बलिया में ज़िंदा जलाई गईं दलित महिला रेशमी की मौत के बाद तनाव, सरकार पर हत्यारोपी ठाकुरों को बचाने का आरोप

त्रासदी , , मंगलवार , 13-03-2018


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जनचौक स्टाफ

लखनऊ/बलिया। बलिया में सूदखोरों द्वारा जिंदा जलाई गयीं दलित महिला रेशमी देवी की मौत के बाद गांव में तनाव है। हालांकि डीएम द्वारा गांव पहुंचने और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग समेत अन्य मांग जल्द पूरा करने के आश्वासन के बाद रेशमी देवी का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। लेकिन गांव वालों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हत्यारोपी गुड्डू सिंह जल्द गिरफ्तार नहीं हुआ तो फिर सड़क पर उतर कर आंदोलन किया जाएगा। 

जलाई गईं रेशवी देवी की मौत। फोटो : साभार

 

 

  • मुख्य हत्यारोपी गुड्डू सिंह की जल्द गिरफ़्तारी की मांग
  • पीड़ित दलित परिवार को पचास लाख रुपये, नौकरी और जमीन दिए जाने की मांग
  • हत्यारे ठाकुरों को बचाने में लगी है योगी सरकार– रिहाई मंच

 

आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च की आधी रात को बलिया के जजौली गांव में दबंग सूदखोरों ने 50 वर्षीय दलित महिला रेशमी देवी को पेट्रोल डालकर जला दिया था। उन्हें बुरी तरह झुलसी हालत में बलिया ज़िला अस्पताल ले जाया गया जहां से उन्हें बनारस रेफर कर दिया गया। बनारस में इलाज के दौरान 11 मार्च को उनका निधन हो गया। 

बताया जाता है कि सूदखोरों की 9 मार्च को कोर्ट में पेशी होने वाली थी। 8 मार्च की मध्य रात्रि में गुड्डू सिंह के भाई सत्यम सिंह और उनके साथ बहुत सारे लोग आए। वे लोग चाहते थे कि रेशमी कोर्ट में जाकर गवाही न दे। लेकिन रेशमी ने धमकी देने के बाद भी अपना इरादा नहीं बदला और कहा कि मैं कोर्ट जाऊंगी और दोषियों को सजा दिलवाऊंगी। उसके बाद उन लोगों ने गुस्से में उनके ऊपर तेल फेंक दिया और आग लगा दी। इस दौरान हमलावरों ने पीड़िता की बच्चियों के साथ मारपीट भी की। 

परिजनों के मुताबिक रेशमी ने कुछ साल पहले बेटी के शादी के लिए सूद पर कर्ज़ लिया था, लेकिन पैसा चुकाने के बावजूद हत्यारोपी गुड्डू सिंह लगातार सूद वसूल रहा था। उसके लोग उनके घर पर आकर अक्सर धमकाते रहते थे। साल भर पहले भी गुड्डू सिंह ने मारपीट की थी। साथ ही जलाने के अलावा घर फूंकने की कोशिश की थी। इस घटना के बाद एफआईआर भी दर्ज हुई,  जिसका मुकदमा भी चल रहा है। इसी सब का बदला लेने के लिए ये वारदात की गई।

 

रेशमी देवी को जलाने की घटना के बाद से ही परिजनों और गांव वालों में गुस्सा था। 11 मार्च को उनकी मौत की खबर मिलने पर और तनाव फैल गया। प्रशासन ने मामला दबाने के लिए रेशमी देवी का बनारस में ही अंतिम संस्कार कराना चाहा, लेकिन परिजन शव को गांव ले जाने पर अड़ गए। इसके बाद शव गांव आया तो गांव वालों ने तय किया कि जब तक मुख्य हत्या आरोपी गुड्डू सिंह को गिरफ्तार नहीं किया जाता और पीड़ित परिवार को मुआवज़ा नहीं दिया जाता तब तक रेशमी का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने पीड़ित दलित परिवार को पचास लाख रुपये, नौकरी, दो एकड़ जमीन की मांग की। 

 

ग्रामीणों का तेवर देखकर शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और गांव में पुलिस के साथ आरएएफ तैनात कर दी गई। लेकिन गांव वाले इस दबाव के आगे ऩहीं झुके।  

गांव वालों और बलिया की अन्य इंसाफ पसंद जनता की एकजूटता देखकर आखिरकर बलिया डीएम को रेशमी भारती की मौत के कई घंटे बाद गांव जाना ही पड़ा। डीएम ने मृतका के परिजनों और ग्रामीणों को हत्यारोपी गुड्डू सिंह की जल्द गिरफ्तारी समेत सभी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद कल, 12 मार्च को दोपहर बाद तीन बजे रेशमी देवी का दाह संस्कार कर दिया गया। लेकिन इसी के साथ गांव वालों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी न हुई तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा। 

 

उधर दलित-अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के खिलाफ खड़े होने वाले रिहाई मंच ने भी दलित महिला रेशमी भारती के लिए इंसाफ की मांग की है। रिहाई मंच ने इन हालात के लिए सीधे मुख्यमंत्री योगी पर भी निशाना साधा है। मंच का कहना है कि योगी को दलित महिला की जिंदा जलाकर की गई हत्या, हत्या नहीं दिखती, क्योंकि हत्यारे उनकी ही जाति के हैं।

 

रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव का कहना है कि दंगाइयों को शहीद बताकर चेक बांटने वाले योगी को बलिया की दलित महिला को जिंदा जलाने से कोई फर्क नहीं पड़ता। गाय को मां बताने वालों के लिए दलित माताओं की क्या इज्जत है इस घटना से साफ हो जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर ठाकुर जाति के हैं और पीड़ित परिवार दलित, यही वजह है कि अभी तक मुख्य अभियुक्त गुड्डू सिंह की गिरफ्तारी नहीं हुई है। भाजपा सरकार में मंत्री उपेंद्र तिवारी और स्थानीय भाजपा विधायक अपराधियों का संरक्षण कर रहे हैं। पीड़ित परिवार को पुलिस प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया था कि 24 घंटे के अंदर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लेकिन अभी तक केवल दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है और मुख्य अभियुक्त तक पकड़ से बाहर है। सरकारी दबाव के चलते ही उसे जानबूझकर गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है।

राजीव यादव के मुताबिक पीड़ित परिवार पर मुकदमा वापस लेने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पहले वाले हमले के दौरान ही अगर पुलिस प्रशासन ने उचित कार्रवाई की होती तो अपराधियों ने इस तरह का दुस्साहस नहीं किया होता और रेशमी देवी आज ज़िंदा होतीं।  










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