लखनऊ जेल में हो सकती है तारिक कासमी की हत्या! वकील ने लगाई सुरक्षा की गुहार

ज़रा सोचिए... , लखनऊ, सोमवार , 27-08-2018


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जनचौक ब्यूरो

लखनऊ। रिहाई मंच के अध्यक्ष और एडवोकेट मोहम्मद शुएब ने एक अपराध के मामले में दोषी करार दिए गए मोहम्मद तारिक कासमी और मोहम्मद अख्तर वानी की जेल में जान के खतरे की आशंका जताई है। इस सिलसिले में उन्होंने सूबे के आला अधिकारियों को खत लिखा है। हालांकि शुएब ने बताया कि दोष सिद्ध का निर्णय सुनने के बाद कासमी ने उन्हें टेंशन न लेने की सलाह दी है और उम्मीद जताई कि अपील में वे बाइज्जत रिहा कर दिए जाएंगे। 

यूपी के पुलिस महानिदेशक को लिखे पत्र में शुएब के मुताबिक मोहम्मद तारिक कासमी ने जेल में अपनी सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मुकदमें की सुनवाई के दौरान उसने कुछ दिनों से अपनी शिकायत नहीं की है। जबकि जेल अधिकारियों तथा एटीएस के लोगों से उसे हमेशा जान का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि मोहम्मद तारिक कासमी द्वारा उच्च अधिकारियों के सामने वरिष्ठ अधीक्षक जिला जेल लखनऊ की शिकायत किए जाने के कारण पहले उसे लखनऊ जेल में प्रताड़ित किया गया और बाद में उसका स्थानांतरण जिला जेल बाराबंकी में कर दिया गया। वहां जाकर भी वो खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहा था। 

शुएब ने कहा कि विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि लखनऊ जेल के अंदर मोहम्मद तारिक कासमी की हत्या की योजना तैयार की गई है। योजना के अनुसार सजा सुनाए जाने के बाद एटीएस के लोग अभियोजक के माध्यम से माननीय न्यायाधीश महोदया से लखनऊ जेल में रोकने का आदेश पारित कराएंगे और लखनऊ जेल में तनहाई में रखने के बाद उसकी गला घोंटकर हत्या कर देंगे।

फिर हत्या करने के बाद जेल अधिकारियों द्वारा उसे फांसी पर लटका दिया जाएगा और कहा जाएगा कि सजा का अवसाद बर्दाश्त न कर पाने के कारण बंदी मोहम्मद तारिक कासमी ने जेल में आत्म हत्या कर ली। ज्ञात हो कि जिला जेल लखनऊ में नौशाद तथा उसके अन्य साथियों के जरिये भी तारिक की हत्या के प्रयास की साजिश जेल अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है जिसकी स्वीकारोक्ति नौशाद आदि मेरे समक्ष कर चुके हैं।

लिहाजा शुएब का प्रशासन से कहना था कि उक्त मामला तारिक कासमी के जीवन से जुड़ा है। इसलिए आवश्यक है कि अविलंब इस मामले में त्वरित कार्रवाई कर मोहम्मद तारिक का जीवन बचाया जाए। चूंकि आरडी निमेष जांच कमीशन रिपोर्ट की दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिशों से पुलिस अधिकारियों का एक वर्ग तारिक कासमी की जान लेना चाहता है और इससे पहले उसके सहअभियुक्त खालिद मुजाहिद की हत्या फैजाबाद जेल से लखनऊ जेल लाते समय पुलिस कस्टडी में की जा चुकी है जिसकी विवेचना लंबित है। इसलिए ये मामला और गंभीर हो जाता है।शुएब ने जिला प्रशासन से कासमी के लिए उचित सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। 

गौरतलब है कि अभियुक्त अपराध संख्या 547/2007 थाना कैसरबाग लखनऊ को दिनांक 23-08-2018 को सत्र परीक्षण संख्या 913/2008 सपठित सत्र परीक्षण संख्या 1580/2008 में न्यायालय स्पेशल जज (एससी/एसटी एक्ट) लखनऊ महोदया द्वारा दोषी सिद्ध किया गया है। 








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