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Thursday, August 5, 2021

झारखंड: ग्राहम स्टेंस, उनके बेटे फिलिप और टिमोथी को दी गयी श्रद्धांजलि

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रांची। आज 23 जनवरी, 2021 को झारखंड जनतांत्रिक महासभा और झारखंड ओर्गनाइजेशन फ़ॉर सोशल हार्मोनी के संयुक्त तत्वावधान में लोको कॉलोनी, टाटा नगर, जमशेदपुर में ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटे फिलिप और टिमोथी की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
बता दें कि ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस (58 वर्ष) और उनके बेटे फिलिप (10 वर्ष) और टिमोथी (7 वर्ष) को 22 जनवरी, 1999 की रात में उन पर धर्मांतरण का आरोप लगाकर 50-60 की संख्या में आए उग्र हिंदूवादियों ने जिंदा जला कर मार डाला था। जिसने पूरी दुनिया में भारत और इंसानियत को कलंकित किया, पूरी दुनिया में भारत की आलोचना हुई।

यह उस वक्त की मॉब लिंचिंग थी। उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घटना की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इसकी जांच के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी मौके पर भेजी थी। जिसने अपनी रिपोर्ट में कई लोगों को आरोपी बताया था। पुलिस और मजिस्ट्रियल जांच भी हुई थी। आरोपियों के खिलाफ अदालत में मुकदमा चला। निचली अदालत ने दारा सिंह को फांसी और एक अन्य शख्स महेंद्र हेमब्रोम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह की सज़ा को उम्रकैद में बदला। दोनों अभी सजा काट रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले में दोषियों ने जिस अपराध को अंजाम दिया, वो बेहद निंदनीय था।

कार्यक्रम में सबसे पहले ग्राहम स्टेन उनके दो बेटे फिलिप और टिमोथी के तस्वीर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गयी। उसके बाद एक सभा का भी आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 1999 को ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटे फिलिप और तिमोथी की जिंदा जला कर की गयी हत्या आरएसएस के अनुषांगिक संगठन बजरंग दल जैसे राइट विंग फोर्स द्वारा पहली प्रायोजित पॉलिटिकल मॉब लिंचिंग थी।

वक्ताओं ने कहा कि चश्मदीद गवाहों के बयान पर हत्या का आरोप बजरंग दल के ऊपर लगा। लेकिन कोर्ट में बजरंग दल के ऊपर आरोप सिद्ध नहीं हुआ, जो एक लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए बहुत ही चिन्ताजनक बात है। उस समय बजरंग दल के ओड़िसा के प्रमुख प्रताप चन्द्र षड़ंगी थे। उनके ऊपर भी हत्या का आरोप लगा। लेकिन वे बरी हो गए। आज वे संसद में बैठे हैं और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा भी है।

इस हत्याकांड में पुलिस ने दारा सिंह समेत 13 लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। दारा सिंह समेत सभी सजायाफ्ता कैदी आजीवन कारावास में है। बताते चलें कि डॉक्टर ग्राहम स्टेंस यहां कुष्ठ रोगियों की सेवा करते थे। ओडिशा के आदिवासी बहुल और पिछड़े जिले क्योंझर, मयूरभंज और बारिपदा में ग्राहम स्टेंस कुष्ठ रोगियों की सालों से सेवा कर रहे थे, वे उनका इलाज करते थे। ग्राहम स्टेंस साल 1941 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में पैदा हुए थे। उनकी ओडिशा के एक युवक सांतनु सत्पथी से उनकी दोस्ती हो जाती है। सांतनु उनको भारत आने का न्योता देते हैं। दोस्त के निमंत्रण पर स्टेंस 1965 में ओडिशा के बारीपदा आते हैं। स्टेंस भारत आए तो फिर यहीं के होकर रह गए। फिर कभी नहीं लौटे। स्टेंस ने इवैंजेलिकल मिशनरी सोसायटी ऑफ मयूरभंज यानी ईएमएसएम के साथ मिलकर काम शुरू किया। ग्राहम स्टेंस यहां आदिवासियों के बीच कुष्ठरोगियों का इलाज करने लगे।

साल 1982 में उन्होंने मयूरभंज लेप्रोसी होम नाम से एक संस्था बनाई। उन दिनों कुष्ठ रोग को भारत में बड़ा रोग माना जाता था। इसका इलाज काफी कठिन समझा जाता था। ऐसे दौर में ग्राहम स्टेंस ने गरीब आदिवासियों के इलाज का बड़ा जिम्मा उठाया। इसी दौरान उनकी मुलाकात ग्लैडिस से हुई। वे भी कुष्ठरोगियों की सेवा में लगी रहती थीं। साल 1983 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों के तीन बच्चे हुए। एक बेटी ईस्थर और दो बेटे फिलिप और टिमोथी। ओडिशा में ज्यादा वक्त बिताने की वजह से स्टेंस अच्छी उड़िया बोल लेते थे और अपने मरीजों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय थे।

घटना के आरोपियों को बजरंग दल से संबंध बताए गए। लेकिन हिंदूवादी संगठन इन रिश्तों को नकारते रहे। इस घटना की वजह से तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार बुरी तरह आरोपों से घिर गई थी। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घटना की कड़ी आलोचना की। फिर इसकी जांच के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी मौके पर भेजी। जिसने अपनी रिपोर्ट में कई लोगों को आरोपी बताया। लेकिन बजरंग दल की कोई चर्चा नहीं की। पुलिस और मजिस्ट्रियल जांच भी हुई, उसमें भी बजरंग दल की चर्चा नहीं की गई।

इस श्रद्धांजलि सभा में माँग की गई कि प्रताप चन्द्र षाड़ंगी को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाया जाना चाहिए तथा सभी दोषियों को संवैधानिक तरीके से सजा दी जाए और मॉब लिंचिंग के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जाए।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से अजित तिर्की, बीरेन्द्र कुमार, दीपक रंजीत, राजू, लक्ष्मी राव, सोनी कुमारी, बिट्टू कुमार, विजय कुमार, इरकन तिर्की आदि लोग उपस्थित थे।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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