप और अभियान बाराहाते शामिल थे।

 (रिपोर्ट में कुछ इनपुट “दि वायर” से लिए गए हैं।)










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suresh :: - 08-07-2018
desh me kanoon gaalt hato me ja chuka hai . judge loya case me whistleblower ke rup me ukey dwara kiya gya karya se bjp or uske aakao ki need ud chuki thi apni rajnetik postion ka upyog karte huey or supreme court ke ek tarfa raviya se satya ki khhoj nahi ho saki . is desh me jab ek judge ki mout ki satyta ko chupane me saari machinari lga di jaati hai to ye saaf saaf jaahir hota hai ki desh me satta or loktantrik sansthano ko kabje me liya ja chuka hai , or ye sansthan swantantra kaam na krte huey ek dusre se kadam taal karte huey dhikyi dete hai jo ki loktantra ke liye khtarnak hai. isliye desh ke har aam or kaash nagrik ko apne desh ke savidhanik aacharan ko bachane ke liye tan man dhan se kaam karna hoga nahi to bavisya me uske fundamental right ko alag rup me rupantrit kar diya jaayega or bharat ka loktantra mart ho jayega.