झूठा प्रमाण पत्र देने के कारण हिंदी विवि का क्षेत्रीय निदेशक एआईयू से बर्खास्त

मुद्दा , नई दिल्ली, शनिवार , 20-04-2019


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जनचौक ब्यूरो

वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय निदेशक पीयूष कुमार पातंजलि को भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एसोसिएशन आफ इंडियन यूनिवर्सिटीज) के संयुक्त सचिव पद से बर्खास्त कर दिया गया है। पीयूष कुमार पातंजलि ने जिस नानक्रिमिलेयर ओबीसी सर्टिफिकेट के आधार पर उक्त नौकरी पाई थी, उसे सरकार ने झूठा पाया इसलिए उस सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया गया है। पीयूष कुमार पातंजलि ने उक्त प्रमाण पत्र भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एसोसिएशन आफ इंडियन यूनिवर्सिटीज) के संयुक्त सचिव पद का विज्ञापन आने के बाद 20-08-2018 को बनवाया था।

गाजियाबाद के जुगेश असपाल की शिकायत मिलने के बाद जांच की गई जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के संयुक्त कुलसचिव (कालेजेज) ने 04-02-2019 को पत्र देकर सूचित किया कि पीयूष कुमार पातंजलि के पिता डा. प्रेमचंद पातंजलि दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अंबेडकर कालेज के अवकाश प्राप्त प्राचार्य हैं और वे क्रिमिलेयर स्टेटस में आते हैं। दिल्ली के सरस्वती विहार के इक्सक्यूटिव मजिस्ट्रेट/ तहसीलदार ने 08-03-2019 को यह कहते हुए उक्त प्रमाण पत्र रद्द कर  दिया कि पीयूष कुमार पातंजलि ने धोखाधड़ी कर उसे प्राप्त किया। तहसीलदार ने पीयूष कुमार पातंजलि की उक्त धोखाधड़ी व आपराधिक षड्यंत्र के खिलाफ 20-03-2019 को दिल्ली के शालीमार बाग थाने में शिकायत दर्ज की। 

भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एसोसिएशन आफ इंडियन यूनिवर्सिटीज) के संयुक्त सचिव पद से बर्खास्त होने के बाद पीयूष कुमार पातंजलि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा लौट आए हैं। आपको बता दें कि पातंजलि लिएन पर भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एसोसिएशन आफ इंडियन यूनिवर्सिटीज) गए थे। पीयूष कुमार पातंजलि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय निदेशक हैं। 

इस मसले पर जनचौक ने वर्धा स्थित अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश्वर मिश्र से बात की। उनका कहना था कि उन्हें सारे मामले की जानकारी है और फिर से ज्वाइन करने के लिए पातंजलि विश्वविद्यालय आये थे लेकिन अभी उन्हें ज्वाइन नहीं कराया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन विधिक राय ले रहा है। उसके आने के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।  

पातंजलि के खिलाफ कार्रवाई।

आपको बता दें कि उनके पिता डा. प्रेमचंद पातंजलि इसी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य हैं। उन पर भी चोरी कर डेवलपमेंट आफ एडल्ट इजुकेशन इन इंडिया नामक किताब लिखने का संगीन आरोप है। चोरी कर किताब लिखने के उनके कारनामे का पर्दाफाश 15 नवंबर 2009 को रात आठ से नौ बजे तक सीएनइबी चैनल ने अपने विशेष कार्यक्रम में किया था।

कई अखबारों में भी चोरी कर किताब लिखने का वह समाचार प्रसारित हुआ था फिर भी पातंजलि को हिंदी वि.वि. की कार्य परिषद का सदस्य बना दिया गया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डेयरी टेक्नोलाजी विभाग के प्रोफेसर दिनेश सी. राय को भी हिंदी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद का सदस्य बना दिया गया। दिलचस्प है कि उन्हें हिंदी साहित्यकार श्रेणी में कार्य परिषद का सदस्य बनाया गया जबकि हिंदी साहित्य से उनका दूर का भी नाता नहीं है। 

हिंदी विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के एक अन्य सदस्य प्रो. अरुण कुमार भगत के खिलाफ भी 14 अप्रैल 2019 को मध्य प्रदेश शासन के इकोनोमिक ओफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) ने धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की एफआईआर दर्ज की है। ईओडब्ल्यू ने एफआईआर में जिक्र किया है कि प्रो. भगत माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियुक्ति के पात्र नहीं थे। यूजीसी के नियमों के विपरीत उनकी नियुक्ति हुई।


 








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