छत्तीसगढ़ नान घोटाला मामले में डीजी मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश सिंह निलंबित

देश , रायपुर, शनिवार , 09-02-2019


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तामेश्वर सिन्हा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाला मामले में राज्य सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के सबसे चहेते दो आईपीएस अधिकारियों डीजी मुकेश गुप्ता और नारायणपुर एसपी रजनेश सिंह को निलंबित कर दिया गया है। दर्ज अपराधों में त्रुटिपूर्ण प्रवृत्तियों के लिए सरकार ने ये कार्रवाई की है। निलंबन अवधि तक दोनों अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय (PHQ)  में अपनी उपस्थिति देनी होगी। ईओडब्ल्यू द्वारा एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य शासन ने निलंबन आदेश जारी किया है। 

दोनों आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भारतीय सेवा आचरण नियम 1968 के नियम 3 के उल्लंघन के लिए की गई है। गुरुवार को आईपीएस मुकेश गुप्ता के खिलाफ उनके ही पूर्व विभाग ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज की थी। डीजी मुकेश गुप्ता के अलावा आईपीएस रजनेश सिंह पर एफआईआर दर्ज हुई थी। दोनों आईपीएस अधिकारियों पर फोन टैपिंग का आरोप है। गौरतलब है कि 12 फरवरी 2015 को छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में भूचाल मच गया। इसी दिन एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा ने प्रदेश में नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापा मारा।

निलंबन का आदेश पत्र।

इस कार्रवाई में करोड़ों रुपए नगदी के साथ ही भ्रष्टाचार से संबंधित कई दस्तावेज़, हार्ड डिस्क और डायरी जब्त की गई थी। बता दें कि छत्तीसगढ़ की नई कांग्रेस सरकार ने 36 करोड़ रुपये के इस घोटाले में एसआईटी जांच करवा रही है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिल मालिकों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया। इसके बदले करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी की गई। इसी तरह नागरिक आपूर्ति निगम के ट्रांसपोर्टेशन में भी भारी घोटाला किया गया। 

इस मामले में 27 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज़ किया गया था। जिनमें से 16 के ख़िलाफ़ 15 जून 2015 को अभियोग पत्र पेश किया गया था। जबकि मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. आलोक शुक्ला और अनिल टूटेजा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की अनुमति के लिये केन्द्र सरकार को चिट्ठी लिखी गई  IPS मुकेश गुप्ता और एसपी रजनेश सिंह के निलबंन को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बड़ा बयान दिया है। बघेल ने कहा कि- ‘ जो कूट रचना करे हैं, छेड़छाड़ करें हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी, और हुई है। यह तो निजता के हनन का बहुत गंभीर मामला है। जो पहले सुनने में आ रहा था, वह दिखाई भी दे रहा है।’

(जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की बस्तर से रिपोर्ट।)








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Jeengar DS Gahlot :: - 02-09-2019
जागो - उच्च पदस्थ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों - जागो ... आखिर, कब तक राजनेताओं के "गुलामनिष्ठ-यस-सर" बन "अपमानित व बदनाम" होते रहोगे ... ? क्या - इसे भी राजनीतिक-दुर्भावना से प्रेरित "निलंबन" कहा-समझा जाये ... अथवा, किसी प्रभावी-राजनेता को बचाने के लिए इन दोनों पुलिस-अधिकारियों को "टार्गेट" बनाया गया है ... यों भी - बिना किसी प्रभावी व भ्रष्ट्र राजनीतिक-संरक्षण व मौखिक-आदेश के कोई भी उच्च पदस्थ-अधिकारी (वह चाहे प्रशासनिक-अधिकारी हो या पुलिस-अधिकारी हो) - ना तो भ्रष्ट्राचारी ही बन सकता है और ना ही अपराधी ही बन सकता है ... वर्ना तो, वह केवल जनसेवी व देशसेवी और शिष्टाचारी व सहयोगी ही बने होते हैं ... ध्यान रहे - यदि देश का प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी समूह स्व-प्रेरित ईमानदार बन कर पूरी स्पष्टता व निष्पक्षता से देश व आमजन के प्रति बनी रहने वाली अपने पद-दायित्व की जिम्मेदारी व जवाबदेही का "निर्वहन" करने का "संकल्प" कर लें --- तो, देश व आमजन - सहजता व सरलता से भ्रष्ट्राचारियों व अपराधियों से पूर्ण-मुक्त हो सकता है ... क्योंकि, वह अपनी योग्यता के सहारे "प्रतियोगी-परीक्षाएं" उत्तीर्ण करके ही इन पदों के लायक बने होते हैं, ना कि किसी "राजनेता की अनुकम्पा" से इन पदों के लायक बने होते हैं ... हाँ, मलाईदार-पदों पर उनकी "नियुक्तियां" ही इन मक्कार व लुटेरे "राजनेताओं" के सहारे टिकी हुई है ... तो छोड़ों इस "मोह-लालच" को और बचो इन जब-तब होने वाली ऐसी राजनीतिक-साजिशों से ... वर्ना, होते रहो ऐसे ही "अपमानित व बदनाम" ... - जीनगर दुर्गा शंकर गहलोत, वरिष्ठ नागरिक व पत्रकार, कोटा (राज.) (10-02-2019 ; 12:50 AM)