बस्तर में ग्रामीण आदिवासी को पुलिसकर्मियों ने पीट-पीट कर किया अधमरा

ज़रा सोचिए... , कांकेर (बस्तर), शुक्रवार , 01-06-2018


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तामेश्वर सिन्हा

कांकेर (बस्तर)। बस्तर के आदिवासी इलाके में पुलिसिया कहर जारी है। खाकीवर्दीधारी पहले एक आम आदिवासी ग्रामीण को पकड़कर जंगल में ले गए और फिर नक्सली बताकर उसे इतना पीटा कि वो अधमरा हो गया। और उसके बाद उसे जंगल में ही छोड़कर सभी चल दिए। 

जानकारी के अनुसार उत्तर बस्तर कांकेर जिला के पखांजुर संगम क्षेत्र में मेहड़ा गांव के रहने वाले ग्रामीण आदिवासी धनसिंह मंडावी अंजाड़ी गांव से लौट रहे थे, तभी अंजाड़ी नाले के पास पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और फिर अपने साथ जंगल लेते गयी। वहां पहुंचकर उन्होंने उसकी जमकर पिटाई की। फिर सभी उसे वहीं छोड़कर चले गए। ग्रामीण अथवा परिजनों को जब पुलिस द्वारा मार-पीट की खबर लगी तो धनसिंह को ढूंढते हुए जंगल पहुंचे जहां धनसिंह अधमरी हालत में पड़े हुए थे।

फिर उन्हें ग्रामीण उठा कर ले आए और उनको पखांजुर अस्पताल में भर्ती करा दिए । ग्रामीण ने इसकी लिखित शिकायत करते हुए बताया है कि 29 मई को लगभग 12 बजे ग्राम अंजड़ी से ग्रामीण अपने गांव लौट रहा था तभी रास्ते में पुलिस ने उसे रुकवाकर नक्सल आरोपी बताते हुए लाठी-डंडों से बेहरमी से मारना चालू कर दिया। ग्रामीण के अनुसार पुलिस कह रही थी कि जंगल में ले जाकर एनकाउंटर किया जाएगा।

आप को बता दें कि ग्रामीण पखांजुर अस्पताल में भर्ती है जहां उनके शरीर में अंदरूनी चोटे आने के कारण ब्लड सर्कुलेशन रुक गया है । वहीं अस्पताल के डॉक्टर इसे पुराना मामला बता कर मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मारपीट की खबर पुलिस के आला अधिकारियों को लगने के बाद पुलिस के जवान लगातार अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं । 

आप को यह भी बताते चलें कि पखांजुर क्षेत्र में हाल के दिनों में ग्रामीणों के साथ बेहरमी से मार-पीट की खबर लगातार सामने आ रही है । सवाल यह उठता है कि आम आदिवासियों को जानवरों की तरह मार-पीट कर क्या सरकार नक्सलवाद खत्म करना चाहती है?  इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है । 

क्षेत्र के जागरूक आदिवासी कार्यकर्ता सुखरंजन उसेंडी कहते हैं कि पुलिस लगातार आम आदिवासियों को मार पीट रही है। कइयों के फर्जी एनकाउंटर की भी खबरें आ रही हैं। इन सब मामलों को लेकर 7 जून को क्षेत्र के आदिवासी आंदोलन करते हुए पखांजुर थाने का घेराव करेंगे।

(तामेश्वर सिन्हा पेशे से पत्रकार हैं और अपनी जमीनी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।)








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Prahlad Kumar Potai :: - 06-02-2018
लगातार अदिवाशियों पर जुल्म हो रही है और सरकार कुछ नहीं कर रही है हम अदिवाशियों के जल जंगल जमीन के अधिकार को छिनते जा रहे हैं ये कोई छोटी बात नहीं है,इस संबंध में हम अदिवाशियों को युद्ध स्तर पर कार्य करना चाहिए क्योंकि हमारे आदिवाशी इलाका खनिज संपदा वन संपदा से परिपूर्ण है जिस पर अधिकार केवल हम अदिवाशियों का ही है पर सरकार मनमानी ढंग से उसपर अपना अधिकार जमाना चाहती है। इस कार्य मे ब्राम्हणवाद व पूंजीपति वर्ग बढ़ चढ़ कर धन बटोरने पर लगे हुए हैं अपने पूँजी के baduolat अदिवाशियों को खरीद रहे हैं उन्हें मारकाट कर रहें उन्हें झूठी दिलासा दे कर उनके जमीन खरीदी बिक्री कर उन्हें बत्तर जीवन जीने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

Sukhmen salam :: - 06-01-2018
आए दिन आदिवासी बाहुल क्षेत्रों में पुलिसियाई कहर देखने या सुनने को मिल रहा है। इससे साफ जाहिर होता है,की सरकार आदिवासियों को ट्राइबल क्षेत्रों से भगा कर पलायान के लिए मजबूर कर रहा है।और जो विरोध करे उनके साथ जबरदस्ती कोई ना कोई इलज़ाम लगाकर मारपीट कर रही है। ताकि उनके जल जंगल जमीन को हथिया कर पूंजीपतियों को से सकें। ये घटना बिल्कुल ही निंदनीय एवम् गंभीर समस्या है,क्योंकि आए दिन किसी ना किसी क्षेत्र में कोई ना कोई इस घटना का शिकार हो रहा है। जल्द ही इस संबंध में आदिवासी समाज द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो नक्सली उन्मूलन के नाम पर आदिवासियों पर पुलिसिया कहर यूं ही बरकरार रहेगी। जल्द ही इसके विरोध में बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा।