Subscribe for notification

गांधीमार्ग से संभव है वैश्विक समस्याओं का समाधान : राधा बहन भट्ट

बा-बापू की 150 वीं जयंती वर्ष पर देश-विदेश में विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं। इसी क्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज और आकाशवाणी के संयुक्त तत्वाधान में “महात्मा गांधी का जीवन दर्शन और युवा” विषय पर एक राष्ट्रीय गोष्ठी आयोजित की गई। दिल्ली के राजधानी कॉलेज में आकाशवाणी के कलाकारों ने गांधी के प्रिय भजनों के गायन से कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।औपचारिक रूप से कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. राजीव रंजन गिरि ने कहा कि गांधी की प्रासंगिकता पर जब बात होती है तो हम यह देखते हैं कि सिर्फ भारत ही नहीं वरन समूचे विश्व में उनकी प्रासंगिकता बताने वाले मिल जाते हैं। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लोग गांधी के विचारों से प्रभावित हैं। विश्व के भूगोल के दो छोर पर खड़े दो शख्सियत आइन्स्टीन और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ उनके महत्व को रेखांकित करते हैं। आइन्स्टीन कहते हैं कि “आने वाली पीढ़ियां शायद ही यह विश्वास करे कि इस धरती पर हांड–मांस का एक ऐसा आदमी भी जन्मा था। दिनकर कहते हैं कि “तेरा विराट यह रूप कल्पना पट पर नहीं समाता है, जितना कुछ कहूं मगर कहने को बहुत रह जाता है।”
अतिथियों का स्वागत करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश गिरि ने कहा कि “भारत ही नहीं विश्व इतिहास में गांधी जी अविवादित शख्सियत हैं। गांधी आज भी युवाओं के नायक हैं। आधी धोती पहन कर उन्होंने देश को सन्देश दिया कि जब तक हम पूरे देश के शरीर को वस्त्र से ढंक नहीं लेते, पूरे कपड़े नहीं पहनूंगा।” अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि गांधी कैसे महात्मा बने? उनका समय प्रबंधन कैसा था, राजनीति से लेकर पर्यावरण, शिक्षा, अर्थशास्त्र विषयों पर गांधी के विचार क्या थे, उसे हमे पढ़ना चाहिए।
आकाशवाणी की सुजाता रथ ने कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए गोष्ठी के संचालन के लिए जैनेन्द्र सिंह को आमंत्रित किया। जैनेन्द्र ने गांधी के ‘मोहन से महात्मा’ बनने की कहानी को संक्षेप में बताया।युवा कार्यकर्ता वैभव श्रीवास्तव ने गांधी विचार को तीन मुद्दों पर समझाने की कोशिश की। गांधी जी लिंग संवेदनशीलता के प्रति कितने सजग थे या महिलायों के प्रति उनके मन में कितना सम्मान था, यह उन्होंने कस्तूरबा से सीखा। आज का युवा लिव इन रिलेशनशिप में रहता है। लेकिन यह सब गांधी जी ने बा से सीखा। बा को हम पहला स्त्रीवादी कह सकते हैं। बा का जीवन हमें जेंडर संवेदना की समझ देता है। दूसरा, दूसरों के विचारों के प्रति हमारे मन में सम्मान का भाव कैसे जगे, यह हम गांधी से जान सकते हैं। आज हर कोई अपने को विचारों से लैश समझ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या हम सही राजनीतिक समझ रख रहे हैं? सोशल मीडिया पर हमे हर पक्ष जानने के बाद ही अपनी राय देनी चाहिए। दक्षिणपंथी और वामपंथी रुझान वाले एक दूसरे के पक्ष को सुने, विरोधी विचार को भी सुने। गांधी जी एक तरफ तानाशाह हिटलर से पत्र व्यवहार कर रहे थे तो दूसरी तरफ मानवतावादी टैगोर से भी पत्र व्यवहार कर रहे थे। तीसरा, हमारे समय के ज्वलंत मुद्दों मसलन पर्यावरण पर गांधी जी के क्या विचार थे। इसका हमें अध्ययन करना चाहिए।
आइपीएस अधिकारी इल्मा अफरोज ने कहा कि बा-बापू के विचारों को हमने अपने अम्मी से सीखा। आत्मविश्वास और सबसे कमजोर की सेवा का पाठ मेरी अम्मी ने मुझे सिखाया। गांधी जी ने गरीबों की सेवा का एक ताबीज दिया था। जो अहम् हावी होने या कुछ समझ में न आने पर आजमाने को कहा था। कहा था कोई भी काम करने के पहले यह देखों कि जो काम तुम करने जा रहे हो उससे सबसे गरीब के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा। आखिरी आदमी के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला काम करो। इसलिए मैं अम्मी और देश की सेवा के लिए अमेरिका छोड़कर स्वदेश आ गयी।
वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि “आज तो गांधी और नेहरु को सारी समस्याओं का जड़ बताया जा रहा है। लेकिन मैं उन्हें दो सदी का सर्वश्रेष्ठ हिन्दू कहता हूं।” गांधी को उनकी मां की सीख ने महान बनाया। अफ्रीका से लेकर भारत तक में उन्होंने आजीवन भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। अछूत और दलितों के हक़ में लडाई लड़ी।प्रो. वी के कौल ने कहा कि गांधी सिर्फ विचार ही नहीं देते थे बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारते थे। सुराज, स्वराज और स्वदेशी को बढाने की बात करते थे।

प्रसिद्ध गांधीवादी राधा भट्ट ने कहा कि हमारा शरीर और जीवन समाज ने बनाया है, हम समाज को क्या दे सकते हैं, यह सोचना चाहिए। आज समूचे विश्व में हिंसा की पराकाष्ठा है। नशा, ड्रग्स का बोलबाला है। ऐसे में युवाओं का दायित्व बढ़ जाता है। गांधी अपने अंतिम समय तक सोच, विचार और व्यवहार से युवा थे। इसलिए वे आज भी युवाओं के रोल मॉडल हैं। आज सम्पूर्ण विश्व कह रहा है कि यदि धरती को बचाना है तो गांधी के रस्ते पर चलना होगा। यही गांधी की प्रासंगिकता है।
कार्यक्रम के अंत में आकाशवाणी के कलाकारों ने गांधी के प्रिय भजन के गायन किया। कार्यक्रम के अंत में आकाशवाणी दिल्ली की निदेशक रितु राजपूत ने आये हुए अतिथियों का आभार प्रकट किया।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on September 25, 2019 8:57 am

प्रदीप सिंह

लेखक डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

Share
%%footer%%