सोहराबुद्दीन मामले में नया मोड़, गवाह ने कहा-पुलिसकर्मियों ने दी थी तुलसीराम और मुझे मारने की धमकी

पुलिस पर सवाल , मुंबई, मंगलवार , 10-07-2018


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जनचौक ब्यूरो

मुंबई। सोहराबुद्दीन फेक एनकाउंटर मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब एक गवाह ने कोर्ट के सामने कहा कि तुलसीराम प्रजापित को पुलिस वालों ने हत्या की धमकी दी थी। अभी तक इस मामले में सारे गवाह अपनी पुरानी गवाही से पलटते जा रहे थे। लेकिन सोमवार को तुलसीराम प्रजापति के भतीजे कुंदन प्रजापति के बचपन का दोस्त अपने बयान पर खड़ा रहा। उसने कोर्ट को बताया कि पुलिस ने उसे और कुंदन को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वो कोर्ट में सुनवाई के लिए तुलसीराम प्रजापति के साथ जाने की तैयारी कर रहे थे। उनकी गिरफ्तारी एक झूठे केस में की गयी थी।

सोमवार को 28 साल के इस गवाह को कोर्ट में इंदौर की एक जेल से लाया गया जहां उसे इस समय रखा गया है। गवाह ने कोर्ट को बताया कि 2006 में वो और कुंदन तुलसी प्रजापति से मिलने के लिए उदयपुर सेंट्रल जेल गए थे। उसने बताया कि तुलसीराम के निर्देशों के मुताबिक दोनों उदयपुर रेलवे स्टेशन पर भी गए जहां से उन्हें कोर्ट में सुनवाई के लिए तुलसीराम के साथ जाना था। गवाह ने कोर्ट को बताया कि उन्हें उसी ट्रेन से यात्रा करनी थी जिससे तुलसीराम को जाना था क्योंकि तुलसीराम को इस बात की आशंका थी कि पुलिस रास्ते में उसका एनकाउंटर कर देगी।

गवाह ने बताया कि “तुलसीराम ने हमें बताया था चूंकि सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी के अपहरण का वो गवाह था इसलिए पुलिस के लोग एनकाउंटर में उसे मार देना चाहते थे। जैसे ही मैं और कुंदन ट्रेन पकड़ने वाले थे तभी सादे ड्रेस में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने हमें रोक लिया और फिर एक जीप में बैठाकर सूरजपोल पुलिस स्टेशन ले गए। वहां हम दोनों को 20 से 25 दिनों तक हिरासत में रखकर लगातार पिटाई की जाती रही।”

हालांकि 2011 में सीबीआई को दिए अपने बयान में गवाह ने उन पुलिसकर्मियों का नाम बताया था जिन्होंने उसकी कथित तौर पर पिटाई की थी। इसमें उदयपुर के तत्कालीन एसपी दिनेश एमएन (2017 में आरोपी के तौर पर डिस्चार्ज कर दिए गए हैं) और मौजूदा समय में आरोपी के तौर पर मुकदमे का सामना कर रहे अब्दुल रहमान, हिमांशु सिंह रावत, नारायन सिंह, करतार सिंह और युद्धवीर सिंह का नाम लिया था। लेकिन सोमवार को उसने किसी खास का नाम नहीं लिया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उसने कोर्ट को बताया कि पुलिस लगातार रेलवे स्टेशन पर उनसे तुलसीराम प्रजापति से मिलने के मकसद के बारे में पूछती रही। गवाह ने कोर्ट को बताया कि “वो इस बात का आरोप लगा रहे थे कि हम उसे पुलिस की कस्टडी से भागने में मदद करना चाहते थे। ‘उन्होंने बोला कि तुमको भी मार देंगे उसको (तुलसीराम) तो मारना ही है’।”

उसने बताया कि उसके बाद पुलिस ने उन्हें एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया। गवाह ने कोर्ट को बताया कि “हमें उदयपुर सेंट्रल जेल में भेज दिया गया जहां तुलसीराम बंद थे। उसने हम लोगों को बताया कि हमारी गिरफ्तारी के बारे में उसने अहमदाबाद कोर्ट समेत विभिन्न संबंधित अधिकारियों को सूचना दे दी है। उसने हम लोगों को बताया था कि वो पुलिस द्वारा मार दिया जाएगा। एनकाउंटर से एक दिन पहले उसे एक कोर्ट की सुनवाई के लिए अहमदाबाद ले जाया गया था। बाद में हमें उसके मौत की जानकारी मिली।”  








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???? ???????? :: - 07-10-2018
जो गवाह यहाँ अपने बयान से बदल गए हैं उन्हें ऊपर जाकर तो जवाब देना ही होगा . जो यहाँ सच का साथ देगा काम से कम मुक्त होकर तो मरेगा . न्याय तो यहाँ भी होना है और ऊपर भी .