मोदी के गुजरात में दलितों के फंड को दूसरे कर जा रहे हैं हजम

ग्राउंड रिपोर्ट , , सोमवार , 11-06-2018


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कलीम सिद्दीक़ी

गांधीनगर/अहमदाबाद। संविधान ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उत्थान और बराबरी के लिए आरक्षण और दलित उत्पीड़न एक्ट दिया है ताकि वर्षों के जातिगत भेद भाव और निचले पायदान से यह समाज ऊपर आ सके। दलित उत्पीड़न एक्ट को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और गाइड लाइन के बाद लूला लंगड़ा बना दिया गया है। दलित और आदिवासी समाज को आरक्षण से वंचित करने के लिए ठेकेदारी प्रथा को तेज़ी से बढ़ाया गया। दसाडा ( गुजरात) से विधायक नौशाद सोलंकी कहते हैं-

“सरकार ठेके से काम चला रही है जिस कारण नौकरी रही नहीं अब आरक्षण केवल राजनैतिक लाभ के लिए बचा हुआ है।"

कांग्रेस विधायक नौशाद सोलंकी

नौशाद सोलंकी कांग्रेस पार्टी से विधायक हैं। लेकिन पार्टी लाइन से उठकर उन्होंने कांग्रेस, निर्दलीय और बीजेपी के दलित एवं आदिवासी विधायकों को भी 12 मई को एससी/एसटी सब-प्लान एक्ट पर चर्चा के लिए निमन्त्रण भेजा है।

एससी/एसटी सब-प्लान एक्ट पर चर्चा के लिए निमन्त्रण पत्र

एससी/एसटी सबप्लान एक्ट पर चर्चा के लिए निमन्त्रण पत्र

सब-प्लान एक्ट या स्पेशल कॉम्पोनेन्ट एक्ट द्वारा अनुसूचित तथा अनुसूचित जनजाति को आवंटित फंड के दुरूपयोग को रोका जा सकता है। इस प्रकार का कानून कर्नाटक,केरल,आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में है। जिस कारण वहां की सरकारें एससी/एसटी को आवंटित फंड का दुरूपयोग नहीं कर पाती हैं। नौशाद सोलंकी के अनुसार-

 

  • 3 से 4 फीसदी वेलफेयर फंड ही दलित आदिवासियों के कल्याण में उपयोग हो रहा है। 90 से 98 फीसदी फंड अन्य कार्यों में गुजरात सरकार कर रही है। सोलंकी के अनुसार गुजरात सरकार ने अहमदाबाद सहित राज्य के बड़े शहरों में 600 करोड़ में कई समरस हॉस्टल बनाये लेकिन इन हॉस्टलों में 15 फीसदी से अधिक दलितों को प्रवेश नहीं मिलता है।
  • इसी प्रकार से रोज़गार पाक्षिक पत्रिका एससी  वेलफेयर फंड से छपती है। सड़कें बनाकर कहते हैं कि आगे दलित बस्ती है। इसीलिए इस फंड का उपयोग काइट फेस्टिवल और वाइब्रेंट गुजरात में किया जाता  रहा है।

 

एससी/एसटी  वेलफेयर फंड के दुरूपयोग को रोकने के लिए कांग्रेस विधायक नौशाद सोलंकी ने विधानसभा में एससी/एसटी  सबप्लान एक्ट में रखा है। वह कहते हैं कि संभवतः फरवरी 2019 में चर्चा होगी लेकिन हम इस बिल पर चर्चा के लिए स्पेशल सेशन की मांग करेंगे । इस कानून को लोगों के बीच ले जाकर जागरूकता फैलाएंगे।  

यदि यह कानून पास होता है तो 7 फीसदी दलित और 15 फीसदी आदिवासी (1.5 करोड़) आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। 2018-19 में गुजरात राज्य का बजट 183666 करोड़ था यदि कानून होता तो 40406.52 करोड़ रुपये सीधे दलित और आदिवासियों के कल्याण में उपयोग किया जाता। नौशाद सोलंकी इस कानून को पास करने के लिए सभी दलों के एससी/एसटी  विधायकों का सहयोग चाहते हैं। वे सकारात्मक तरीके से सरकार पर दबाव भी बनायेंगे। 

काउंसिल फॉर सोशल जस्टिस को पत्र

काउंसिल फॉर सोशल जस्टिस के वालजी भाई पटेल बताते हैं “एससीएसपी/ टीएसपी एक योजना है जो भारत के सभी राज्यों में लागू की गई है ताकि अनुसूचित जाति / जनजाति के कल्याण के लिए राज्य आवश्यक योजनाएं बना सकें। राज्य योजना के अनुसार फंड का आवंटन करते हैं लेकिन सरकारें इस फंड के उपयोग में अपनी मनमानी करती हैं । वालजी भाई को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली सूचना के अनुसार 

1 जनवरी 2015 से 13 सितंबर 2017 के दरमियान राज्य सरकार ने 9904614 रुपये जिला अधिकारियों के वेतन-भत्ता में उपयोग किया 

30-3-2016 को “लोको न महेसुली प्रश्नों नूं पारदर्शक निराकरण” पुस्तक छापी गई जिसमें 5 लाख 42 हज़ार खर्च हुए 

2-6-2010 ‘’रोज़गार समाचार’’ पत्रिका की छपाई में 23 लाख 84 हज़ार खर्च हुए 

16-6-2016 “रोज़गार समाचार” पत्रिका के वितरण का पोस्टल खर्च 5 लाख 86 हज़ार 

3-11-2017 गरीब कल्याण मेला में 3 लाख मुख्यमंत्री संदेश पम्फलेट में 22 लाख 48 हज़ार खर्च किया 

22-11-2016 “द गुजरात त्रिमासिक” की 5 हज़ार कॉपी में 1 लाख 49 हज़ार खर्च किये 

21-4-2016 मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में 48 लाख

1-5-16 को गुजरात राज्य स्थापना दिवस पर 1 करोड़ 44 लाख 

17-9-16 “दिव्यांगों ना जीवन मां उजास” प्रचार में 91 लाख साधन सहाय में 43 लाख70 हज़ार

11-2-17 “युवा वर्ग नि पड्खे सरकार” योजना पर खर्च 80 लाख 

3-3-17 “मेगा जॉब फेयर 2017” में 82 लाख 50 हज़ार 

16-3-17 “आपणी सरकार सौ ना आरोग्य नि रखे दरकार” में 41 लाख 45 हज़ार रुपये

17-4-17 टीवी अख़बार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात स्वागत में 1 करोड़ 20 लाख खर्च किए  

15-8-17 स्टेचू ऑफ़ यूनिटी सरदार पटेल के लिए लोहा एकत्रित करने के अभियान में 1 करोड़ 46 लाख खर्च किये 

इन सब के अलावा हजारों करोड़ रुपये का बजट दलित आदिवासियों का छीन कर गुजरात सरकार ने अपने प्रचार एवं प्रसार में खर्च कर दिए। दलितों को जमीन आवंटन का संवैधानिक हक होते हुए भी राज्य सरकार ने कोई मजबूत कानून नहीं बनाया, राज्य में रिजर्वेशन एक्ट भी नहीं है। शिक्षा में भी दलितों के लिए कुछ ख़ास नहीं है। वालजी ने एससी/ एसटी फंड के दुरूपयोग को रोकने के लिए दबाव बनाकर 30-5-2015 को एक परिपत्र जारी करवाया था। लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हुआ है।    








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