शीरोज कैफे पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत,एसिड हमला पीड़ितों को दिया 9 महीने का समय; पेश है पीड़ितों की पूरी दास्तान

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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। एसिड हमला पीड़ितों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। लखनऊ में शीरोज कैफे हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 9 महीने का वक्त दिया है। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट को मामले को सुलझाने को कहा गया है।

जैसा कि आप सबको पता है कि योगी सरकार ने अखिलेश यादव सरकार द्वारा दी गई जगह छोड़ने के लिए नोटिस दिया था। उन्हें 30 अक्टूबर तक जगह छोड़ने के लिए कहा गया था। पीड़ितों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से संपर्क किया लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।

जिसके बाद शीरोज हैंगआउट से जुड़े छांव फाउंडेशन के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की। दरअसल सरकार द्वारा ये जगह मौखिक आश्वासन और बिना किसी लिखित आदेश के पीड़ितों को दी गई थी। लेकिन पीड़ितों का कहना है कि उनका जीवन इस कैफे पर निर्भर करता है।

लखनऊ में पॉश गोमती नगर में स्थित इस कैफे शेरोज में 15 एसिड अटैक पीड़ित काम करते हैं।

शीरोज हैंगआउट को एसिड अटैक पीड़ित महिलाएं चलाती थी। इस कैफे ने एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की जिंदगी बदल दी और उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास आया। लेकिन महिला कल्याण निगम की ओर से कैफे की संचालन करने वाली छांव फाउंडेशन को आदेश दिया गया था कि 29 सितंबर तक कैफे को बंद किया जाए।

आदेश के बाद कैफे का संचालन कर रही पीड़ित महिलाओं ने विरोध जताया। वे मंत्री से भी मिलने पहुंची, लेकिन महिला कल्याण मंत्री ने महिलाओं से मिलने से इंकार कर दिया। शीरोज हैंगआउट आगरा में संचालित कैफे की तर्ज पर 2016 में खोला गया था। उस समय दो साल का कॉन्ट्रैक्ट छांव फाउंडेशन के साथ हुआ था। छांव फाउंडेशन ने कल्याण निगम पर अपनी करीबी संस्था को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया है। 

पिछले दिनों छांव फांउंडेशन के लोगों से मेरा रंग की संचालक शालिनी श्रीनेत ने बातचीत की। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी, एसिड अटैक सरवाइवर्स और छांव फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं से।

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