छात्रसंघ में महिला अध्यक्ष चुनकर पंजाब विश्वविद्यालय ने रचा इतिहास

मुद्दा , , शुक्रवार , 07-09-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। पंजाब विश्वविद्यालय के छात्रों ने पहली बार एक महिला को छात्र संघ का अध्यक्ष चुनकर इतिहास रच दिया है। हाल में संपन्न हुए चुनाव में वामपंथी छात्र संगठन स्टूडेंट फॉर सोसाइटी (एसएफएस) की प्रत्याशी कनुप्रिया अध्यक्ष पद पर विजयी रही हैं। 

पंजाब यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट कौंसिल (पीयूसीएससी) के अध्यक्ष पद पर कनुप्रिया की ये जीत 719 वोटों से हुई है। दूसरे नंबर पर संघ से जुड़े विद्यार्थी परिषद के आशीष राणा रहे। जबकि अकाली दल की छात्र ईकाई एसओआई ने तीसरा और कांग्रेस के एनएसयूआई प्रत्याशी ने चौथा स्थान हासिल किया।

“दि प्रिंट” के हवाले से आई खबर में बताया गया है कि 22 वर्ष की कनुप्रिया जीव विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट की छात्रा हैं। और वो तरनतारन जिले के पट्टी गांव से ताल्लुक रखती हैं। 2014 से वो विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं। जीत के बाद उन्होंने कहा कि ये न केवल उनके लिए बल्कि उनके संगठन और पूरे विश्वविद्यालय के लिए बहुत बड़ा दिन है।

उनका कहना था कि “विश्वविद्यालय पूरी शिद्दत के साथ एक बदलाव चाहता था। पहले इस तरह की एक अवधारणा थी कि लड़कियां किसी महिला प्रत्याशी को वोट नहीं करेंगी लेकिन ऐसा मामला नहीं है। बहुत लड़कियों ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए उत्साहित किया।”

आखिर एसएफएस है क्या?

एसएफएस का गठन 2010 में हुआ था। और तब से अब तक वो चार बार विश्वविद्यालय में चुनाव लड़ चुका है। खास बात ये है कि उसने हमेशा अध्यक्ष पद पर ही चुनाव लड़ा।

संगठन के संस्थापक सदस्यों में से एक सचिंद्र पाली का कहना था कि “ये चुनाव हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं। राजनीतिक दल पैसे और ताकत से खेलते हैं लेकिन एक समय के बाद छात्र अब जागरूक हो गए हैं। अब वो समझ गए हैं कि पैसे और ताकत से उनके वोट नहीं खरीदे जा सकते हैं।”  

एक परंपरागत तरीके से वामपंथी छात्र संगठन एसएफएस ने नुक्कड़ नाटक और प्रदर्शनों के आयोजन के जरिए मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक किया। संगठन विश्वविद्यालय में लिंग के आधार पर भेदभाव का खुला विरोधी रहा है। इसके साथ ही ये चंडीगढ़ और कैंपस में प्रचलित “गेदी” कल्चर के खिलाफ भी आवाज उठाता रहा है। जिसमें लड़के समूह बनाकर कारों में घूमते हैं और लड़कियों पर छींटाकशी करते हैं।

पार्टी के घोषणापत्र में लड़कियों के छात्रावासों में कर्फ्यू के समय को खत्म करने का वादा किया गया है। स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों के नियमितीकरण के एजेंडे को भी उसने उठाया है। साथ ही संगठन का कहना है कि परिसर को कैसे गाड़ियों से मुक्त कराया जाए इसकी भी पहल संगठन करेगा।








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