वाघेला एक बार फिर बगावत के लिए तैयार

राजनीति , , बृहस्पतिवार , 08-06-2017


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। गुजरात के कद्दावर नेता और सूबे में बापू के नाम से जाने-जाने वाले शंकर सिंह वाघेला एक फिर बगावत के लिए तैयार हैं। पहली बार उन्होंने बीजेपी से बगावत कर कांग्रेस की पतवार थामी थी। इस बार वो कांग्रेस को छोड़कर फिर से अपनी पुरानी पार्टी बीजेपी का दामन थामने के लिए तैयार हैं। बीजेपी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब कुछ ठीक रहा तो 20 अगस्त को वाघेला भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाएंगे। और इसका एक संकेत कल अहमदाबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की होने वाली बैठक से मिलेगा।

वाघेला-मोदी

पूरी हो चुकी है डील!

बताया जा रहा है कि अंदरखाने दोनों पक्षों के बीच इसकी डील हो चुकी है। बापू ने भाजपा से खुद को मुख्यमंत्री बनाए जाने की इच्छा कभी नहीं जाहिर की बल्कि वह चाहते थे कि उन्हें उप राष्ट्रपति और उनके बेटे को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। लेकिन बीजेपी इसके लिए तैयार नहीं हुई। फिर एक दूसरे विकल्प पर विचार हुआ जिस पर दोनों के बीच सहमति बन गयी। इसके तहत बीजेपी बापू को राज्यपाल बनाएगी। और अगर 2017 में पार्टी फिर से सत्ता में आती है तो उनके बेटे को कैबिनेट में रखा जाएगा। इस फार्मूले से 75 वर्ष के ऊपर के किसी व्यक्ति को मंत्री न बनाये जाने की शर्त भी बरकरार रहेगी। 

कांग्रेस को भी अपने तरीके से इसके संकेत मिल गए हैं। दरअसल बताया जा रहा है कि वाघेला पार्टी से खुद को मुख्यमंत्री का प्रत्याशी घोषित करवाना चाहते थे। लेकिन पार्टी उसके लिए तैयार नहीं हुई। इसी नाराजगी में वो कुछ दिनों पहले विदेश यात्रा पर चले गए। वहां से लौटने के बाद वो पार्टी के किसी भी कार्यक्रम या फिर आयोजन में शामिल नहीं हो रहे हैं। प्रदेश प्रभारी अशोक गहलोत कभी अहमदाबाद गए भी तो उनसे मिलने के लिए उन्हें उनके घर जाना पड़ा। इसके पहले उन्होंने ट्विटर पर राहुल गांधी को अनफालो कर दिया था। जो एक बड़ी खबर बनी थी। इसे भी उसी दिशा में एक बड़ा संकेत माना गया था। इन्हीं स्थितियों को देखते हुए कांग्रेस भी डैमेज कंट्रोल में जुट गयी है। उसकी कोशिश है कि वाघेला के पार्टी छोड़ने की स्थिति में उसे कम से कम नुकसान हो। इसके तहत उसने आगामी विधानसभा चुनाव में सभी मौजूदा विधायकों के टिकट का ऐलान कर दिया है। जिससे वाघेला के साथ कोई भी विधायक न जाने पाए। इसी संकेत का नतीजा है कि यूथ कांग्रेस के एक कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में सूबे के बड़े नेताओं का नाम था लेकिन वाघेला का नाम उससे नदारद था। 

वाघेला-राहुल

कांग्रेस की कल की बैठक अहम

कल यानी 9 जून को अहमदाबाद में होने वाली वरिष्ठ कांग्रेसियों की बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव और सूबे के नेता अहमद पटेल भी शामिल हो रहे हैं। अगर इस बैठक में वाघेला शामिल नहीं होते हैं तो ऐसा माना जा रहा है कि उनका बीजेपी में जाना तय है।

शंकर सिंह वाघेला हमेशा से गुजरात के कद्दावर नेता रहे हैं। संघ से डिग्री लेने के बाद जनसंघ से राजनीति शुरू करने वाले वाघेला का दल बदलने का इतिहास पुराना है। हुजूरिया और खुजूरिया के अलावा वह जनता पार्टी से लोक सभा और राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैं। 1977 में पहली बार जनता पार्टी के टिकट पर कपड़वंज सीट से लोक सभा पहुंचे थे। 1980 का चुनाव हारने के बाद जनता पार्टी ने उन्हें 1984 में राज्य सभा भेजा था। 1989 में गांधी नगर से भाजपा के टिकट पर उन्होंने लोकसभा सीट जीती थी। वाघेला अलग-अलग दलों से पांच मर्तवा सांसद रह चुके हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चे में तब आए जब उन्होंने 1996 में बीजेपी से बगावत कर राष्ट्रीय जनता पार्टी नामक अपने दल का गठन किया। फिर कांग्रेस के साथ जुगाड़ की राजनीति के तहत उन्हें एक वर्ष के लिए मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा भी मिला। आखिर में वो कांग्रेस में शामिल हो गए।

वाघेलानामा 

फिर वाघेला का एक दूसरा रूप सामने आया। 2002 में मोदी के हाथों पराजित होने के बाद उन्होंने 2003 में शक्ति दल का गठन किया। जिसका उद्देश्य धर्म जाति से ऊपर उठ कर मानवता के लिए विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के त्रिशूल का जवाब लाठी से देना था। संघ की तर्ज पर वाघेला ने अहमदाबाद के आश्रम रोड पर लाल लाठी के साथ शक्ति दल की परेड की। शक्ति दल को वाघेला ने कांग्रेस से अलग रखा था। उन्होंने न तो कांग्रेस के किसी नेता का फोटो बैनर पर लगाया न ही किसी कांग्रेसी लीडर को सम्मलेन में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उस समय वाघेला के सम्मलेन को नज़दीक से देखने वाले बाबूलाल सैय्यद बताते हैं शक्ति दल की शक्ति देख कर उस समय बीजेपी और मोदी से अधिक कांग्रेस पार्टी के विरोध पक्ष के नेता अमर सिंह चौधरी और अहमद पटेल डर गए थे। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने विचारधारा का हवाला देकर शक्ति दल को ही समाप्त कर दिया। जिसका नतीजा आज कांग्रेस भुगत रही है। कांग्रेस ने वाघेला को अपनी सुविधा के अनुसार पार्टी में ज़रूर रखा लेकिन न तो सही ढंग से उनका उपयोग किया, न ही कुबूल किया और न ही उन्हें तलाक दिया।






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Salman Misri :: - 06-08-2017
Very interesting news.

Rahish m mansuri :: - 06-08-2017
2017 ke chunav ka natija agar bjp ke oaks me aaya to samjo bapu up mukhaymantri or nitin patel mukhaymantri tay he

Imran Shaikh :: - 06-08-2017
Nice

Imran Shaikh :: - 06-08-2017
Nice