किसानों से मिलने जा रहे योगेंद्र यादव के साथ तमिलनाडु पुलिस ने की हाथापाई, यादव समेत कई नेता गिरफ्तार

राजनीति , नई दिल्ली, शनिवार , 08-09-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव को तमिलनाडु की पुलिस ने आज गिरफ्तार कर लिया। यादव चेन्नई-सलेम एक्सप्रेस प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन में शामिल किसानों से मुलाकात करने जा रहे थे। लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही रोककर उन्हें पहले हिरासत में लिया और फिर उनके खिलाफ धाराएं लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने पुलिस पर अपने साथ हाथापाई करने का आरोप लगाया है।

यादव ने ट्वीट कर कहा है कि “तमिलनाडु पुलिस मुझे और मेरी टीम को थिरुअन्नामलाई जिले में हिरासत में ले लिया है। हम मूवमेंट अगेंस्ट 8 लेन एक्सप्रेस वे के निमंत्रण पर यहां आए थे। हमें किसानों से मिलने जाने से रोक दिया गया। फोन छीन लिया गया, हाथापाई की गयी और उसके बाद जबरन धकेल कर गाड़ी में बैठा दिया गया। तमिलनाडु में पुलिस का पहला ऐसा अनुभव”।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष ने एक वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि “मुझे बताया गया कि कानून औऱ व्यवस्था की समस्या के चलते मुझे वहां जाने की इजाजत नहीं है......क्योंकि मैं वहां अराजकता पैदा करने जा रहा हूं।” उन्होंने बताया कि उनके ये कहने पर कि वो किसानों से उनके घरों में मुलाकात करेंगे फिर भी पुलिस ने इजाजत नहीं दी।

यादव ने ट्विटर पर कहा कि उन्हें बगैर किसी औपचारिक आदेश के हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि हिरासत में लिए जाने के पांच घंटे बाद उन्हें एक डिटेल आदेश पकड़ाया गया।

एआईकेएससीसी वर्किंग ग्रुप ने योगेंद्र यादव के अलावा ओडिशा के लिंगराज, तमिलनाडु के बालकृष्णन, हरियाणा के प्रदीप सिंह की गिरफ्तारी की निन्दा की है। संगठन का कहना था कि ये नेता थिरु अन्नामलाई में 8 लेन राजमार्ग के विरोध में चल रहे किसान संघर्ष में वहां के किसानों से बात करने गये थे।

नेताओं ने गांव वालों से बात करने के लिए जिलाधिकारी से पूर्व अनुमति ले रखी थी। परन्तु पुलिस ने उन्हें रोक दिया, उनके कैमरामैन को पीटा, उनके फोन छीन लिए, उन्हें खड़े वाहन में धक्का दे दिया और चेन्गुम पुलिस स्टेशन में रखा हुआ है।

एआईकेएससीसी ने जनता द्वारा जनवादी ढंग से अपनी आवाज उठाने के विरुद्ध इस अलोकतांत्रिक गिरफ्तारी की निन्दा की है और नेताओं की तुरंत रिहाई की मांग की है।

लोगों को अपनी राय रखने से रोकना, जबरदस्ती उनकी जमीन व जीविका छीनना, सरकारों के काम का आम ढंग बनता जा रहा है। ये सरकारें जनता को उजाड़कर उनके हित के खिलाफ अपना ‘विकास’ का एजेण्डा थोप रही हैं। वे बड़ी कम्पनियों, बड़े ठेकेदारों, भ्रष्ट नेताओं व अफसरों की सेवा कर रही हैं।










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