सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार की सुकमा एनकाउंटर पर पीआईएल, सोमवार को होगी सुनवाई

त्रासदी , नई दिल्ली/ बस्तर, बृहस्पतिवार , 09-08-2018


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तामेश्वर सिन्हा

नई दिल्ली। सुकमा एनकाउंटर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सर्वोच्च अदालत 13 अगस्त यानी सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेगी। नरायन राव नाम के एक शख्स ने इस सिलसिले में एक पीआईएल दायर की है। जिसमें उन्होंने इसी महीने की छह तारीख को हुए एनकाउंटर में 15 लोगों की मौत को चुनौती देते हुए उसे फर्जी करार दिया है। पीआईएल के संबंध में याचिकाकर्ता के वकील की दलील सुनने के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने इसे स्वीकार कर लिया और आगे सुनवाई के लिए सोमवार का दिन तय कर दिया। 

गौरतलब है कि इस एनकाउंटर में मारे गए ज्यादातर लोग नाबालिग हैं। पीआईएल में आदिवासियों को मारने वाले सुरक्षा बलों के जवानों के खिलाफ 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गयी है। इसके अलावा इसमें मौजूदा जज के नेतृत्व में न्यायिक जांच कराने की मांग भी शामिल है। याचिका में मृतकों के शवों को कब्रों से खोदकर उनकी फिर से पोस्टमार्टम करने की मांग की गयी है। नरायन राव ने कहा कि एनकाउंटर में शामिल सभी जवानों के प्रमोशन और पुरस्कार पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता के वकील वी रघुनाथ ने सीबीआई या फिर एसआईटी गठित कर इस आपराधिक मामले की गहराई से जांच की मांग की है।

आपको बता दें कि मशहूर आदिवासी नेता और कार्यकर्ता सोनी सोरी ने घटनास्थल का दौरा किया था। वहां से लौटने के बाद उन्होंने पूरी मठभेड़ को फर्जी करार दिया था। उनका कहना था कि मारे गए सभी लोग सामान्य किसान थे और खेतों से उठाकर उन्हें भून दिया गया था। इसमें आधे से ज्यादा नाबालिग थे। मरने वालों की संख्या 15 बतायी गयी है।

15-15 लोग मार दिए जा रहे हैं और उसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। भारतीय लोकतंत्र के इस वीभत्स चेहरे को देखकर अगर कोई डरता नहीं है तो ये अपने आप में बड़ा सवाल बन जाता है।








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